Why Stock market crash: शेयर बाजार के औंधे मुंह गिरने के 7 मुख्य कारण, निवेशकों के डूबे 14 लाख करोड़, अभी और कितनी होगी गिरावट?

Why Stock market crashed: सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी डरावने सपने जैसी साबित हुई। बाजार खुलते ही जैसे कोहराम मच गया और महज कुछ ही मिनटों के भीतर निवेशकों के लगभग 14 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। सेंसेक्स करीब 2,400 अंकों की भारी गिरावट के साथ 76,424 पर आ गिरा, वहीं निफ्टी भी 700 अंक टूटकर 23,750 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में चारों तरफ सिर्फ लाल निशान नजर आ रहा था और दिग्गज कंपनियों से लेकर सरकारी बैंकों के शेयर ताश के पत्तों की तरह ढह गए।
क्यों आई बाजार में यह ऐतिहासिक गिरावट?
इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में भड़का भीषण युद्ध है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव अब अपने 10वें दिन में पहुंच चुका है। हालिया सैन्य हमलों और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों ने दुनिया भर के निवेशकों को डरा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है।
बाजार के औंधे मुंह गिरने के 7 मुख्य कारण
- मध्य पूर्व (Middle East) में भीषण युद्ध: सबसे बड़ी वजह अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग है। युद्ध के 10वें दिन ईरान के तेल डिपो पर हुए हमलों और वहां के सर्वोच्च नेता की मौत की खबरों ने वैश्विक निवेशकों में भारी डर पैदा कर दिया है।
- कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आग: युद्ध के कारण सप्लाई रुकने के डर से ब्रेंट क्रूड की कीमतें 30% उछलकर 118 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। 2022 के बाद यह पहली बार है जब तेल ने 100 डॉलर का स्तर पार किया है।
- विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली: वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है। मार्च के पहले चार दिनों में ही उन्होंने लगभग 21,829 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।
- डॉलर के मुकाबले रुपया पस्त: कच्चा तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ गया है, जिससे रुपया कमजोर होकर 92.19 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। कमजोर रुपया शेयर बाजार के लिए हमेशा नकारात्मक संकेत होता है।
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.208% हो गई है। जब सुरक्षित सरकारी बॉन्ड पर अच्छा रिटर्न मिलने लगता है, तो निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे निवेश से पैसा निकालकर वहां लगाने लगते हैं।
- वैश्विक बाजारों में मची घबराहट: यह गिरावट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। जापान का निक्केई 6% और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 8% तक क्रैश हो गया। जब पूरी दुनिया के बाजार गिरते हैं, तो भारतीय बाजार भी दबाव में आ जाते हैं।
- बढ़ती महंगाई और ऊंची ब्याज दरें: महंगे कच्चे तेल का सीधा मतलब है—महंगा पेट्रोल-डीजल और महंगी माल ढुलाई। रेटिंग एजेंसी मूडीज के अनुसार, इससे भारत में महंगाई बढ़ेगी, जिससे RBI के लिए ब्याज दरें घटाना मुश्किल हो जाएगा और आपकी लोन ईएमआई (EMI) महंगी बनी रहेगी।
इस युद्ध का सीधा असर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर पड़ा है, जो करीब 30 प्रतिशत उछलकर 118 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर हमलों के डर से तेल की सप्लाई रुकने की आशंका पैदा हो गई है। जब तेल महंगा होता है, तो भारतीय रुपया कमजोर होता है। यही वजह है कि डॉलर के मुकाबले रुपया 92.19 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर जा गिरा है।
निवेशकों के लिए अब आगे क्या?
एक न्यूज चैनल के हवाले से बाजार में डर को मापने वाला ‘इंडिया विक्स’ 20 प्रतिशत तक उछल चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी के लिए 22,500 का स्तर बचाना बहुत जरूरी है; अगर यह टूटता है तो बाजार 21,500 तक भी गिर सकता है। हालांकि, जानकारों की सलाह है कि निवेशकों को घबराना नहीं चाहिए क्योंकि ऐतिहासिक रूप से युद्ध के संकट का असर बाजार पर लंबे समय तक नहीं रहता। बैंकिंग, फार्मा और डिफेंस जैसे सेक्टर इस माहौल में भी मजबूती दिखा सकते हैं।



