दस्तक-विशेष

क्यों ज़रूरी है नदियों की सफाई और खनन

नदियाँ हमारे जीवन का आधार हैं। ये न केवल जल का मुख्य स्रोत हैं, बल्कि कृषि, उद्योग और जैव विविधता के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। लेकिन समय के साथ बढ़ते प्रदूषण और अवरोधों ने नदियों की स्वाभाविक धारा को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। नदियों की सफाई और खनन को लेकर अक्सर बहस होती है, लेकिन यदि इन्हें वैज्ञानिक और नियंत्रित तरीके से किया जाए, तो ये उपाय पर्यावरण और समाज के लिए अत्यंत लाभकारी हो सकते हैं।

नदियों की सफाई क्यों है ज़रूरी?

  1. प्रदूषण नियंत्रण
    भारत की कई प्रमुख नदियाँ जैसे गंगा, यमुना, और गोदावरी औद्योगिक कचरे, प्लास्टिक, और घरेलू गंदगी से बुरी तरह प्रभावित हो चुकी हैं। इनसे जल स्रोत दूषित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य और जलीय जीवन पर पड़ता है।

उदाहरण: नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा नदी को साफ करने के प्रयासों से कई क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ।

  1. जलधारा का संरक्षण
    कचरा और गाद के जमाव से नदियों का प्रवाह रुकता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ता है। सफाई से इन अवरोधों को दूर किया जा सकता है।

उदाहरण: दिल्ली के पास यमुना नदी के कुछ हिस्सों को सफाई अभियानों से जलधारा को बहाल किया गया।

  1. जलीय जीवन का संरक्षण
    प्रदूषण से नदियों में मछलियाँ और अन्य जलचर जीव प्रभावित होते हैं। सफाई अभियान इनके लिए सुरक्षित आवास प्रदान करते हैं।

खनन क्यों है ज़रूरी?

  1. सिल्ट और गाद हटाना
    नदियों में सिल्ट (गाद) का जमाव बाढ़ का प्रमुख कारण है। खनन से यह सिल्ट हटाई जाती है, जिससे नदियों की गहराई बनी रहती है।

उदाहरण: बिहार की कोसी नदी में सिल्ट हटाने से बाढ़ के प्रभाव को कम करने में मदद मिली।

  1. निर्माण कार्यों के लिए बालू
    बालू और रेत नदियों से प्राप्त होते हैं, जो निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, इसे नियंत्रित तरीके से किया जाना चाहिए।
  2. जल प्रवाह को बनाए रखना
    खनन से नदियों का प्रवाह स्थिर रहता है, जिससे जलजमाव और जल स्तर के असंतुलन को रोका जा सकता है।

उत्तराखंड में विशेष स्थिति

उत्तराखंड गंगा और यमुना जैसी नदियों का उद्गम स्थल है। यहाँ नदियों का महत्व अत्यधिक है, लेकिन इनका प्रबंधन आवश्यक है।

केदारनाथ आपदा (2013):
इस आपदा का एक प्रमुख कारण नदियों में सिल्ट और गाद का जमाव था। अगर पहले से खनन और सफाई होती, तो आपदा के प्रभाव को कम किया जा सकता था।

भारत में सफाई और खनन के उदाहरण

  1. नमामि गंगे परियोजना (2014):
    यह गंगा की सफाई के लिए शुरू की गई एक महत्त्वाकांक्षी योजना है। इसके तहत गंगा के प्रदूषण को कम करने और इसकी स्वच्छता बनाए रखने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए।
  2. साबरमती नदी पुनरुद्धार (गुजरात):
    इस परियोजना के तहत साबरमती नदी को पुनर्जीवित किया गया। सफाई और प्रबंधन ने इस नदी को एक पर्यटक स्थल में बदल दिया।
  3. महानदी प्रबंधन (ओडिशा):
    महानदी में सिल्ट हटाने और जल प्रवाह सुधारने के लिए खनन और सफाई के प्रयास किए गए, जिससे बाढ़ की संभावना कम हुई।

वैश्विक प्रयास

  1. थेम्स नदी, इंग्लैंड:
    कभी विश्व की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक, इसे सफाई अभियानों द्वारा पुनर्जीवित किया गया। आज इसे दुनिया की सबसे स्वच्छ नदियों में गिना जाता है।
  2. मरे-डार्लिंग नदी, ऑस्ट्रेलिया:
    सिल्ट हटाने और जलधारा के प्रबंधन ने इस नदी को पर्यावरणीय और आर्थिक रूप से पुनर्जीवित किया।

चुनौतियाँ और समाधान

नदियों की सफाई और खनन में कई चुनौतियाँ भी हैं, जैसे अवैध खनन और जागरूकता की कमी। अवैध खनन से पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है, जबकि उचित जागरूकता के अभाव में लोग सफाई अभियानों में सहयोग नहीं करते। इन समस्याओं को हल करने के लिए सख्त नियम बनाए जाने चाहिए और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके अलावा, स्कूलों और समाज में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नदियों की सफाई और संरक्षण के महत्व को समझाना चाहिए।

निष्कर्ष

नदियों की सफाई और खनन पर्यावरण और समाज के लिए अत्यधिक आवश्यक हैं। यह न केवल बाढ़, जल संकट और प्रदूषण जैसी समस्याओं को हल करते हैं, बल्कि नदियों की प्राकृतिक सुंदरता और उपयोगिता को भी बनाए रखते हैं। भारत जैसे देश, जहाँ नदियाँ संस्कृति और जीवन का हिस्सा हैं, वहाँ इन प्रयासों को वैज्ञानिक और सतत तरीके से लागू करना अत्यावश्यक है।

स्वच्छ नदियाँ, स्वस्थ समाज की नींव हैं।

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