जहां कभी डर का था साम्राज्य, वहां आज दौड़ रहे पुलिस और पुनर्वासित माओवादी

नई दिल्ली। चार दशकों तक माओवादी हिंसा और भय के प्रतीक रहे बस्तर क्षेत्र में रविवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा। वही सड़कें, जहां कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी, आज हजारों धावकों की कदमों की गूंज और उत्साहपूर्ण जयकारों से जीवंत थीं।
बस्तर हेरिटेज मैराथन-2026: खेल से सामाजिक बदलाव की झलक
बस्तर हेरिटेज मैराथन-2026 केवल एक खेल आयोजन नहीं था, बल्कि बदलते बस्तर का जीवंत चित्र पेश कर रहा था। करीब 10 हजार धावकों ने भाग लिया, जिनमें पुनर्वासित माओवादी, पुलिस जवान, आदिवासी युवा, महिलाएं और विदेशी खिलाड़ी शामिल थे। यह दृश्य उस सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक मुश्किल थी।
मैराथन की शुरुआत लालबाग मैदान से हुई और यह शहर के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों से होकर लगभग 42 किलोमीटर दूर चित्रकोट जलप्रपात तक पहुंची। रास्ते में धावक दंतेश्वरी मंदिर, बस्तर दशहरा रथ और दलपत सागर जैसे स्थलों से होकर गुजरे। जनजातीय कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य और संगीत प्रस्तुत कर धावकों का उत्साह बढ़ाते रहे। धुरवा, गौर सिंग, मुंडाबाजा और गेड़ी नृत्य ने इस आयोजन को और जीवंत बनाया।
देश-विदेश से प्रतिभागियों की भागीदारी
इस आयोजन में 9,800 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया, जिसमें देशभर के धावक और 100 से अधिक विदेशी खिलाड़ी शामिल थे।
एंबुश से पदक तक: पुनर्वासित माओवादी की कहानी
सबसे सशक्त दृश्य तब सामने आया जब पुनर्वासित माओवादी सुकमन ने कहा, “कल तक मैं इन रास्तों में छिपकर एंबुश लगाता था, आज रनिंग शूज पहनकर पदक जीतने के लिए दौड़ रहा हूं। यह जिंदगी मुझे गर्व देती है।” उनके साथ खड़ी संमति ने भी कहा कि जो जवान कभी हमारी तलाश में दौड़ते थे, आज वही हमें पानी पिला कर हौसला बढ़ा रहे हैं।
42 किलोमीटर फुल मैराथन विजेता
पुरुष वर्ग में इथियोपिया के टेडेजे किनेटो वाशे और महिला वर्ग में मेसेरेट मेंगिस्तु विजेता रही। बस्तर के पुरुष वर्ग में संजय कोर्राम और महिला वर्ग में कुसुम शार्दुल ने तीसरे स्थान पर कब्जा किया।
प्रेरक कहानियां और जूनियर वर्ग के विजेता
एक पैर गंवाने के बावजूद कृषि महाविद्यालय के प्राचार्य पीयूष कुमार ने पांच किलोमीटर की दौड़ पूरी कर सभी को प्रेरित किया। पांच साल से 72 साल तक के प्रतिभागियों ने यह साबित किया कि हौसले की कोई उम्र नहीं होती।
हाफ मैराथन (21 किमी) में पुरुष वर्ग के विजेता मोनू कुमार और महिला वर्ग की विजेता त्सेहे देसाले रही। बस्तर से भावेष कुमार और कुमली पोयाम ने क्रमशः पुरुष व महिला वर्ग में जीत दर्ज की। 10 किलोमीटर ओपन वर्ग में पुरुष विजेता बबलू और महिला विजेता पूनम रहीं। जूनियर वर्ग में सागर और लावण्या विजेता रहे, वहीं सब-जूनियर वर्ग में मोहित धोंडू और अंजलि गुप्ता ने जीत हासिल की।



