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मोदी सरकार के वकील नहीं पहुंचे अदालत, ममता सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान भड़का सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दायर एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान केन्द्र की ओर से विधि अधिकारी या वकील के उपस्थित न होने पर चिंता जताते हुए कहा कि न्यायालय के प्रति कुछ शिष्टाचार दिखाएं। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इस बात पर नाखुशी व्यक्त की कि मामले की सुनवाई के समय न्यायालय में कोई विधि अधिकारी उपस्थित नहीं था। एक वकील ने पीठ को बताया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जिन्हें इस मामले में न्यायालय में उपस्थित होना था, प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एक अन्य मामले पर दलील दे रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
न्यायमूर्ति गवई ने कहा, ‘‘यहां किसी को होना चाहिए। यह न्यायालय के प्रति कोई शिष्टाचार नहीं दिखाना है। यहां बहुत सारे विधि अधिकारी हैं।” न्यायाधीश ने कहा, ‘‘न्यायालय के प्रति कुछ शिष्टाचार दिखाएं। यह राज्य और संघ के बीच का विवाद है।” उन्होंने कहा कि केन्द्र के पैनल में कई वरिष्ठ वकील भी हैं। इसके बाद पीठ ने वकील के अनुरोध पर मामले को आगे बढ़ा दिया।

बाद में, जब सॉलिसिटर जनरल किसी अन्य मामले में न्यायालय में उपस्थित हुए, तो न्यायमूर्ति गवई ने उनसे कहा, ‘‘सॉलिसिटर महाशय, पश्चिम बंगाल के मामले में कोई भी उपस्थित नहीं था। यह बहुत दुखद तस्वीर पेश करता है कि केंद्र महत्वपूर्ण मामलों में रुचि नहीं रखता है। आपके पैनल में बहुत सारे विधि अधिकारी, बहुत सारे वरिष्ठ वकील हैं और एक भी वकील उपस्थित नहीं था।” सॉलिसिटर जनरल के अनुरोध पर, पीठ ने मामले को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया।

न्यायमूर्ति गवई क्या बोले
न्यायमूर्ति गवई ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, ‘‘श्री तुषार मेहता हर न्यायालय में नहीं हो सकते। 17 न्यायालय हैं।” पश्चिम बंगाल सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत केंद्र के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एक मूल मुकदमा दायर किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सीबीआई प्राथमिकी दर्ज कर रही है और अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है, जबकि राज्य ने अपने क्षेत्रीय अधिकार के भीतर मामलों की जांच करने के लिए संघीय एजेंसी को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली है।

क्या है मामला?
अनुच्छेद 131 केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच विवाद में सर्वोच्च न्यायालय के मूल अधिकार क्षेत्र से संबंधित है। पिछले साल जुलाई में, शीर्ष अदालत ने मुकदमे की विचारणीयता पर केंद्र की आपत्ति को खारिज कर दिया था और मामले को मुद्दों को तय करने के लिए सूचीबद्ध किया था। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से मामले में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया था कि एक बार जब राज्य ने 16 नवंबर, 2018 को अपनी सहमति वापस ले ली थी, तो केंद्र सीबीआई को जांच के लिए अपने क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दे सकता था।

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