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Trump Zelensky Meeting: US-यूक्रेन में तनातनी, रद्द हुआ खनिज सौदा, जेलेंस्की ने समझौते से किया इनकार

नई दिल्ली: अमेरिका और यूक्रेन के बीच संभावित शांति समझौते से पहले, वाशिंगटन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से एक महत्वपूर्ण खनिज समझौते पर हस्ताक्षर करने की मांग की थी। हालांकि, व्हाइट हाउस में जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच तीखी बहस हो गई, जिससे हालात और बिगड़ गए।

बैठक के दौरान ट्रंप ने जेलेंस्की को सख्त चेतावनी दी और कहा कि उनके लिए मुश्किल वक्त की शुरुआत हो चुकी है। इस विवाद के चलते खनिज समझौता भी रद्द कर दिया गया। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक यूक्रेन शांति वार्ता के लिए तैयार नहीं होता, तब तक आगे कोई सहयोग नहीं मिलेगा। इसके बाद जेलेंस्की बिना समझौते पर हस्ताक्षर किए ही अमेरिका से लौट गए, जबकि ट्रंप ने इसे यूक्रेन के लिए समर्थन की अहम शर्त बताया था।

ज़ेलेंस्की का रवैया अपमानजनक
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की शुक्रवार दोपहर व्हाइट हाउस से उस समय रवाना हुए जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत को अचानक रोक दिया। ओवल ऑफिस में ज़ेलेंस्की और ट्रंप के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें ज़ेलेंस्की ने सुरक्षा गारंटी की मांग की थी। ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ज़ेलेंस्की के इस रवैये को अपमानजनक बताया।

आखिर क्या है इस खनिज में
दुर्लभ खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) आज की आधुनिक तकनीक और रक्षा क्षेत्र के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इनका उपयोग स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित उपकरण, हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत हथियारों के निर्माण में किया जाता है। ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिलने से इन खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, 2022 में इनका वैश्विक बाजार 320 अरब पाउंड तक पहुंच गया था। यदि जलवायु परिवर्तन से संबंधित नीतियों को पूरी तरह लागू किया जाता है, तो 2030 तक इनकी मांग दोगुनी और 2040 तक तीन गुना बढ़ सकती है।

रूस पहले ही कर चुका है कब्जा
अमेरिका के लिए ये खनिज आर्थिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण हैं, और इसी कारण ट्रंप की इस पर खास नजर है। दुनिया में इन खनिजों का सबसे बड़ा उत्पादक चीन है, लेकिन ट्रंप अमेरिका की इस निर्भरता को कम करना चाहते हैं। इसी वजह से वे यूक्रेन जैसे खनिज संपन्न देशों के साथ समझौते को प्राथमिकता दे रहे थे। हालांकि, रूस पहले ही यूक्रेन के कई खनिज-समृद्ध इलाकों पर कब्जा कर चुका है।

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