
गाजियाबाद में निजी स्कूलों पर सख्ती, बिना सूचना फीस बढ़ाना अब नामुमकिन; 60 दिन पहले देनी होगी जानकारी, तय हुई सीमा
गाजियाबाद जिले में निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। अब कोई भी निजी स्कूल मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेगा। नए नियमों के तहत स्कूलों को फीस बढ़ाने से कम से कम 60 दिन पहले शिक्षा विभाग को इसकी पूरी जानकारी देनी होगी। इस व्यवस्था की निगरानी के लिए जिला स्तर पर शुल्क नियामक समिति का गठन किया जाएगा।
जिले में दो हजार से अधिक सरकारी और निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनमें करीब 1700 निजी स्कूल शामिल हैं। लंबे समय से फीस में अनियमित बढ़ोतरी और हर साल यूनिफॉर्म बदलने जैसी शिकायतों के बाद शासन ने यह कड़ा फैसला लिया है, जिससे अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
फीस बढ़ाने से पहले पोर्टल पर देनी होगी पूरी जानकारी
नए नियमों के अनुसार, स्कूलों को फीस बढ़ाने से पहले पोर्टल पर विस्तृत जानकारी अपलोड करनी होगी। इसमें किस कक्षा के लिए कितनी फीस तय की जा रही है और बढ़ोतरी के पीछे क्या कारण हैं, यह स्पष्ट करना अनिवार्य होगा। साथ ही यह जानकारी स्कूल की वेबसाइट और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में भी जमा करनी होगी। तय सीमा के अनुसार फीस में अधिकतम 5 प्रतिशत तक ही बढ़ोतरी की अनुमति होगी। सत्र के बीच में फीस बढ़ाने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
यूनिफॉर्म बदलने पर भी सख्त नियम लागू
निजी स्कूलों द्वारा हर साल यूनिफॉर्म में बदलाव कर अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ डालने की शिकायतों को देखते हुए इस पर भी सख्ती की गई है। अब कोई भी स्कूल पांच वर्ष से पहले यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं कर सकेगा। इसके अलावा पूरे साल की फीस एकमुश्त लेने पर भी रोक लगाई गई है। सभी स्कूलों को शुल्क का पूरा विवरण नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना और मान्यता रद्द तक की कार्रवाई
नए नियमों के पालन की जिम्मेदारी जिला शुल्क नियामक समिति को दी गई है, जिसमें जिलाधिकारी अध्यक्ष और जिला विद्यालय निरीक्षक सचिव होंगे। यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है तो पहली बार एक लाख रुपये, दूसरी बार पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। तीसरी बार उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
अभिभावकों को शिकायत का अधिकार, विभाग रहेगा सतर्क
अभिभावक या छात्र किसी भी अनियमितता की शिकायत सीधे जिला विद्यालय निरीक्षक या जिलाधिकारी से कर सकते हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल तय दुकानों से किताबें या अन्य सामग्री खरीदने के लिए दबाव बनाता है या नियमों के विपरीत फीस वसूलता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



