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रेड बॉल क्रिकेट : रोहित शर्मा और विराट कोहली रणजी से फॉर्म तलाशें या युवाओं के लिए जगह छोड़ें

बेबाक/संजीव मिश्र। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भारतीय क्रिकेट के जिन दो सितारों का सूर्य अस्त होता नजर आया वे हैं कप्तान रोहित शर्मा और पूर्व कप्तान विराट कोहली। टीम इंडिया को रेड बॉल से अब अगली टेस्ट सीरीज इंग्लैंड में पांच महीने बाद ही खेलनी है। जाहिर है आउट ऑफ फॉर्म खिलाड़ियों के लिए इंग्लैंड में अपनी लय प्राप्त करना आसान नहीं होगा। इन दोनों खिलाड़ियों का उस दौरे के लिए सलेक्शन तभी होगा, जब ये चयनकर्ताओं को आश्वस्त कर दें कि वे फॉर्म में लौट चुके हैं। ऐसे में इन दोनों के पास एक ही रास्ता बचता है वो यह कि या तो घरेलू क्रिकेट खेलकर फॉर्म में लौटे या फिर संन्यास लेकर युवा खिलाड़ियों के लिए जगह खाली कर दें। हालांकि उनके पास मौजूदा सत्र में रणजी ट्रॉफी के दो मैचों की संभावित चार पारियां ही बची हैं। ये जरूर हो सकता है कि दोनों खिलाड़ी टीम से जुड़ शानदार प्रदर्शन कर अपनी टीम को नॉक आउट दौर में पहुंचा दें। तब उनको ज्यादा मैच खेलने के मौके मिल सकते हैं। यानि घरेलू क्रिकेट ही उनके कॅरिअर में प्राण फूंक सकता है।

दोनों की रणजी टीमें अपने ग्रुप में तीसरे स्थान पर

टीम इंडिया के दोनों स्टार क्रिकेटर अपने शानदार कॅरिअर खराब मोड़ पर कतई खत्म नहीं करना चाहेंगे, इसलिए दोनों को रणजी खेलने का मौका चूकना नहीं चाहिए। अब जरा इन दोनों की टीमों की इनके ग्रुप में स्थिति पर भी नजर डाल लेते हैं।

वडोदरा (27 अंक) और जम्मू-कश्मीर (23 अंक) के बाद रोहित शर्मा की मुंबई (22 अंक ) की टीम ग्रुप ए में तीसरे नंबर पर है, जबकि ग्रुप डी में तमिलनाडु (19) और चंडीगढ़ (19) के बाद विराट कोहली की दिल्ली (14) रेलवे के बाद चौथे स्थान पर है। दिल्ली के लिए नॉक आउट दौर में पहुंचना काफी मुश्किल और दूसरी टीमों के प्रदर्शन पर निर्भर है। महत्वपूर्ण यह है कि विराट को रणजी मैचों की सख्त जरूरत है। उनके जुड़ने से न सिर्फ दिल्ली की टीम चार्ज हो जाएगी बल्कि विराट को भी अपनी फॉर्म पकड़ने का मौका मिल जाएगा।

गावस्कर और गंभीर के तेवर अब सख्त नजर आ रहे

टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने आस्ट्रेलिया से पांचवां और अंतिम टेस्ट हारने के बाद घरेलू स्तर पर रेड-बॉल क्रिकेट के लिए अनुभवी खिलाड़ियों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा था कि मैं चाहता हूं कि प्रत्येक खिलाड़ी यदि उपलब्ध है तो घरेलू क्रिकेट जरूर खेले, क्योंकि रणजी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट में भाग लेना टेस्ट क्रिकेट के प्रति खिलाड़ी के समर्पण को दर्शाता है। महान पूर्व बल्लेबाज सुनील गावस्कर तो इस मामले में और भी सख्त नजर आए। उन्होंने कहा कि यदि खिलाड़ी बिना किसी वैध कारण के घरेलू मैच छोड़ते हैं तो कोच गौतम गंभीर को कड़ा रुख अपनाना चाहिए। उन्हें अपने खिलाड़ियों को भारतीय क्रिकेट के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए जवाबदेह बनाना चाहिए। गंभीर को ऐसे खिलाड़ियों से कहना चाहिए कि यदि आपके पास वह प्रतिबद्धता नहीं है तो हमें आपकी जरूरत भी नहीं है।

विराट और रोहित का आस्ट्रेलिया में कुल 221 रनों का ही सहयोग

रणजी ट्रॉफी का दूसरा राउंड 23 जनवरी से शुरू हो रहा है। इस दौरान इंग्लैंड की टीम भारत में पांच मैचों की टी-20 सीरीज खेल रही होगी लेकिन रोहित शर्मा और विराट कोहली इस फॉर्मेट से पहले ही संन्यास ले चुके हैं, इसलिए रणजी में न खेलने का इनके पास कोई बहाना भी नहीं है। दोनों के लिए अब रणजी के बचे मैच खेलना ही एकमात्र विकल्प है। खासकर यह देखते हुए कि बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में विराट कोहली के बल्ले से नौ पारियों में सिर्फ 190 और रोहित शर्मा के बल्ले से तीन मैचों में केवल 31 रन ही निकले थे। रोहित शर्मा से ज्यादा रन तो आकाशदीप ने ही बना डाले थे। इन प्रमुख बल्लेबाजों के आस्ट्रेलिया में योगदान पर नजर डालें तो दोनों ने मिलकर टीम इंडिया को मात्र 221 रनों का ही सहयोग दिया।

विराट अंतिम बार 2012 में यूपी के खिलाफ रणजी मैच खेले थे

यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा अंतिम बार 2015 में रणजी मुकाबले में खेले थे, जबकि विराट कोहली ने अपना अंतिम रणजी मुकाबला 2012 में उत्तर प्रदेश के खिलाफ खेला था, जिसमें उन्होंने 14 और 43 रन बनाए थे। यानि रोहित नौ साल से और विराट 12 साल से रणजी नहीं खेले हैं। दिल्ली को 23 से 27 जनवरी तक अपने शैड्यूल के मुताबिक सौराष्ट्र के खिलाफ राजकोट और मुंबई को जम्मू-कश्मीर के खिलाफ अपने विकेट पर खेलना है। इसके बाद 30 जनवरी से दिल्ली को रेलवे के खिलाफ अपने घर पर और मुंबई को मेघालय से मुंबई में ही खेलना है। फिर क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले होने हैं। रोहित खेले तो रणजी में उनकी टीम को ऑक्सीजन मिल जाएगी और उनको भी फॉर्म में लौटने का अवसर मिल सकेगा। लेकिन विराट कोहली के लिए परिस्थितियां भिन्न हैं, क्योंकि उनकी टीम अपने ग्रुप में चौथे स्थान पर है। उसका नाॅक आउट दौर में पहुंचना काफी कठिन है। हालांकि कोहली जैसे बड़े खिलाड़ी को अपनी तकनीक पर काम करने के लिए दो मैच ही पर्याप्त होंगे।

युवा खिलाड़ी इंतजार कर रहे अपनी ईिनंग का

आप क्यों भूल जाते हैं कि सलामी बल्लेबाज अभिमन्यु ईश्वरन, मिडिल ऑर्डर में साईं सुदर्शन, देवदत्त पल्लिकल, बाबा इंद्रजीत जैसे प्रतिभाशाली बल्लेबाज बाहर बैठे अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर हमारे बीते जमाने के सुपर स्टार एक दर्जन पारियों के दौरान एक शतक या अर्द्धशतक लगा कर ही टीम पर कब्जा जमाए रखते हैं। आखिर आप युवा खिलाड़ियों के लिए इतने बेरहम कैसे हो सकते हैं? कप्तान आस्ट्रेलिया में अपनी खिल्ली उड़वाने के बाद भी बयान देते हैं कि मैं खुद अंतिम टेस्ट से हटा हूं अभी रिटायर नहीं हुआ हूं, जैसे भारतीय क्रिकेट आपकी जागीर हो। आप 37-38 साल के होने के बाद भी जब तक चाहेंगे खेलेंगे और भारतीय क्रिकेट आपको झेलता रहेगा। हालांकि गौतम गंभीर हेड कोच के पद से हिलाए नहीं जाते हैं तो अब ये ज्यादा दिनों तक चलेगा नहीं। बीसीसीआई को इन्हें घरेलू क्रिकेट खेलने की सख्त हिदायत देनी चाहिए। यदि फिर भी नहीं मानते हैं तो इनके भारतीय क्रिकेट के लिए योगदान को देखते हुए एक-एक फेयरवेल मैच देकर इनसे हाथ जोड़ लेने में ही भारतीय क्रिकेट का हित है।

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