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Asom : मिशन 2024 का चुनावी महासंग्राम शुरू

संजीव कलिता

सन 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए असम में भी चुनावी महासंग्राम शुरू हो चुका है। सत्तापक्ष तथा विपक्ष अपने-अपने उम्मीदवारों के पक्ष में लगातार चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं। असम में तीन चरणों में चुनाव होने हैं। पहले चरण का चुनाव पांच सीटों पर होगा। इस चरण में 19 अप्रैल को काजीरंगा, शोणितपुर, लखीमपुर, डिब्रूगढ़ और जोरहाट लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव होंगे। पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 38 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया लेकिन उनमें से दो को सत्यापन के बाद रद्द कर दिया गया, जिससे पहले चरण में उम्मीदवारों की कुल संख्या 36 हो गई है। पहले चरण के चुनाव के लिए जोरहाट से भाजपा के तपन कुमार गोगोई, कांग्रेस के (जोरहाट), कामाख्या प्रसाद तासा (काजीरंगा), रंजीत कुमार दत्त (शोणितपुर), कांग्रेस के उदय शंकर हजारिका (लखीमपुर) आदि शामिल हैं।

दूसरे चरण में 26 अप्रैल को पांच सीटें दरंग-उदालगुड़ी, डिफू, करीमगंज, सिलचर और नगांव लोकसभा क्षेत्र के लिए चुनाव कराए जाएंगे। दूसरे चरण के लिए 4 अप्रैल तक उम्मीदवार अपने-अपने पर्चे भर सकेंगे। 5 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी तथा 8 अप्रैल तक उम्मीदवार अपना पर्चा वापस ले सकेंगे। दूसरे चरण में चुनाव लड़ने के लिए तैयार दिग्गजों में दरंग-उदालगुड़ी से भाजपा के दिलीप सइकिया और कांग्रेस के माधव राजवंशी, सिलचर से भाजपा के परिमल शुक्ल वैद्य, कांग्रेस उम्मीदवार सूर्यकांत सरकार और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के राधेश्याम विश्वास, करीमगंज से भाजपा सांसद कृपानाथ मल्लाह के खिलाफ कांग्रेस उम्मीदवार हाफिज अहमद चौधरी और एआईयूडीएफ के सहाबुल इस्लाम चौधरी मैदान में हैं। डिफू से कांग्रेस के जयराम इंग्लेंग और भाजपा के अमर्रंसह टिसो तथा नगांव से कांग्रेस के प्रद्युत बरदलै, एआईयूडीएफ के अमीनुल इस्लाम और भाजपा मित्रदल के सुरेश बोरा चुनावी मैदान में हैं। तीसरे चरण का चुनाव 7 मई को चार लोकसभा सीटों के लिए होगा। ये सीटें हैं-कोकराझाड़, धुबड़ी, बरपेटा और गुवाहाटी।

चाय समुदाय के मतदाता तय करेंगे उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला

गौरतलब है कि ऊपरी असम में पहले चरण के चुनाव में चाय मतदाताओं का खास प्रभाव है और चाय बागान के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाएंगे। पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल को होना है। पांच में से चार लोकसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारों का भविष्य चाय समुदाय के मतदाताओं पर निर्भर करता है। इसलिए, सत्तारूढ़ और विपक्षी दल विशेष रूप से चाय समुदाय के मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए उत्सुक हैं। गौरतलब है कि पहले चरण के पांच लोकसभा क्षेत्रों के 48 विधानसभा क्षेत्रों में से 28 विधानसभा क्षेत्रों में चाय समुदाय के मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है। इस कारण चाय समुदाय के मतदाताओं को रिझाने के लिए शासक-विरोधी इन दिनों कमरतोड़ मेहनत कर रहे हैं। सत्ताधारी भाजपा एवं इसके मित्रदल असम गण परिषद, यूपीपीएल, गणशक्ति के नेता-पदाधिकारी ऊपरी असम के चाय समुदाय के मतदाताओं को रिझाने के लिए जहां सरकारी विभिन्न योजनाओं के जरिए मिले लाभ का हवाला दे रहे हैं, वहीं विपक्षी इंडी गठबंधन सरकार की खामियां गिनाकर मोदी विरोधी लहर पैदा करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। सत्तारूढ़ भाजपा ने चाय समुदाय के हर घर में जाना शुरू कर दिया है, जबकि कांग्रेस व अन्य विरोधियों ने चाय बागानों का दौरा करना शुरू कर दिया है।

मालूम हो कि असम में क्षेत्र परिसीमन के बाद पहली बार लोकसभा चुनाव होने जा रहा है। हालांकि, असम में पूर्व की ही तरह लोकसभा सीटों की कुल संख्या 14 ही रह गईं पर क्षेत्रों में कुछ जोड़-घटाव हुए हैं। पूर्व के कलियाबर लोकसभा क्षेत्र को विलुप्त कर दिया गया है। उसकी जगह नवगठित काजीरंगा लोकसभा सीट के तहत दस विधानसभा सीट हैं। इन दस विधानसभा क्षेत्रों में से कलियाबार, गोलाघाट, देरगांव, बोकाखात, खुमटाई और सरूपथार में चाय समुदाय के मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है जो निर्णायक भूमिका निभाएंगे। सरूपथार विधानसभा क्षेत्र में 30 फीसदी, बोकाखात में 27 फीसदी, कलियाबार में 27 फीसदी और खुमटाई में 22 फीसदी मतदाता चाय समुदाय से हैं।

शोणितपुर लोकसभा क्षेत्र में 9 विधानसभा क्षेत्र हैं जिनमें से 6 विधानसभा क्षेत्रों में चाय समुदाय का प्रभुत्व है। इस लोकसभा क्षेत्र के बिहाली और रंगापाड़ा विधानसभा क्षेत्रों में 53 फीसदी मतदता चाय समुदाय से हैं। इसी तरह, उम्मीदवारों का भविष्य ढेकियाजुली, बरसला, बिश्वनाथ और गहपुर विधानसभा क्षेत्रों में रहने वाले चाय समुदाय के मतदाताओं पर निर्भर करेगा। हालांकि, लखीमपुर लोकसभा क्षेत्र में चाय मतदाताओं की संख्या अन्य निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में थोड़ी कम है। लखीमपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत 9 विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिनमें से केवल दो विधानसभा क्षेत्रों में ही चाय मतदाताओं का वर्चस्व है। ये दो निर्वाचन क्षेत्र हैं डुमडुमा और सदिया। डुमडुमा विधानसभा क्षेत्र में 61 फीसदी जबकि सदिया में 17 फीसदी चाय समुदाय के मतदाता हैं।

उधर, डिब्रूगढ़ लोकसभा क्षेत्र में 10 विधानसभा क्षेत्र हैं जिनमें से 9 क्षेत्रों में ही चाय समुदाय के मतदाताओं का वर्चस्व है। मार्घेरिटा, डिगबोई, माकुम, तिनसुकिया, चाबुआ, लाहोवाल, खोवांग, दुलियाजानर्, ंटगखांग और नाहरकटिया विधानसभा क्षेत्र में चाय समुदाय के मतदाता ही हर चुनाव में निर्णायक भूमिका का पालन करते आए हैं। इन विधानसभा क्षेत्रों में चाय समुदाय के 25-37 फीसदी मतदाता हैं। वहीं, जोरहाट लोकसभा क्षेत्र में भी इस बार क्षेत्र परिसीमन का असर पड़ा है। इस लोकसभा क्षेत्र में क्षेत्र परिसीमन के बाद माजुली विधानसभा क्षेत्र भी शामिल कर दिया गया है। जोरहाट अब दस विधानसभा क्षेत्रों से गठित लोकसभा क्षेत्र हो गया है। इन दस में से सात विधानसभा क्षेत्र में चाय समुदाय के मतदाता इस बार उम्मीदवार के भाग्य का फैसला करेंगे। जोरहाट लोकसभा क्षेत्र के तहत सोनारी, माहमरा, डिमौ, नाजिरा, टियक, मरियनी और तिताबर विधानसभा क्षेत्रों में क्षेत्रवार 15 से 44 फीसदी मतदाता चाय समुदाय से हैं। इसलिए यह उम्मीद की जा सकती है कि असम में पहले चरण में होने वाले पांच लोकसभा क्षेत्रों में चाय समुदाय के मतदाता ही उम्मीदवारों का भविष्य तय करेंगे।

भाजपा-मित्रदल ने कसी कमर

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल भाजपा-असम गण परिषद, यूपीपीएल, गणशक्ति के पार्टी प्रवक्ताओं ने गठबंधन के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने का लक्ष्य बांध लिया है। इस लक्ष्य को हर हालत में हासिल करने के लिए लोकसभा के चुनाव प्रचार के दौरान केंद्र व राज्य सरकार द्वारा लागू की गई विभिन्न महत्वकांक्षी पहल एवं परियोजनाओं सहित जनहित के अन्य मुद्दों को लोगों तक ले जाने का दृढ़ संकल्प लेते हुए चुनाव प्रचार में कूद पड़े हैं।

भाजपा के विकास की तूफान के आगे विरोधियों का टिक पाना होगा मुश्किल : हिमंत

मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने कहा है कि इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा के विकास की तूफान के आगे विरोधियों का टिक पाना मुश्किल होगा। उनके अनुसार कुल 14 में से इस बार 13 सीटों पर कड़ा मुकाबला होगा। पहले 11 सीटों पर ही उम्मीदें बंधी हुईं थी लेकिन, नगांव और करीमगंज में विरोधियों के कमजोर उम्मीदवारी देखकर अब यह तय हो गया है कि 13 सीटों पर ही लड़ाई होगी। भाजपा के स्टार प्रचारक कहते हैं कि कांग्रेस अब शून्य की ओर बढ़ रही है। भाजपा एक नंबर पार्टी बनने की ओर बढ़ रहा है। डॉ. शर्मा के अनुसार लोकसभा चुनाव में विरोधी कहीं भी नहीं है और मोदी के लिए ‘गोल-पोस्ट फ्री’ है।
मुख्यमंत्री हिमंत का कहना है कि इस बार का चुनाव नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के बीच का है। इस चुनावी नाटक में ‘खुद को एक छोटा किरदार निभाने वाला’ बताते हुए ‘मोदी को नाटक का मुख्य अभिनेता’ करार दिया। उन्होंने आत्मविश्वास भरे लहजे में कहा कि असम के 14 में से 13 सीटें भाजपा व इसके मित्रदलों के कब्जे में होगी और लगातार तीसरी बार के लिए नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। सन 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का असम को मिले स्नेह और असम को अष्टलक्ष्मी बनाने की उनकी चाहत में उन्होंने 27 दफे असम तथा पूर्वोत्तर का दौरा किया। लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की इस दिग्विजय यात्रा में इस बार असम की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मुख्यमंत्री ने दावे के साथ कहा कि इस बार के चुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय की मां, बहन और बेरोजगार युवाओं के अलावा ऊपरी असम के असमिया मुसलमान मतदाता दिल खोलकर भाजपा के पक्ष में मतदान करेंगे क्योंकि, असम के अल्पसंख्यकों को भाजपा सरकार ने इतना कुछ दिया है कि देश के किसी भी अन्य राज्य में बसे अल्पसंख्यकों को इतना नहीं मिला है।

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