US-इजराइल एयरस्ट्राइक: ईरान के सैटेलाइट और मिसाइल ठिकानों पर बड़ा हमला, रक्षा मंत्रालय व IRGC भी निशाने पर

न्यूयॉर्क से आई रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के सैटेलाइट और मिसाइल कार्यक्रम को बड़ा झटका देने के लिए कई अहम ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों का उद्देश्य उन तकनीकों और सुविधाओं को नष्ट करना बताया जा रहा है, जिनका इस्तेमाल भविष्य में उन्नत हथियार प्रणालियों के विकास में किया जा सकता है।
सैटेलाइट सेंटर और सैन्य ठिकानों पर सीधा हमला
रिपोर्ट के अनुसार, एयरस्ट्राइक में ईरान के मुख्य सैटेलाइट डेवलपमेंट सेंटर, रक्षा मंत्रालय की सुविधाएं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों को निशाना बनाया गया। ये संस्थाएं सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल और बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक पर काम करती हैं, जिससे इन हमलों का असर दोनों कार्यक्रमों पर पड़ने की आशंका है।
‘खय्याम’ सैटेलाइट के कंट्रोल सेंटर पर भी वार
इजराइली डिफेंस फोर्सेस ने 8 मार्च को दावा किया था कि उसने ईरान के ‘खय्याम’ सैटेलाइट के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाया। यह सैटेलाइट वर्ष 2022 में रूस की स्पेस एजेंसी की मदद से लॉन्च किया गया था। इसके अलावा 16 मार्च को तेहरान में एक ऐसे परिसर को भी नष्ट करने का दावा किया गया, जहां एंटी-सैटेलाइट हथियार और सैन्य अंतरिक्ष कार्यक्रम पर काम हो रहा था।
मिसाइल क्षमता पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के मुताबिक सैटेलाइट और मिसाइल तकनीक में काफी समानता होती है। ऐसे में इन ठिकानों के नष्ट होने से ईरान की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। पहले भी अमेरिकी रणनीतिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि ईरान का अंतरिक्ष कार्यक्रम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करने में सहायक हो सकता है।
रूस और चीन पर बढ़ सकती निर्भरता
विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों के बाद ईरान की स्वदेशी सैटेलाइट निर्माण और लॉन्च क्षमता कमजोर हो सकती है। ऐसे में उसे रूस और चीन जैसे देशों पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है, जो पहले से ही तकनीकी और सैन्य सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
रणनीतिक लक्ष्य क्या है
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और इजराइल का मुख्य उद्देश्य ईरान को अंतरिक्ष आधारित सैन्य क्षमता हासिल करने से रोकना, उसकी मिसाइल ताकत को कमजोर करना और भविष्य में संभावित खतरों को सीमित करना है।



