अन्तर्राष्ट्रीय

इस्लामाबाद में होने जा रही अमेरिका-ईरान वार्ता, दुनिया की टिकी नजर, इजरायल के हमलों से बढ़ा तनाव

नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित उच्च-स्तरीय वार्ता की मेजबानी पाकिस्तान (Pakistan) करने जा रहा है, लेकिन इस अहम कूटनीतिक पहल से पहले माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जबकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने बातचीत की सफलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ईरान की ओर से चेतावनी दी गई है कि लेबनान पर हुए इजरायली हमले शांति प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। ईरान का कहना है कि मौजूदा हालात में बातचीत का औचित्य कमजोर पड़ सकता है, क्योंकि हालिया सैन्य कार्रवाई ने भरोसे के माहौल को नुकसान पहुंचाया है।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने लेबनान में हुए हमलों को सशर्त युद्धविराम का उल्लंघन बताते हुए कहा कि ऐसे कदम शांति प्रयासों को बेकार कर देते हैं। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही हिंसा के बीच बातचीत का कोई ठोस अर्थ नहीं रह जाता, और ईरान अपने सहयोगियों का साथ नहीं छोड़ेगा।

पाकिस्तान में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने हालात की समीक्षा की और शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। सरकार ने सभी विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं और उन्हें ‘विशेष मेहमान’ का दर्जा दिया गया है।

पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघादम ने कहा कि बार-बार हो रहे युद्धविराम उल्लंघनों के कारण शांति वार्ता को लेकर संदेह बना हुआ है। हालांकि, उन्होंने यह भी पुष्टि की कि तेहरान का प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच रहा है और प्रस्तावित 10 सूत्री योजना पर चर्चा करेगा।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी वार्ता में शामिल हो सकता है। उनके साथ स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के नाम भी चर्चा में हैं, हालांकि आधिकारिक समय की पुष्टि नहीं हुई है।

वार्ता में दीर्घकालिक शांति ढांचे, प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान के परमाणु व मिसाइल कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्ता का नतीजा पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। इसी कारण पूरी दुनिया की नजर इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक पर टिकी हुई है।

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