अमेरिका-चीन के मध्य सागरीय शक्ति प्रदर्शन की होड़

विवेक ओझा

चीन ने 1 जुलाई से अगले पांच दिनों के लिए पारासेल द्वीप पर मिलिट्री ड्रिल करना शुरू किया है। इस द्वीप पर वियतनाम का भी स्वामित्व दावा है जिसे चीन सिरे से खारिज करता है। वियतनाम के विदेश मंत्रालय के अनुसार, कुछ दिन पूर्व ही चीन के तटरक्षक बल के एक पोत द्वारा दक्षिण चीन सागर के पारासेल द्वीप समूह में वियतनाम की मछली पकड़ने वाली नौकाओं को डुबाने का प्रयास किया गया।

4 जुलाई को अमेरिका में राष्ट्रीय अवकाश था। एक तरफ अमेरिका ने उस दिन अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस मनाया वहीं दूसरी तरफ अपने स्वतंत्र और मुक्त हिन्द प्रशांत नीति को मजबूती देते हुए अमेरिका ने चीन के खिलाफ दक्षिण चीन सागर में अपने दो एयरक्राफ्ट कैरियर भेजे हैं ।

अमेरिका ने यह काम ऐसे समय किया है जब दक्षिण चीन सागर में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी अपना अभ्यास/ ड्रिल कर रही थी। अमेरिका ने अपना गंभीर रोष प्रदर्शन करते हुए इस क्षेत्र में यूएसएस निमिट्ज और यूएसएस रोनाल्ड रीगन को अभियान और अभ्यास के लिए भेज दिया। इसके बाद दोनों देशों ने एक दूसरे के ऊपर सामरिक जलमार्गों में व्यवधान डालने का भी आरोप प्रत्यारोप लगाया है।

गौरतलब है कि चीन ने 1 जुलाई से अगले पांच दिनों के लिए पारासेल द्वीप पर मिलिट्री ड्रिल करना शुरू किया है। इस द्वीप पर वियतनाम का भी स्वामित्व दावा है जिसे चीन सिरे से खारिज करता है। वियतनाम के विदेश मंत्रालय के अनुसार, कुछ दिन पूर्व ही चीन के तटरक्षक बल के एक पोत द्वारा दक्षिण चीन सागर के पारासेल द्वीप समूह में वियतनाम की मछली पकड़ने वाली नौकाओं को डुबाने का प्रयास किया गया। निश्चित रूप से चीन की यह हरकत वियतनाम की संप्रभुता का उल्लंघन कर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली है।

स्वतंत्र और मुक्त इंडो पैसिफिक नीति के पैरोकार

इस विषय पर अमेरिका का कहना है कि दक्षिण चीन सागर में फ्री नेविगेशन को चीन प्रभावित नहीं कर सकता है। लेकिन इसके बावजूद चीन स्पार्टले द्वीप के आसपास के इलाकों को लेकर काफी आक्रामक रुख अपनाए हुए है। इसके साथ ही एशिया के सबसे संपन्न-समृद्ध लोकतंत्र जापान और सबसे बड़े लोकतंत्र भारत उस ‘मुक्त एवं खुली हिंद-प्रशांत रणनीति’ के अहम हिस्से हैं जिसे अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन मजबूती से आगे बढ़ा रहा है। ट्रंप की हिंद-प्रशांत नीति उनके पूर्ववर्ती ओबामा की एशिया केंद्रित नीति का ही नया रूप है।

ओबामा ने 2011 में इसे पेश किया था जिसे बाद में ‘एशियाई पुनर्संतुलन’ का नाम दिया गया। अमेरिका को लगा कि उसने पश्चिम एशिया पर जरूरत से ज्यादा ध्यान दिया और अब इस नीति को सुधारने की दरकार है। अब अमेरिका अपने दीर्घकालिक हितों के लिए एशिया की अहमियत पर फिर से ध्यान केंद्रित कर रहा है।

वास्तव में शिंजो एबे ही इस रणनीति के असल शिल्पकार हैं जिसकी अवधारणा उन्होंने औपचारिक रूप से दो साल पहले नैरोबी में अफ्रीकी नेताओं को संबोधित करते हुए सामने रखी थी। आज हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विधिसम्मत, मुक्त व्यापार, आवाजाही की आजादी और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए उपयुक्त ढांचा बनाने के लिहाज से जापान और भारत उसकी अहम धुरी हैं।

दक्षिण चीन सागर प्रशांत महासागर के पश्चिमी किनारे से सटा हुआ और एशिया के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। यह चीन के दक्षिण में स्थित एक सीमांत सागर है जो सिंगापुर से लेकर ताइवान की खाड़ी तक लगभग 3.5 मिलियन वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत है और इसमें स्पार्टले और पारासेल जैसे द्वीप समूह शामिल हैं।

इसके आस-पास इंडोनेशिया का करिमाता, मलक्का, फारमोसा जलडमरूमध्य और मलय व सुमात्रा प्रायद्वीप आते हैं। दक्षिण चीन सागर का दक्षिणी भाग चीन की मुख्य भूमि को स्पर्श करता है, तो वहीं इसके दक्षिण–पूर्वी हिस्से पर ताइवान की दावेदारी है। दक्षिण चीन सागर का पूर्वी तट वियतनाम और कंबोडिया को स्पर्श करते हैं। पश्चिम में फिलीपींस है, तो दक्षिण चीन सागर के उत्तरी इलाके में इंडोनेशिया के बंका व बैंतुंग द्वीप हैं।

(लेखक अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ हैं)