
खर्राटे हैं खतरनाकः डा.सूर्यकान्त
KGMU में स्लीप सर्टिफिकेशन कोर्स कार्यशाला होगी आयोजित
लखनऊ : अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ में रविवार को आईसीएस स्लीप सर्टिफिकेशन कोर्स की कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह हैंड्स-ऑन स्लीप कार्यशाला इंडियन चेस्ट सोसाइटी तथा स्नोरिंग एंड स्लीप रिलेटेड डिसऑर्डर्स सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। इस कार्यशाला के वर्कशॉप डायरेक्टर डा. सूर्यकान्त, फाउंडर प्रेसिडेंट, स्नोरिंग एंड स्लीप रिलेटेड डिसऑर्डर्स सोसाइटी एवं डा. अमिता नेने (मुंबई), सेक्रेटरी, इंडियन चेस्ट सोसाइटी हैं। कार्यशाला की कोऑर्डिनेटर डा. ज्योति बाजपेई तथा डा. अभिषेक टंडन हैं। रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डा. सूर्यकान्त ने बताया कि इस एक दिवसीय कार्यशाला में देशभर से स्लीप मेडिसिन के विशेषज्ञ एवं चिकित्सक भाग लेंगे। इस कार्यशाला में खर्राटों (स्नोरिंग), ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए), स्लीप स्टडी, सी-पैप (सीपीएपी) उपचार, स्लीप स्टडी रिपोर्ट की व्याख्या, विभिन्न पीएपी उपकरणों के उपयोग तथा स्लीप डिसऑर्डर्स के आधुनिक प्रबंधन के बारे में विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा।
डा. सूर्यकान्त ने बताया कि खर्राटे को लोग कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं मानते हैं, बल्कि लोगों को लगता है कि खर्राटे लेकर सोने वाला बहुत बढ़िया और चैन की नींद सो रहा है। जबकि खर्राटे हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक होते हैं। डा. सूर्यकान्त ने बताया कि खर्राटे लेने वालों को रात भर अच्छी नींद नहीं आती है और उनकी नींद बीच-बीच में खुलती रहती है, साथ ही शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा भी कम हो जाती है, जिससे शरीर के हर अंग को नुकसान पहुँचता है। खर्राटे के कारण ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए), बीपी, हार्ट अटैक, डायबिटीज जैसी कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
डा. सूर्यकान्त ने सभी गाड़ी चलाने वालों को यह सलाह दी है कि यदि उन्हें खर्राटे आते हैं, तो उन्हें खर्राटे की जांच अवश्य करानी चाहिए, अन्यथा रात में नींद पूरी न होने के कारण ऐसे लोगों को दिन में बहुत नींद आती है, जिससे उनका एक्सीडेंट भी हो सकता है। दुनिया में लाखों लोगों के रोड एक्सीडेंट खर्राटों की समस्या के कारण ही होते हैं। इंडियन चेस्ट सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष डा. सूर्यकान्त ने बताया कि खर्राटे केवल एक सामान्य समस्या नहीं हैं, बल्कि यह ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं, जिससे उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, स्ट्रोक तथा सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि स्लीप मेडिसिन के क्षेत्र में प्रशिक्षित चिकित्सकों की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है और इस प्रकार की कार्यशालाएं चिकित्सकों को आधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित करने में अत्यंत उपयोगी हैं।
इस कार्यशाला में विभिन्न शैक्षणिक सत्रों के साथ-साथ हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा, जिसमें स्लीप लैब सेट-अप, स्लीप स्कोरिंग, स्लीप स्टडी रिपोर्ट की व्याख्या, पीएपी डिवाइस का उपयोग तथा स्लीप डिसऑर्डर्स के प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल रहेगा। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों के लिए एग्जिट एग्जाम आयोजित किया जाएगा तथा सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। डा.सूर्यकान्त ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएं चिकित्सकों में स्लीप डिसऑर्डर्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा मरीजों को बेहतर उपचार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने सभी चिकित्सकों से इस कार्यशाला में भाग लेकर स्लीप मेडिसिन के क्षेत्र में अपने ज्ञान और कौशल को उन्नत करने की अपील की। केजीएमयू की कुलपति पद्मश्री डा. सोनिया नित्यानन्द ने 22 फरवरी को होने वाली इस कार्यशाला के लिए डा. सूर्यकान्त एवं डा. अमिता नेने को कार्यक्रम की सफलता हेतु शुभकामनाएं दीं।




