उत्तराखंड

उत्तराखंड ने तैयार किया ‘रक्षा कवच’, जंगल की आग पर होगा तुरंत और प्रभावी एक्शन

देहरादून। उत्तराखंड में जंगल की आग की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए वन विभाग ने अपनी तैयारियों को और सुदृढ़ कर दिया है। प्रमुख वन संरक्षक (हाफ) आरके मिश्र ने कहा कि फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआइ) से मिलने वाले फायर अलर्ट पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही फील्ड स्तर पर निगरानी, संसाधनों की उपलब्धता और स्थानीय लोगों की भागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है।

वन विभाग में समीक्षा बैठक
गुरुवार को वन मुख्यालय स्थित वीडियो कांफ्रेंसिंग कक्ष में जंगल की आग प्रबंधन की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (हाफ) ने की। इसमें गढ़वाल, शिवालिक, देहरादून, चकराता और मसूरी के प्रभागीय वनाधिकारी उपस्थित रहे, जबकि कुमाऊं मंडल सहित राज्यभर के वन अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

जंगल की सुरक्षा का ‘कवच’
मुख्य वन संरक्षक सुशांत कुमार पटनायक ने बताया कि बैठक में कंट्रोल बर्निंग, फायर लाइन मेंटेनेंस, चीड़-पिरूल संग्रहण, पिरूल आधारित ब्रिकेट्स यूनिटों की स्थापना, वनाग्नि प्रबंधन संसाधनों की उपलब्धता, ग्राम पंचायत स्तर पर अग्नि सुरक्षा समितियों और जन-जागरूकता कार्यक्रमों की प्रगति पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यालय स्तर पर एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के साथ 1926 इंटीग्रेटेड हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय है।

चीड़-पिरूल संग्रहण और ब्रिकेट्स यूनिटें
चीड़-पिरूल संग्रहण के लिए 48 कलेक्शन सेंटर स्थापित किए गए हैं और अगले दो वर्षों में 58 नए सेंटर शुरू करने का लक्ष्य है। वर्तमान में नौ ब्रिकेट्स यूनिट कार्यरत हैं, जबकि अगले दो वर्षों में 20 नई यूनिट स्थापित की जाएंगी। वन प्रभाग फरवरी, 2026 के प्रथम सप्ताह में ‘ओण दिवस’ के आयोजन की तैयारी में हैं। विश्व बैंक परियोजना के तहत अति संवेदनशील प्रभागों को पहले चरण में 500 पर्सनल प्रोटेक्टिव गियर (PPE) किट्स उपलब्ध कराई गई हैं।

फील्ड लेवल पर निर्देश
वन विभागाध्यक्ष (हाफ) ने निर्देश दिए कि सभी जिलों के फायर प्लान तुरंत अनुमोदित कराकर प्रेषित किए जाएं। फील्ड स्तर पर कंट्रोल बर्निंग और फायर लाइन मेंटेनेंस को प्राथमिकता दी जाएगी।

स्थानीय समुदायों को जोड़ना होगा
जंगल की आग के दौरान ग्राम पंचायत और स्थानीय समुदायों को जोड़कर जन-जागरूकता बढ़ाने के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पिरूल के फारवर्ड लिंकज के लिए उद्योग विभाग से समन्वय और सभी क्रू स्टेशनों पर आवश्यक उपकरण और मानव संसाधन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

सात प्रमुख सुरक्षा प्रबंधन की रूपरेखा

  • एफएसआइ फायर अलर्ट पर तत्काल रिस्पांस और फीडबैक अनिवार्य
  • 1438 क्रू स्टेशन, 40 कंट्रोल रूम, 174 वॉच टावर से निगरानी मजबूत
  • 1926 हेल्पलाइन के साथ एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर सक्रिय
  • चीड़-पिरूल संग्रहण: 48 सेंटर चालू, 58 नए सेंटर का लक्ष्य
  • पिरूल आधारित यूनिट: 9 यूनिट कार्यरत, 20 नई यूनिट प्रस्तावित
  • 500 PPE किट्स अति संवेदनशील प्रभागों को उपलब्ध
  • ग्राम पंचायत और स्थानीय समुदायों को सक्रिय रूप से जोड़ना

उत्तराखंड वन विभाग की यह तैयारियाँ राज्य में जंगल की आग पर त्वरित और प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करेंगी और वन सुरक्षा को नई दिशा देंगी।

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