
राहत भी, असंतोष भी, लोकल व्यापार के लिए अभी और सुधार की दरकार
बजट में हर वर्ग का ध्यान रखने का प्रयास : अजीत सिंह बग्गा
–सुरेश गांधी
वाराणसी : बजट को लेकर वाराणसी के व्यापारिक जगत में मंथन तेज़ है। इसी क्रम में वाराणसी व्यापार मंडल द्वारा होटल आरके ग्रैंड में बजट चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें व्यापारियों के साथ-साथ अधिवक्ता, डॉक्टर, प्रोफेसर, बैंकिंग और कर विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। चर्चा में बजट को लेकर समर्थन और असहमतिकृदोनों स्वर स्पष्ट रूप से सामने आए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा ने बजट को संतुलित बताते हुए कहा कि इसमें हर वर्ग का ध्यान रखने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारियों को सेल्फ असेसमेंट की सुविधा, टैक्स मामलों में जेल के प्रावधान से राहत और एमएसएमई सेक्टर को प्रोत्साहन जैसे कदम व्यापार के माहौल को भयमुक्त बनाएंगे। बजट 2026 ने उम्मीदों की एक तस्वीर ज़रूर खींची है, लेकिन वाराणसी के व्यापारियों का साफ संदेश है अगर ‘वोकल फॉर लोकल’ को सच में मज़बूती देनी है, तो आने वाले समय में स्थानीय व्यापार के लिए ठोस और व्यावहारिक फैसले अनिवार्य होंगे।
कर नियमों में राहत से बढ़ेगा भरोसा
चार्टर्ड अकाउंटेंट मुदूत जी ने कहा कि रिटर्न भरने की तारीख बढ़ाना और कुछ व्यावहारिक छूट देना आम लोगों और व्यापारियोंकृदोनों के लिए राहत भरा है। उनके अनुसार कर प्रणाली में लचीलापन टैक्स अनुपालन को आसान बनाएगा और इससे दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
अंतरराष्ट्रीय सोच वाला दूरगामी बजट
वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर ने बजट को दूरदर्शी बताते हुए कहा कि यह केवल घरेलू आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक हालात को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह बजट आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
अंकों में भी बंटी राय
चर्चा के दौरान प्रतिभागियों ने बजट को 5 से लेकर 10 अंक तक दिए। कुल मिलाकर बजट की सराहना भी हुई, लेकिन यह राय भी उभरकर आई कि लोकल व्यापार की ज़मीनी चुनौतियों को देखते हुए इसमें अभी और सुधार की ज़रूरत है। कार्यक्रम में सुनील चौरसिया, शाहिद कुरेशी, पीएनबी बैंक के जितेंद्र वर्मा, सीए मुदूत, एडवोकेट शशांक शेखर, एस.एस. बहल, जय प्रकाश गुप्ता, शरद जायसवाल, राजू वर्मा, अरविंद जायसवाल, संतोष सिंह, रमेश पांडे, प्रिया अग्रवाल, इंद्रजीत सिंह सहित बड़ी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे।
बजट विकसित भारत की दिशा में कारगर होगा : प्रो.कृपाशंकर जायसवाल
प्रोफेसर कृपा शंकर जायसवाल ने इस बजट को विकसित भारत की दिशा में एक सशक्त कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट युवा शक्ति, रोजगार सृजन और आर्थिक स्थिरता को केंद्र में रखते हुए तैयार किया गया है। व्यक्तिगत और क्षेत्रीय दृष्टिकोण से हटकर यदि हम पूरे देश और विश्व पर ध्यान दें, तो भारत की विकास दर और वैश्विक आर्थिक स्थिति पर यह बजट एक स्पष्ट संदेश देता है। “भारत की विकास दर समय-समय पर आर्थिक सर्वेक्षणों के अनुसार सबसे ऊपर रही है। यह बजट दिखाता है कि हम किस दिशा में बढ़ रहे हैं, हमारी भौतिक क्षमता में सुधार हो रहा है और सरकारी निवेश यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर में लगातार वृद्धि हो रही है। यह देश के दीर्घकालीन विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में हमारी मजबूती का प्रमाण है. बजट में शिक्षा क्षेत्र और पेशेवर प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया है। साथ ही, एमएसएमई सेक्टर में टैक्स सुधार, टीडीएस और टीसीएस में बदलाव, और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स भी बजट में शामिल किए गए हैं। प्रोफेसर जायसवाल के अनुसार, यह संकेत है कि शिक्षा और व्यवसाय दोनों क्षेत्रों को अछूता नहीं छोड़ा गया है। हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल खोलने की योजना बजट में शामिल है, जो महिला शिक्षा और सुरक्षित अध्ययन वातावरण के लिए महत्वपूर्ण कदम है। “यह बजट केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि व्यवसायियों और नागरिकों के हाथों में अधिक नियंत्रण और अवसर देने वाला है।”
सस्ता ऋणः स्थानीय बाजारों की ज़रूरत
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के तत्वावधान में वनायक प्लाजा मलदहिया में आयोजित बजट परिचर्चा में व्यापारियों ने कहा, बजट में छोटे दुकानदारों और पारंपरिक व्यापारियों के लिए सस्ती ब्याज दरों पर ऋण की स्पष्ट घोषणा न होना भी व्यापारियों को खलता है। व्यापार मंडल का मानना है कि यदि स्थानीय व्यापारियों को आसान शर्तों पर पूंजी उपलब्ध कराई जाए, तो बाजारों में नकदी प्रवाह बढ़ेगा और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। आईआईए अध्यक्ष आरके चौधरी ने कहा कि छोटे व्यापारियों के लिए कंपोज़िशन स्कीम की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए, जीएसटी रिटर्न और नोटिस प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और व्यापारीदृहितैषी बनाया जाना चाहिए, ताकि व्यापारी बिना मानसिक दबाव और डर के अपना व्यवसाय सुचारु रूप से चला सकें।
स्वास्थ्य सुरक्षा की बड़ी ज़रूरत : मनीष गुप्ता
व्यापार मंडल से जुड़े मनीष गुप्ता का कहना है कि जीएसटी पंजीकृत व्यापारियों और उनके परिवारजनों के लिए ₹5 लाख तक की निःशुल्क स्वास्थ्य बीमा योजना को बजट में शामिल किया जाना चाहिए था। तेजी से बढ़ती महंगाई और इलाज के बढ़ते खर्च के बीच यह योजना लाखों व्यापारियों के लिए एक बड़ी सामाजिक सुरक्षा बन सकती थी। उनका मानना है कि जब सरकारी कर्मचारियों और संगठित क्षेत्र को स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलता है, तो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले व्यापारी वर्ग को इससे वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है।
ई-कॉमर्स बनाम पारंपरिक व्यापार
ई-कॉमर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच पारंपरिक व्यापारियों के संरक्षण की मांग भी ज़ोर पकड़ रही है। व्यापार मंडल का कहना है कि सरकार को एक संतुलित, न्यायपूर्ण और दीर्घकालिक नीति बनानी चाहिए, जिससे पारंपरिक बाजार भी समान अवसरों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें और उनकी पहचान व रोज़गार सुरक्षित रह सके। कुल मिलाकर केंद्रीय बजट 2026दृ27 में व्यापारियों के लिए सकारात्मक संकेत तो हैं, लेकिन सामाजिक सुरक्षा, जीएसटी सरलीकरण और सस्ते ऋण जैसे मुद्दों पर अपेक्षाएं अधूरी रह गई हैं। व्यापार मंडल का विश्वास है कि यदि सरकार आगामी नीतियों और फैसलों में इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करती है, तो व्यापारी वर्ग देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती देने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।





