दिल्ली आबकारी नीति पर PAC की रिपोर्ट से सनसनी, 2026 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में सोमवार को पेश लोक लेखा समिति (पीएसी) की रिपोर्ट ने आबकारी नीति 2021-22 को लेकर बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नीति के लागू होने के दौरान सरकार को 2,026.91 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, कैग ऑडिट में शराब की आपूर्ति, वितरण और निगरानी व्यवस्था में कई गंभीर खामियां सामने आईं। इन अनियमितताओं के चलते राजस्व को भारी नुकसान हुआ, जिसकी विस्तृत जानकारी पीएसी ने अपनी जांच में दी है।
टेंडर प्रक्रिया में लापरवाही से हुआ बड़ा घाटा
पीएसी अध्यक्ष अजय महावर द्वारा सदन में पेश रिपोर्ट में कहा गया है कि शराब दुकानों के लिए दोबारा टेंडर न निकाले जाने और लाइसेंस फीस में 144 करोड़ रुपये की छूट देने से सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान पहुंचा। समिति ने शराब बिक्री, तस्करी और लाइसेंस वितरण की निगरानी प्रणाली को और सख्त बनाने की सिफारिश की है।
कैग ऑडिट और विभागीय रिपोर्ट पर आधारित निष्कर्ष
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इसके निष्कर्ष पूरी तरह से कैग ऑडिट और आबकारी विभाग की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आधारित हैं, ताकि मौजूदा जांच या कानूनी प्रक्रियाओं पर कोई प्रभाव न पड़े। समिति ने जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि की है।
पहले विधानसभा में रखी गई थी रिपोर्ट
गौरतलब है कि दिल्ली में शराब के नियमन और आपूर्ति को लेकर कैग की रिपोर्ट 25 जनवरी को विधानसभा में पेश की गई थी। इसके बाद सदन ने आगे की जांच के लिए इसे पीएसी को भेज दिया था।
इसी बीच, उस समय की आम आदमी पार्टी सरकार ने आबकारी नीति 2021-22 को वापस ले लिया था। यह फैसला उस वक्त लिया गया जब तत्कालीन उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने नीति के निर्माण और क्रियान्वयन में कथित गड़बड़ियों को लेकर सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।
जोनल लाइसेंस सरेंडर, फिर भी नहीं हुआ रिटेंडर
रिपोर्ट में बताया गया है कि 19 जोनल लाइसेंस समय से पहले सरेंडर कर दिए गए थे, लेकिन आबकारी विभाग ने इन दुकानों के लिए दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की। इससे लगभग 890.15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
हालांकि, विभाग ने अपने जवाब में कहा है कि फरवरी से अप्रैल 2022 के बीच कई बार रिटेंडरिंग के निर्देश मांगे गए, लेकिन तत्कालीन सरकार या सक्षम प्राधिकारी से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
लाइसेंस फीस में 144 करोड़ की छूट भी सवालों में
पीएसी रिपोर्ट में 144 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफी को भी अनियमितता बताया गया है। कैग ऑडिट का हवाला देते हुए कहा गया कि आबकारी और वित्त विभाग दोनों ने इस छूट का विरोध किया था। इसके बावजूद 1 फरवरी 2022 को तत्कालीन उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर राहत दी गई और इसे लागू किया गया। बाद में 14 जुलाई 2022 को कैबिनेट से इसकी मंजूरी ली गई।



