उत्तराखंड

राज्यसभा में क्यों उठा ‘लैंसडोन’ का मुद्दा ? जानें इस सुंदर हिल स्टेशन का इतिहास

देहरादून (गौरव ममगाईं)। राज्यसभा में एक बार फिर देश के सबसे सुंदर हिल स्टेशन में शुमार लैंसडोन का मुद्दा उठाया गया है। उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी ने केंद्र सरकार से लैंसडोन को कैंटोमेंट एरिया से मुक्त करने या पर्यटन से जुड़े एरिये में विशेष छूट देने की मांग की है। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से इस मसले को गंभीरता से लेने व आवश्यक कार्यवाही करने का आग्रह किया है। बता दें कि लैंसडोन पिछले 3-4 साल से कई कारणों से सुर्खियों में बना रहता है। लैंसडोन को सैन्य छावनी से हटाने या छूट देने के अलावा भी लैंसडोन का नाम बदलने की मांग भी की जाती रही है।

क्यों खास है लैंसडोनः

नंबर 1– यह हिल स्टेशन देश के सबसे सुंदर हिल स्टेशनों में शामिल है, जहां से हिमालय के दर्शन किये जा सकते हैं।

नंबर 2– यह दिल्ली एनसीआर से सबसे नजदीक हिल स्टेशन है। दिल्ली एनसीआर से यहां की दूरी करीब 270 किलोमीटर है। जो मसूरी व नैनीताल से भी कम है।

नंबर 3—  यहां भुलताल झील भी है, जो बेहद सुंदर है। नैसर्गिक सौंदर्य के बीच झील का नजारा भी बेहद आकर्षक है।

नंबर 4— कुछ दूरी पर प्रसिध्द सिध्दबली सिध्दपीठ, कण्वाश्रम व ताड़केश्वर मंदिर हैं, जिनका विशेष पौराणिक महत्त्व है।

नंबर 5— 

CHURCH

विदेशी पर्यटकों को भी प्राकृतिक सौंदर्य तो आकर्षित करता है ही, लेकिन दूसरी खास बात है कि यहां प्रसिध्द सेंट मैरिज चर्च भी है, जहां विदेशी पर्यटक प्रार्थना भी करते हैं।

नंबर 6– यहां गढ़वाल राइफल रेजीमेंट का मुख्यालय भी है। गढ़वाल रेजीमेंट अपने शौर्य एवं पराक्रम के लिए देश ही नहीं, बल्कि विश्व में भी प्रसिध्द है। गढ़वाल रेजीमेंट के सैनिकों ने प्रथम विश्वयुध्द में भी हिस्सा लिया था।

जानिये लैंसडोन का इतिहासः—

लैंसडोन की स्थापना वर्ष 1887 में हुई। लैंसडोन की स्थापना का श्रेय तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लैंसडाउन को दिया जाता है। इसी कारण इस हिल स्टेशन का नाम लैंसडोन पड़ गया। लैंसडोन का पुराना नाम ‘कालू का डांडा’ था।  

 यहां की स्थापना में बलभद्र सिंह की भी अहम भूमिका मानी जाती है। दरअसल, अफगान युध्द में ब्रिटिश सेना की तरफ से सूबेदार बलभद्र सिंह ने गजब की बहादुरी का परिचय दिया था, इससे वायसराय अत्यधिक प्रभावित हुए थे और उन्होंने गढ़वाली युवाओं की अलग रेजीमेंट बनाने का फैसला लिया। इसका जिम्मा सूबेदार बलभद्र सिंह को दिया था। बलभद्र सिंह ने गढ़वाली युवाओं को प्रेरित करके अलग रेजीमेंट तैयार की, जिसे बाद में गढ़वाल रेजीमेंट का नाम दिया गया।

   इस तरह लैंसडोन हिल स्टेशन न सिर्फ नैसर्गिक सौंदर्य के लिए प्रसिध्द है, बल्कि यहां का पौराणिक एवं सैन्य दृष्टि से भी विशेष महत्व है। यही कारण है कि लैंसडोन देश व दुनिया के सबसे पसंदीदा हिल स्टेशन के रूप में जाना जाता है।  

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