Surya Grahan 2026: अगस्त में लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, अभी नोट कर लें डेट और सूतक से जुड़े नियम

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में सूर्य ग्रहण को अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय और धार्मिक घटना माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का समय शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले सूतक काल प्रभावी हो जाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-अर्चना सहित कई धार्मिक गतिविधियों पर विराम लग जाता है। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगा था, हालांकि वह भारत में दिखाई नहीं दिया था।
अब लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि साल का दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगेगा और क्या इसका प्रभाव भारत में रहेगा। आइए विस्तार से जानते हैं पूरी जानकारी।
सूर्य ग्रहण 2026: जानें तारीख और समय
साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। खास बात यह है कि इसी दिन हरियाली अमावस्या भी है, जिससे इस ग्रहण का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। ग्रहण की शुरुआत रात 09 बजकर 04 मिनट पर होगी और इसका समापन 13 अगस्त की सुबह 04 बजकर 25 मिनट पर होगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा। मान्यताओं के अनुसार, जब ग्रहण भारत में दृश्य होता है तो सूतक काल मान्य होता है और उसके नियमों का पालन किया जाता है।
सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सूतक काल में किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज करने की सलाह दी जाती है। ग्रहण के दौरान देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए और विधिवत पूजा-पाठ से बचना चाहिए। हालांकि, इस समय मन ही मन गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और सूर्य मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है।
ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इसके पश्चात घर और मंदिर की सफाई की जाती है। देसी घी का दीपक जलाकर पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही मंदिरों या जरूरतमंद लोगों को अन्न, धन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। सूतक काल शुरू होने से पहले भोजन में तुलसी के पत्ते डालकर रखने की भी परंपरा है।
सूर्य ग्रहण में क्या न करें
सूर्य ग्रहण के दौरान पूजा-अर्चना नहीं करनी चाहिए और भगवान की मूर्तियों को स्पर्श करने से बचना चाहिए। इस समय भोजन ग्रहण करना वर्जित माना गया है। चाकू, सुई जैसी धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करने की सलाह दी जाती है। विवाह और सगाई जैसे शुभ कार्यों से दूरी बनाए रखें। तुलसी के पत्ते तोड़ना भी निषिद्ध है। इसके अलावा किसी से वाद-विवाद करने या नकारात्मक विचार रखने से भी बचने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का समय आत्मचिंतन, मंत्र जाप और दान-पुण्य के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।



