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देश में गेहूं की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर, सरकार ने घटाने के लिए बनाया ये बड़ा प्लान

नई दिल्ली: देश में हाल के दिनों में गेहूं के दाम में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी जा रही है. इसके पीछे वजह है कि पिछले साल गेहूं के उत्पादन में गिरावट आई थी. इसका असर मौजूदा समय में देखा जा रहा है. ज्यादा खपत के कारण गेहूं का स्टॉक कम हो गया है. वहीं, नई फसल भी अभी नहीं आई है. इन वजहों से कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है. वहीं, मोदी सरकार की भी गेहूं की बढ़ती कीमतों पर नजर है.

केंद्र सरकार गेहूं की कीमतों को घटाने के लिए काम कर रही है. मोदी सरकार ने ओपन मार्केट में स्टॉक के गेहूं की बिक्री का प्लान बनाया है. योजना के तहत, मोदी सरकार करीब 30 लाख टन गेहूं के स्टॉक की खुले बाजार में बिक्री करेगी. इस प्लान के मुताबिक, केंद्र सरकार ट्रेड को-ऑपरेटिव सोसायटी और राज्य की सरकारों के जरिए इस गेहूं की खुले बाजार में बिक्री करेगी.

अभी नई फसल आने में भी कुछ समय लगेगा. ऐसे में सरकार स्टॉक का इस्तेमाल करके बाजार में गेहूं की सप्लाई में बढ़ोतरी करेगी, जिससे कीमतों को नियंत्रण में लाया जा सके. वहीं, मोदी सरकार ने इस बात को भी साफ किया है कि नई फसल के आने तक उसकी गेहूं के एक्सपोर्ट पर लगे बैन को हटाने की भी कोई योजना नहीं है.

देश में मौजूदा समय में गेहूं की कीमतें MSP से 50 फीसदी ज्यादा हैं. आपको बता दें कि गेहूं के लिए 2023 का एमएसपी 2125 रुपये तय किया गया है. वहीं, गेहूं का दाम 3100 रुपये को पार कर गया है. वहीं बीते साल गर्मी ज्यादा रहने से गेहूं का उत्पादन उम्मीद से कम रहा था. अब स्टॉक घटने से कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.

वहीं, देश का गेहूं उत्पादन 2022-23 फसल वर्ष (जुलाई-जून) में 11.2 करोड़ टन से अधिक रहने का अनुमान है, जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा. वहीं, कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, फसल वर्ष 2021-22 में प्रमुख उत्पादक राज्यों में लू के कारण गेहूं का उत्पादन घटकर 106.84 मिलियन टन रह गया था. 2020-21 में देश ने रिकॉर्ड 109.59 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन हासिल किया था.

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