
फाइलेरिया अभियान में सभी विभागों की भूमिका बनी अहम
ग्रामीणों ने दिखाया उत्साह, अभियान के पहले दिन सीएचओ-पीएसपी सदस्यों ने दिखाई सक्रियता
बाराबंकी : राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत इस बार एमडीए (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) अभियान पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और प्रासंगिक साबित हुआ। जनपद के नौ ब्लाकों में चलाये जा रहे इस अभियान में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों द्वारा गठित सीएचओ-पीएसपी (रोगी हितधारक समूह) सदस्यों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्य कर्मियों और आमजन ने एकजुट होकर अभियान की शुरुआत की और दवा का सेवन कर जागरूकता का संदेश दिया।
सीएचओ-पीएसपी समूहों की विशेष भूमिका
फाइलेरिया के प्रसार को रोकने और मरीजों को बेहतर देखभाल उपलब्ध कराने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में सीएचओ-पीएसपी समूहों का गठन किया गया है। इन समूहों में फाइलेरिया रोगियों के साथ स्वास्थ्य कार्यकर्ता, कोटेदार, ग्राम प्रधान, शिक्षक, स्वयं सहायता समूह और प्रभावशाली स्थानीय लोग शामिल हैं। अभियान के पहले दिन इन समूहों ने ग्रामीणों को जागरूक करने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई।
ग्रामीण स्तर पर जोरदार शुरुआत
जिला मलेरिया अधिकारी सुजाता ठाकुर ने बताया कि फतेहपुर ब्लॉक के बसंतपुर आयुष्मान आरोग्य मंदिर में 110 ग्रामीणों ने एक साथ फाइलेरिया से बचाव की दवा सेवन कर अभियान का शुभारंभ किया। इस आयोजन में पीएसपी सदस्य ग्राम प्रधान और कोटेदार भी उपस्थित रहे। इसी तरह, देवा ब्लॉक के गौरिया गांव में सरकारी राशन दुकान पर ग्राम पंचायत सदस्य बिंदेश्वरी ने फीता काटकर अभियान की शुरुआत की। इस दौरान मौजूद फाइलेरिया मरीजों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए दवा सेवन के महत्व को रेखांकित किया। मौके पर 55 लोगों ने एक साथ दवा सेवन किया।
देवा ब्लॉक के टीपहार आयुष्मान आरोग्य मंदिर में अभियान की शुरुआत ग्राम प्रधान विजय कुमार ने की। उन्होंने कहा, ‘हम सब मिलकर इस अभियान को सफल बनाएंगे और फाइलेरिया मुक्त समाज की दिशा में आगे बढ़ेंगे।’ जबकि फतेहपुर ब्लॉक के टीकापुर क्षेत्र के ग्राम लोधन पुरवा में कोटेदार बृजेश सिंह के यहां ग्राम प्रधान फूलचंद ने दवा सेवन कर अभियान को गति दी। इस दौरान, देवा ब्लॉक के बरौठी आयुष्मान आरोग्य मंदिर का निरीक्षण अयोध्या मंडल के संयुक्त निदेशक डॉ. वेद प्रकाश ने किया। उन्होंने अभियान की प्रगति की समीक्षा की और आवश्यक सुझाव दिए, जिससे कार्यक्रम को और प्रभावी बनाया जा सके।