ट्रंप का नाटो पर तीखा हमला, बोले- ईरान के खिलाफ अमेरिका को किसी सहयोगी की जरूरत नहीं

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश नाटो सहयोगी देश अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को उनकी मदद की कोई आवश्यकता नहीं है और उन्होंने गठबंधन को “एकतरफा” करार देते हुए इसे “मूर्खतापूर्ण गलती” बताया।
होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर जोर
ट्रंप ने वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने के महत्व पर विशेष बल दिया। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार के लिए अहम है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान की सेना पर “पूर्ण सैन्य सफलता” हासिल कर ली है, जिसमें नौसेना, वायुसेना और राडार सिस्टम शामिल हैं।
नाटो से निराशा, सहयोगियों की निष्क्रियता पर टिप्पणी
ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “मैं हमेशा से नाटो को एकतरफा मानता आया हूं – हम उनके लिए अरबों डॉलर खर्च करते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे हमारे लिए कुछ नहीं करते।” उन्होंने जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया का भी उदाहरण देते हुए कहा कि कई मामलों में अमेरिका अकेले ही काम करता है।
पूर्व राष्ट्रपति का कथित समर्थन
ट्रंप ने दावा किया कि एक पूर्व राष्ट्रपति ने निजी तौर पर कहा, ‘काश मैंने भी वही किया होता जो आपने किया।’ यह टिप्पणी ईरान पर हमले और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाने के संदर्भ में की गई। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह कौन हैं, केवल इतना कहा कि वह एक डेमोक्रेट पूर्व राष्ट्रपति के बारे में बात कर रहे हैं।
ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष और वैश्विक प्रभाव
फरवरी 2026 से तेज हुए ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष में इजरायल ने ईरानी वरिष्ठ नेताओं पर हमले किए हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आया है, जबकि नाटो सहयोगी इसे “हमारा युद्ध नहीं” कहकर दूर रहते दिख रहे हैं। ट्रंप के बयान से गठबंधन में तनाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।



