जीवनशैली

बदलते मौसम में बढ़ रहा मसल्स क्रैम्प का खतरा! जानिए क्यों जकड़ रही हैं मांसपेशियां और कैसे पाएं राहत

आसमान इन दिनों एक अनोखा दृश्य दिखाने जा रहा है। पृथ्वी के करीब आया धूमकेतु सूरज का चक्कर लगाकर अब अंतरिक्ष की गहराइयों में लौट रहा है और आज से अगले 15 दिनों तक आकाश में ग्रहों की दुर्लभ कतार नजर आएगी। बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि एक सीध में दिखाई देंगे। यह सिर्फ खगोलीय घटना नहीं, बल्कि प्रकृति के उस रिद्म की याद दिलाती है जो मौसम से लेकर मानव शरीर तक हर स्तर पर असर डालती है।

मौसम में हो रहा यह बदलाव सीधे तौर पर हमारे शरीर पर भी प्रभाव डालता है। जैसे ही तापमान और वायुमंडलीय दबाव बदलता है, वैसे ही नसों और मांसपेशियों में नई हलचल शुरू हो जाती है। यही कारण है कि इन दिनों कई लोग सुबह उठते ही जकड़न, थकान और शरीर में भारीपन की शिकायत कर रहे हैं।

ट्रांजिशनल सीजन में क्यों बढ़ता है दर्द?

आंकड़े बताते हैं कि मौसम बदलने के दौरान ज्वाइंट्स और मसल्स का दर्द 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। तापमान और एटमॉस्फेरिक प्रेशर में उतार-चढ़ाव नसों में झुनझुनी, खिंचाव और कमजोरी को बढ़ाता है। सर्दी में मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं, जबकि गर्मी की शुरुआत में डिहाइड्रेशन नसों के सिग्नल को धीमा कर देता है। नतीजतन दर्द, ऐंठन और कमजोरी की समस्या बढ़ जाती है।

किन बीमारियों के मरीजों को ज्यादा खतरा?

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक बदलते मौसम में ऑस्टियो-आर्थराइटिस, सायटिका और फाइब्रो-मायल्जिया जैसी समस्याएं ज्यादा उभरकर सामने आती हैं। यही वजह है कि अस्पतालों की ऑर्थो ओपीडी में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे समय में शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है।

मसल्स में ऐंठन की प्रमुख वजहें

पानी की कमी मसल्स क्रैम्प की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। जब शरीर में पर्याप्त हाइड्रेशन नहीं होता तो ब्लड सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे मांसपेशियों के मूवमेंट पर असर पड़ता है और ऐंठन शुरू हो जाती है।
न्यूट्रिशन की कमी भी अहम कारण है। खासतौर पर सोडियम, मैग्नीशियम और पोटेशियम की कमी नसों और मसल्स को कमजोर बना देती है।
लो ब्लड प्रेशर की स्थिति में भी मांसपेशियों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता, जिससे जकड़न और दर्द बढ़ सकता है।

मसल्स में दिक्कत क्यों होती है?

जब ब्लड फ्लो रुकता है या कम हो जाता है, तो मांसपेशियों में अकड़न और दर्द महसूस होता है। नसों पर दबाव पड़ने से भी मसल्स की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इसके अलावा शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी मांसपेशियों को कमजोर बना देती है।

मसल्स की कमजोरी कैसे करें दूर?

रोजाना नियमित व्यायाम मांसपेशियों को लचीला और मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।
विटामिन-डी से भरपूर आहार लेने से हड्डियों और मसल्स को मजबूती मिलती है।
दिन में 4 से 5 लीटर पानी पीना शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाता है और नसों के सिग्नल को बेहतर बनाए रखता है।
आंवले का सेवन इम्यूनिटी के साथ-साथ मसल्स हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।

नसों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने के उपाय

गिलोय, अश्वगंधा, गुग्गुल, गोखरू और पुनर्नवा जैसी जड़ी-बूटियां नसों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए पारंपरिक रूप से उपयोग की जाती रही हैं। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार इनका सेवन करना बेहतर माना जाता है।

ऊपर बदलता आसमान और नीचे बदलता मौसम दोनों एक ही संदेश देते हैं—प्रकृति की हर हलचल का असर हमारे शरीर पर पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि शरीर के संकेतों को समझें, सही पोषण लें और नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। क्योंकि असली ताकत हमारी मजबूत नसों और लचीली मांसपेशियों में ही छिपी है।

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