
मुंबई : महाराष्ट्र में कैबिनेट विस्तार को लेकर स्थिति साफ नहीं सकी है। राज्य में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस को शपथ लिए करीब 25 दिनों का समय बीत चुका है, लेकिन मंत्रियों के नामों पर संशय बरकरार है। हालांकि, इस देरी के कई कारण गिनाए जा रहे हैं। इसे लेकर विपक्षी दल भी सरकार पर हमलावर बने हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी सूत्रों ने बताया है कि शिंदे और फडणवीस दोनों सोमवार को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने वाले थे। दोनों नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। खबरें थी कि राष्ट्रपति चुनाव के बाद राज्य में कैबिनेट विस्तार हो सकता है। इधर, विपक्ष महाराष्ट्र में बारिश से हो रही तबाही में राहत कार्य के प्रभावित होने के आरोप भी सरकार की मौजूदा स्थिति पर लगा रहा है।
फिलहाल, यह देखा जाना बाकी है कि दोनों नेता मंत्रिपरिषद में बड़ी संख्या में नेताओं को कैसे शामिल करेंगे। मंत्रिपरिषद में सीएम समेत अधिकतम 43 मंत्री शामिल हो सकते हैं। एक ओर शिवसेना के बागी खेमे में शिंदे को हटाकर 8 पूर्व मंत्री हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शिंदे गुट के सूत्रों ने बताया है कि पूर्व राज्य मंत्री और निर्दलीय विधायक बच्चू काड़ू को कैबिनेट में जगह का वादा किया गया है। इसके अलावा भी गुट में तानाजी सावंत और दीपक केसरकर जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं।
इधर, भारतीय जनता पार्टी को भी पिछली सरकार में मंत्री रहे और वरिष्ठ विधायकों समेत कई बड़े नेताओं को शामिल करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया गया कि राज्य के कई बड़े नेता कैबिनेट में जगह के लिए दिल्ली में डटे हुए हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटील, सुधीर मुनगंटीवार, आशीष शेलार, संजय कुटे और प्रवीण दारेकर को अहम मंत्रालय मिल सकते हैं।