
त्रिवेणी के अमृत जल से नहाए विश्वनाथ : काशी में पुनर्जीवित हुई आदि शंकराचार्य की दिव्य परंपरा
सनातन समन्वय का अनुपम दृश्य: संगम की पवित्र धारा से विश्वनाथ धाम तक श्रद्धा और संस्कृति का सेतु
–सुरेश गांधी
वाराणसी : आध्यात्मिक चेतना और सनातन परंपराओं की विश्वविख्यात नगरी काशी में आज श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक समन्वय का अनुपम संगम देखने को मिला, जब पौराणिक तीर्थराज प्रयाग के त्रिवेणी संगम (गंगा–यमुना–सरस्वती) के निर्मल अमृत जल से श्री काशी विश्वनाथ महादेव के अभिषेक की प्राचीन धार्मिक परंपरा का विधिवत निर्वहन किया गया। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास, वाराणसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री विश्व भूषण मिश्रा के संयोजन और मार्गदर्शन में इस दिव्य अनुष्ठान को भव्यता एवं श्रद्धा के साथ संपन्न कराया गया। इस विशेष अवसर पर बाबा विश्वनाथ धाम से पवित्र संगम जल को विशेष वाहन के माध्यम से जल-घड़ों में सुरक्षित कर रुद्रावतार महाबली हनुमान मंदिर प्रेषित किया गया। वहाँ मंदिर के पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार, विधिविधान और भक्तिभाव से भोग-प्रसाद अर्पित कर संगम जल को श्री काशी विश्वनाथ महादेव को समर्पित करने की परंपरा पूरी की गई।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि काशी और प्रयाग के बीच सनातन सांस्कृतिक एकात्मता के दिव्य सूत्र को भी सशक्त करता दिखाई दिया। इस पावन अनुष्ठान में नायब तहसीलदार एवं मजिस्ट्रेट श्री मिनी एल. शेखर, बड़े हनुमान मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महंत पुनीत पुरी महाराज, पुजारी श्री सूरज पांडे, मेला प्राधिकरण के मेला प्रबंधक श्री ऋषि राज मिश्रा सहित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास, वाराणसी शिविर के पदाधिकारी एवं प्रबंधन से जुड़े अधिकारी गरिमामयी उपस्थिति में सम्मिलित हुए।
विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि यह प्राचीन धार्मिक परंपरा जगद्गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित की गई थी, जो कालांतर में कुछ हद तक लुप्तप्राय हो चली थी। किंतु वर्तमान समय में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री विश्व भूषण मिश्रा के नेतृत्व में इस दिव्य परंपरा को नवाचार और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के भाव से पुनर्जीवित किया जा रहा है। यह प्रयास सनातन संस्कृति की निरंतरता और आध्यात्मिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस धार्मिक क्रम को आगे बढ़ाते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा श्री बड़े हनुमान मंदिर तथा श्री कुंभेश्वर महादेव को भोग-प्रसाद एवं उपहार भी प्रेषित किए जाएंगे, जो काशी की धार्मिक परंपराओं और मंदिरों के मध्य आपसी समन्वय, श्रद्धा और सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक बनेगा। काशी की आध्यात्मिक धारा में संपन्न यह अनुष्ठान न केवल भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना, बल्कि सनातन संस्कृति की उस जीवंत परंपरा का भी स्मरण कराता है, जो युगों से भारतीय सभ्यता की आत्मा को आलोकित करती आ रही है।



