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वेदांता को लगा ₹1,255 करोड़ का तगड़ा झटका! ओडिशा सरकार ने भेजा नोटिस

नई दिल्ली : भारत की दिग्गज माइनिंग कंपनी वेदांता को बड़ा झटका लगा है. दरअसल, ओडिशा सरकार ने वेदांता की सहायक कंपनी ‘ईएसएल स्टील लिमिटेड’ से 1,255 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि की मांग की है. यह पूरा मामला खनन उत्पादन में कथित कमी और सरकारी नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है, जिसने बाजार में हलचल मचा दी है.

यह पूरा विवाद ओडिशा के क्योंझर जिले के कोइरा सर्किल से शुरू हुआ है. डिप्टी डायरेक्टर ऑफ माइंस कार्यालय ने ईएसएल स्टील को दो अलग-अलग डिमांड नोटिस भेजे हैं. इन नोटिसों में कुल मिलाकर ₹12,55,37,61,591 (लगभग 1,255 करोड़ रुपये) जमा करने को कहा गया है.

सरकार का आरोप है कि कंपनी ने अपने खनन पट्टों (Mining Leases) में उतना काम नहीं किया, जितना समझौते के मुताबिक करना चाहिए था. यह मामला मिनरल्स कंसेशन रूल्स, 2016 के नियम 12(A) के तहत आता है. आसान भाषा में समझें तो, जब सरकार किसी कंपनी को खदान आवंटित करती है, तो एक शर्त होती है कि कंपनी को हर साल कम से कम एक निश्चित मात्रा में खनिज निकालना और भेजना (Dispatch) होगा. सरकार का कहना है कि ईएसएल स्टील इस लक्ष्य को पूरा करने में विफल रही है.

यह विवाद मुख्य रूप से ईएसएल स्टील की दो खदानों BICO और Feegrade माइनिंग लीज से जुड़ा है. कंपनी और सरकार के बीच 15 नवंबर 2021 को ‘माइन डेवलपमेंट एंड प्रोडक्शन एग्रीमेंट’ (MDPA) हुआ था. सरकारी नोटिस के अनुसार, खदानों के संचालन के चौथे वर्ष में उत्पादन और डिस्पैच (परिवहन) के जो लक्ष्य निर्धारित थे, कंपनी उन्हें हासिल नहीं कर पाई.

नियमों के मुताबिक, यदि कोई कंपनी तय मात्रा से कम खनन करती है, तो उसे उस कमी (Shortfall) के बदले सरकार को हर्जाना या निर्धारित शुल्क चुकाना पड़ता है. इसी नियम का हवाला देते हुए ओडिशा सरकार ने यह भारी-भरकम मांग रखी है. इतनी बड़ी रकम की मांग सामने आने के बाद वेदांता समूह की कंपनी ने भी अपना पक्ष मजबूती से रखा है. ईएसएल स्टील ने साफ कर दिया है कि वे सरकार की इस गणना से सहमत नहीं हैं. कंपनी का मानना है कि जिन आधारों पर यह नोटिस भेजा गया है और जिस तरह से रकम की गणना की गई है, वह कानूनी और तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है.

एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कंपनी ने बताया कि वह इस डिमांड नोटिस की गहराई से समीक्षा कर रही है. ईएसएल स्टील चुप नहीं बैठेगी, बल्कि अपने बचाव में सभी जरूरी कानूनी रास्ते अपनाएगी. इसमें कोर्ट से इस मांग पर ‘स्टे’ (रोक) लगवाना और इन नोटिसों को पूरी तरह से रद्द (Quash) कराने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं. कंपनी को भरोसा है कि कानूनी लड़ाई में उनका पक्ष मजबूत साबित होगा. बता दें कि शुक्रवार के कारोबारी सत्र में वेदांता लिमिटेड का शेयर 0.78% की तेजी के साथ ₹681.05 पर बंद हुआ था.

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