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क्या महायुति से पलटी मारेंगे दादा अजीत पवार !

नई दिल्ली: डिप्टी सीएम अजीत पवार के मन में क्या चल रहा है, यह भी कोई नहीं जानता? फडणवीस ने कहा, ‘नतीजों के बाद पता चलेगा कौन सा दल किधर जाएगा’? इस बयान के भी कई मायने निकाले जा रहे हैं.बिना अधिकारिक पुष्टि के चल रही अटकलों की बात करें तो महाराष्ट्र में वोटिंग और नतीजे आने के बाद सरकार बनाने के लिए जरूरत पड़ने पर दो सीन बनने दिख रहे हैं. इस हिसाब से कहा जा सकता है कि उद्धव सेना, बीजेपी को एक बार फिर बड़ा भाई मान सकती है तो दूसरी ओर एक कद्दावर सियासी रणनीतिकार भतीजा, महाराष्ट्र के सियासी ‘चाणक्य’ और अपने चाचा के दिल में दोबारा जगह बनाकर बैठ सकता है।

महाराष्ट्र में 20 नवंबर को चुनाव होना है. इससे पहले यहां ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ और ‘एक हैं तो सेफ हैं’ जैसे नारों की खूब चर्चा हो रही है. महाराष्ट्र में बीते दिनों यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के साथ ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ वाला पोस्टर दिखा था, तब से ही इसकी चर्चा ने जोर पकड़ लिया. इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने ‘एक हैं तो सेफ हैं’ की बात कही, जिसे बीजेपी ने अपना चुनावी नारा बना लिया. एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी के नेता इन नारों का जोरशोर से प्रचार कर रहे हैं, वहीं विपक्ष की ओर से सवाल खड़े किए जा रहे हैं. हालांकि, अब इस नारे के खिलाफ एनडीए के भीतर भी आवाज उठ रही है. हाल ही में एनडीए के सहयोगी अजित पवार ने इस नारे पर आपत्ति जताई. वहीं अब बीजेपी के कुछ नेता भी इसपर आपत्ति जता रहे हैं.एनसीपी प्रमुख अजीत पवार ने इस बयान का विरोध करते हुए कहा, “महाराष्ट्र ने कभी भी सांप्रदायिक विभाजन को स्वीकार नहीं किया. यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश में लोगों की सोच अलग है, लेकिन ऐसे बयान महाराष्ट्र में नहीं चलते हैं. मेरी राय में महाराष्ट्र में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कोई मायने नहीं रखता है, क्योंकि महाराष्ट्र के लोगों ने छत्रपति शाहू महाराज, ज्योतिबा फुले और बाबासाहेब आंबेडकर की धर्मनिरपेक्ष विचारधारा का पालन किया है. हमारा नारा सबका साथ और सबका विकास है.”.

बीजेपी के सांसद और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने एक इंटरव्यू में कहा, “बंटेंगे तो कटेंगे का नारा सही नहीं है. लोग इसकी सराहना भी नहीं करेंगे. अगर मैं अपनी बात करूं तो मैं ‘वोट जिहाद बनाम धर्म युद्ध’ की बयानबाजी को ज्यादा महत्व नहीं देता, क्योंकि बीजेपी और सत्तारूढ़ महायुति की नीति देश और महाराष्ट्र का विकास है.”महाराष्ट्र बीजेपी की दिग्गज नेता और पार्टी की ओबीसी चेहरा मानी जाने वाली पंकजा मुंडे ने भी ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नारे का विरोध किया है. पंकजा मुंडे ने कहा कि वह इस नारे को सपोर्ट नहीं करती हैं और महाराष्ट्र को इस तरह की राजनीति की जरूरत भी नहीं हैं. उन्होंने कहा, “सच कहें, तो मेरी सियासत अलग हैं. मैं सिर्फ इसलिए इसका समर्थन नहीं करूंगी कि मैं उसी पार्टी से हूं.”

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