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दक्षिण चीन सागर में चाइना प्रभुत्व को क्या रोक पाएगी अमेरिकी चुनौती

विवेक ओझा

चीन ने दक्षिण चीन सागर में बनाए दो प्रशासनिक जिले , माइक पॉम्पियो ने लगाए गंभीर आरोप 

नई दिल्ली : 24 अप्रैल को अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट माइक पॉम्पियो ने चीन के ऊपर आरोप लगाया है कि कोरोना वायरस की महामारी से जबकि पूरी दुनिया जूझ रही है वहीं दक्षिण चीन सागर में चीन अपने क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा को हवा देने की कोशिश कर रहा है। वहीं शुक्रवार को ही अमेरिकी सेना ने कहा है कि एक अमेरिकी युद्धपोत संवेदनशील ताइवान जलडमरूमध्य से होते हुए अपने रूटीन ट्रांजिट के रूप में एक ही महीने में दूसरी बार गुजरा है। आसियान के 10 सदस्य देशों के मंत्रियों के साथ कोरोना वायरस महामारी के विषय पर चर्चा के लिए वीडियो संपर्क साधते हुए पॉम्पियो ने कहा है कि चीन ने दक्षिण चीन सागर के विवादित द्वीपों और सागरीय क्षेत्रों में प्रशासनिक जिलों के गठन की घोषणा की है। पॉम्पियो ने कहा है कि कोविड – 19 की गंभीर स्थिति में फंसे विश्व और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों को चीन एक अवसर के रूप में देख रहा है और उसने दक्षिण चीन सागर में सैन्य जहाजों को तैनात किया है ताकि वह अन्य देशों को इस क्षेत्र में ऑफशोर गैस और ऑयल प्रोजेक्ट्स ना चलाने के लिए भयभीत कर सके । मार्च 2020 में बीजिंग में दक्षिण चीन सागर के दो महत्वपूर्ण दीपू स्पार्टले और पारासेल में द्वीपों और रीफों पर प्रशासन के लिए दो जिलों के गठन की घोषणा की थी ताकि इस क्षेत्र में वो अपने संप्रभुता के दावों को और मजबूती दे सके ।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही चीन पर ऐसा ही आरोप जापान ने पूर्वी चीन सागर के डियायू द्वीप का अतिक्रमण करने के चलते किया था । चीन के 4 कोस्ट गार्ड वेसल ने जापान के नियंत्रण वाले इस द्वीप ( जिसे चीन डियायू और जापान सेनकाकू कहता है ) में जापान के क्षेत्रीय जल में अतिक्रमण किया है। विवाद तब और बढ़ गया जब जापान के विदेश मंत्री तोसीमिट्सू मोटेगी ने चीन के द्वारा जापान के क्षेत्रीय जल में समुद्री जहाज भेजने के लिए अपना विरोध दर्ज किया । इसी प्रकार फिलीपींस ने भी पश्चिमी फिलीपींस सागर में चीन द्वारा अपनी संप्रभुता के उल्लंघन के लिए मनीला स्थित चीनी दूतावास में दो कूटनीतिक विरोध दर्ज किए हैं। 16 अप्रैल , 2020 को चीन और मलेशिया के समुद्री जहाजों में भी झड़प देखी गई । चीन का युद्ध पोत हैयांग डिझी 8 दक्षिण चीन सागर में आया , जिसने दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के साथ चीन के विवाद को बढ़ावा दिया । वॉल स्ट्रीट जनरल के अनुसार इस हफ्ते अमेरिका के 7 फीट से तीन युद्ध पोतों ने ऑस्ट्रेलिया के एक फ्रीगेट के साथ मिलकर दक्षिण चीन सागर के विवादित जल में चक्कर लगाए हैं जिससे चीन को इस बात का अहसास हो सके कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ दक्षिण चीन सागर में नौगमन की स्वतंत्रता और स्वतंत्र और मुक्त प्रशांत क्षेत्र की धारणा को नुकसान नहीं होने देगा ।

क्या है दक्षिण चीन सागर विवाद:

दक्षिण चीन सागर विवाद दुनिया के सबसे बड़े महासागरीय विवाद के रूप में माना जाता है । चीन के दक्षिण में स्थित सागर जो प्रशांत महासागर का भाग है, को ही दक्षिण चीन सागर कहते हैं । चीन से लगे दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों और उनके द्वीपों को लेकर भी चीन और वियतनाम , इंडोनेशिया , मलेशिया, ब्रूनेई दारुसल्लाम, फिलीपींस , ताइवान , स्कार्बोराफ रीफ आदि क्षेत्रों को लेकर विवाद है । लेकिन मूल विवाद की जड़ है दक्षिण चीन सागर में स्थित स्पार्टले और परासेल द्वीप ।

चीन ने दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के अनन्य आर्थिक क्षेत्र में अतिक्रमण कर वहां अपनी संप्रभुता के दावों के लिए नौ स्थानों पर डैश या चिन्ह लगाकर विवाद को बढ़ा दिया है इसलिए इस विवाद को नाइन डैश लाइन विवाद भी कहते हैं । चीन का नाइन डैश लाइन यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑफ द लॉ ऑफ द सी , 1982 के एक्सक्लूसिव इकनॉमिक जोन की मान्यता का खंडन करता है । चीन की निगाह दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के ईईजेड और साउथ चाइना सी के द्वीपों में पाए जाने वाले प्राकृतिक संसाधनों , प्राकृतिक तेल , गैस , मत्य संसाधनों पर है ।

इसलिए हाल में स्पारटले और पारासेल के अलावा चीन और वियतनाम के बीच वैनगार्ड बैंक को लेकर , चीन फिलीपींस के बीच रीड बैंक को लेकर , मलेशिया के साथ लूकोनिया शोल को लेकर , ताइवान के साथ स्कारबोराफ रीफ के स्वामित्व को लेकर विवाद है ।

क्यों चाहता है चीन दक्षिण चीन सागर पर पूर्ण स्वामित्व और नियंत्रण:

चीन को प्राकृतिक तेल की आपूर्ति मध्य पूर्व से होती है , और मलक्का जलडमरुमध्य के रास्ते से होता है । अक्सर अमेरिका चीन को चेतावनी देता है कि वह मलक्का जलडमरुमध्य को ब्लॉक कर देगा जिससे चीन की ऊर्जा आपूर्ति रुक जाएगी । इसलिए चीन दुनिया भर के अन्य देशों में अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सजग और आक्रामक हुआ है । इंडोनेशिया और वियतनाम के बीच पड़ने वाला समंदर का ये हिस्सा, क़रीब 35 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और इस पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताईवान और ब्रुनेई अपना दावा करते रहे हैं। प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण इस समुद्री इलाक़े में जीवों की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती हैं।

सिर्फ़ तेल और गैस ही नहीं, दक्षिणी चीन सागर में मछलियों की हज़ारों नस्लें पाई जाती है। दुनिया भर के मछलियों के कारोबार का क़रीब 55 फ़ीसदी हिस्सा या तो दक्षिणी चीन सागर से गुज़रता है, या वहां पाया जाता है।इसलिए बात अब सिर्फ़ गैस और तेल की नहीं है । चीन और फिलीपींस के बीच स्कारबोरफ शोल नामक मत्स्य संसाधन बहुल क्षेत्र को लेकर दक्षिण चीन सागर में विवाद रहे हैं ।

2012 में चीन ने अपने तट से 500 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक छोटे से द्वीप स्कारबोरफ शोल पर जहाज़ भेजकर क़ब्ज़ा कर लिया। वैसे तो ये विशाल दक्षिण चीन सागर में एक छोटा सा टीला है लेकिन इसे लेकर फिलीपींस से चीन के तनाव लंबे समय तक बने रहे । इस इलाक़े में चीन और फिलीपींस के जंगी जहाज़ एक-दूसरे के मुक़ाबले खड़े रहे हैं ।हालात युद्ध तक के बन गए क्योंकि स्कारबोरफ शोल फिलीपींस के ज़्यादा क़रीब है। इसलिए फ़िलीपींस इस पर अपना हक़ छोड़ने को तैयार नहीं है । स्कारबोरफ शोल की अहमियत इसलिए है, क्योंकि मछली पकड़ने निकलने वाले जहाज़ अगर समुद्री तूफ़ान में फंसते हैं, तो ये टीला उनके लिए डूबते को तिनके के सहारे जैसा काम करता है । फिलीपींस ने चीन को इस मामले पर पीसीएस में घसीट लिया था। इस इंटरनेशनल ट्राईब्यूनल की सुनवाई में चीन शामिल नहीं हुआ था ।

दक्षिणी चीन सागर, प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के बीच स्थित बेहद अहम कारोबारी इलाक़ा भी है। दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का 20 फ़ीसदी हिस्सा यहां से गुज़रता है। 2016 में दक्षिणी चीन सागर से होकर 6 ख़रब डॉलर का समुद्री व्यापार गुज़रा था। इस इलाक़े में अक्सर अमरीकी जंगी जहाज़ गश्त लगाते हैं, ताकि समुद्री व्यापार में बाधा न पहुंचे। मगर, चीन इसे अमरीका का आक्रामक रवैया कहता है।

गौरतलब है कि चीन को दक्षिण चीन सागर में अपने भू आर्थिक और भू सामरिक हित दिखाई देते हैं । दक्षिण चीन सागर में 11 बिलियन बैरेल प्राकृतिक तेल के भंडार है, 190 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस के भंडार है , जिसके 280 ट्रिलियन क्यूबिक फीट होने की संभावना व्यक्त की गई है । यह क्षेत्र ऐसा हैं जहां से हर वर्ष 5 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संभव होता है। यहां स्थित महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों के जरिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में सुगमता होती है । यह क्षेत्र अपार मत्स्य संसाधन वाला क्षेत्र है । इसलिए चीन इस प्रकार के क्षेत्रों में रुचि रखता है । चीन ने दक्षिण चीन सागर के द्वीपों में कई प्रकार के अवैध कार्य किए हैं । अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए चीन ने यहां कृत्रिम द्वीप बनाए हैं , संसाधन अन्वेषण के लिए सर्वे भी किए हैं ।

भारत और दक्षिण चीन सागर :

समुद्र के रास्ते होने वाले भारत के कुल व्यापार का करीब 55 प्रतिशत इसी इलाके से होता है, इसलिए दक्षिण चीन सागर भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यहां पर उपजे तनाव से भारत के समुद्री व्यापार पर असर पड़ सकता है। यदि चीन पूरे क्षेत्र पर अपना कब्जा जमाने में कामयाब हो गया तो भारत के व्यापारिक जहाजों के खुले आवागमन पर असर पड़ेगा। कुछ महीने पहले वियतनाम सरकार ने भारत सरकार की तेल और गैस कंपनी ओएनजीसी के साथ एक समझौता किया। इसके अनुसार ओएनजीसी वियतनाम के छोटे द्वीपों में तेल और गैस की खोज करेगी। चीन ने इस पर कड़ा विरोध जताया था, जबकि भारत ने कहा था कि दक्षिण चीन सागर पूरी दुनिया की संपत्ति है। अमेरिका भी इस मामले में चीन की खुली आलोचना करता है। अमेरिका का कहना है कि कई देशों के पास ऐसे मानचित्र हैं, जिनसे पता चलता है कि पिछले कई सौ सालों से भारत, अरब और मलय के व्यापारी दक्षिण चीन सागर में अपने समुद्री जहाजों को ले जाते थे और इसी समुद्र के माध्यम से व्यापार करते थे।


भारत का दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के साथ घनिष्ठ संबंध है और इसके लिए भारत में पूर्व की ओर देखो की नीति अपनाई थी वर्ष 2015 में भारत में इसे और तार्किक बनाते हुए एक्ट ईस्ट पॉलिसी के साथ संबद्ध किया है । भारत दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के साथ मिलकर महासागरों की सुरक्षा के प्रश्न को गति देना चाहता है और इसीलिए भारत ने वर्ष 2016 में दक्षिण चीन सागर को फिलीपींस सागर कह कर संबोधित किया था।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में जिस वैनगार्ड बैंक को लेकर वियतनाम और चीन के बीच स्वामित्व विवाद बढ़ गया था , वहां से मात्र 100 नॉटिकल मील की दूरी पर ऑयल ब्लॉक नंबर 06/1 हैं जहां पर भारत के ओएनजीसी, रूस के रोस्नेफ्ट और वियतनाम के पेट्रो वियतनाम के नियमित तेल और गैस उत्पादन के साझे उपक्रम 17 वर्षों से कार्यरत हैं। इस क्षेत्र में अन्य भारतीय निजी कंपनियां भी तेल अन्वेषण के अवसरों पर निगाह लगाए हुए हैं। गौरतलब है कि जुलाई, 2019 में चीन का समुद्री सर्वेक्षण पोत वियतनाम के अनन्य आर्थिक क्षेत्र में वैनगार्ड बैंक में अवैध तरीके से प्रवेश कर गया जिससे दोनों देशों के बीच तनाव भी बढ़ गया। वैनगार्ड बैंक स्पार्टले द्वीप पर स्थित है।

(लेखक अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ हैं)

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