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US: संघीय जज ने ट्रांसजेंडर्स के सेना में शामिल होने पर लगी रोक हटाई, ट्रंप प्रशासन का फैसला पलटा

वॉशिंगटन : अमेरिका के एक संघीय जज ने ट्रंप प्रशासन को झटका देते हुए सरकार के उस कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत ट्रांसजेंडर्स के सैन्य सेवाओं में शामिल होने पर रोक लगा दी गई थी। वॉशिंगटन डीसी की संघीय जज एना रेज ने अपने आदेश में कहा कि ट्रांसजेंडर्स को सेना में शामिल होने से रोकना, उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

दरअसल सेना में सेवा दे रहे छह ट्रांसजेंडर्स और सेना में शामिल होने के इच्छुक दो ट्रांसजेंडर्स ने अदालत में याचिका दायर की थी, जिस पर संघीय जज ने यह प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी की है। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के तुरंत बाद 27 जनवरी को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत ट्रांसजेंडर्स लोगों के सेना में भर्ती होने पर रोक लगा दी गई थी। इस आदेश के जवाब में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जेंडर डिस्फोरिया वाले लोगों को सैन्य सेवाओं के लिए अयोग्य घोषित करने की नीति जारी की।

जेंडर डिस्फोरिया वह अवस्था है, जिसमें किसी व्यक्ति का निर्धारित लिंग और उसकी लिंग पहचान मेल नहीं खाते। चिकित्सा स्थिति में इसे अवसाद और आत्महत्या के विचारों से जोड़ा जाता है। अदालत में जब इस आदेश को चुनौती दी गई तो दावा किया गया कि यह अमेरिकी संविधान के पांचवें संशोधन के तहत ट्रांसजेंडर्स को मिले अधिकारों का उल्लंघन है। अमेरिकी सेना में हजारों की संख्या में ट्रांसजेंडर्स सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन ये कुल सैनिकों की संख्या का एक प्रतिशत से भी कम है।

नाबालिगों के लिए लिंग-पुष्टि देखभाल पर ओहायो के प्रतिबंध को असंवैधानिक बताते हुए अपीलीय अदालत ने इस पर रोक लगा दी। तीन न्यायाधीशों के पैनल ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया। इस प्रतिबंध के तहत ट्रांस महिलाओं और लड़कियों को महिला खेलों में भाग लेने पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि राज्य के अटॉर्नी जनरल ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है।

एक संघीय न्यायाधीश ने मंगलवार को ट्रंप प्रशासन द्वारा तीन जलवायु समूहों को 14 अरब डॉलर का अनुदान रोकने के फैसले पर रोक लगा दी। बाइडन प्रशासन ने इन जलवायु समूहों को अनुदान जारी किया था। ट्रंप ने इस अनुदान में धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे, लेकिन अब अदालत ने कहा है कि धोखाधड़ी के दावे अपुष्ट हैं।

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