देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने पिछले पांच सालों में वित्तीय अनुशासन अपनाकर राज्य के कर्ज को नियंत्रित किया। कोरोनाकाल में आर्थिक संकट के समय ऐसा लगा था कि मध्य हिमालयी राज्य ऋण के बोझ तले दब जाएगा, लेकिन सरकार ने खर्चों पर काबू रखकर स्थिति संभाली। वर्ष 2016-17 में राज्य पर 44,583 करोड़ रुपये का कर्ज था और इसके बाद कई वर्षों तक कर्ज बढ़ता रहा।
वित्तीय अनुशासन और अनुदान का योगदान
धामी सरकार के आने के बाद 2021-22 से वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दी गई। इस दौरान कर्ज में वृद्धि 11.78 प्रतिशत रही, लेकिन उसके बाद के चार वर्षों में यह 4.5 प्रतिशत से 10.25 प्रतिशत के बीच सीमित रही। कर्ज नियंत्रण में 15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों और राजस्व घाटा अनुदान का बड़ा योगदान रहा। आयोग की सिफारिशों के तहत 2021-22 से 2025-26 तक राज्य को कुल 28,147 करोड़ रुपये का अनुदान मिला, जिससे वेतन और भत्तों का भुगतान सुचारू रूप से हो सका।
एक अप्रैल 2026 से अनुदान हटेगा
आने वाले वित्तीय वर्ष 2026-27 से 16वें वित्त आयोग ने राजस्व घाटा अनुदान देने का प्रावधान नहीं किया है। इसके चलते सरकार को कर्ज नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी होगी। उत्तराखंड के वित्तीय संसाधन सीमित हैं और केंद्र से मिलने वाली सहायता पर ही विकास परियोजनाओं और कल्याण योजनाओं का दारोमदार है।
पिछले छह वर्षों का कर्ज रुझान
पिछले छह वर्षों में राज्य पर कर्ज और इसकी वृद्धि इस प्रकार रही:
- 2025-26: कुल कर्ज 99,632 करोड़, वृद्धि 5.25%
- 2024-25: कुल कर्ज 94,666 करोड़, वृद्धि 10.19%
- 2023-24: कुल कर्ज 85,914 करोड़, वृद्धि 9.43%
- 2022-23: कुल कर्ज 78,509 करोड़, वृद्धि 1.93%
- 2021-22: कुल कर्ज 77,023 करोड़, वृद्धि 4.44%
राजस्व घाटा अनुदान (15वें वित्त आयोग के तहत)
- 2025-26: 2,099 करोड़
- 2024-25: 4,916 करोड़
- 2023-24: 6,223 करोड़
- 2022-23: 7,137 करोड़
- 2021-22: 7,772 करोड़
राज्य सरकार को अब वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के जरिए कर्ज को नियंत्रित करना होगा, क्योंकि अगले वर्ष से यह अतिरिक्त सहारा उपलब्ध नहीं रहेगा।




