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सूर्य की तरह तेज और आत्मविश्वास चाहिए? माणिक्य धारण करने से पहले जान लें ये अहम नियम, वरना हो सकता है नुकसान

नई दिल्ली। ज्योतिष और रत्न शास्त्र में माणिक्य यानी रूबी को विशेष स्थान प्राप्त है। इसे ‘रत्नों का राजा’ कहा जाता है और यह सीधे तौर पर ग्रहों के राजा सूर्य से जुड़ा माना जाता है। लाल रंग का यह चमकदार रत्न न सिर्फ सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से इसे आत्मबल, प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता बढ़ाने वाला रत्न माना गया है। हालांकि, माणिक्य जितना प्रभावशाली है, उतना ही संवेदनशील भी, इसलिए इसे पहनने से पहले सही जानकारी बेहद जरूरी है।

सूर्य ग्रह और माणिक्य का गहरा संबंध

ज्योतिष शास्त्र और रत्न विज्ञान संहिता के अनुसार सूर्य आत्मा, आत्मविश्वास, पिता से संबंध, मान-सम्मान और प्रशासनिक शक्ति का कारक ग्रह है। कुंडली में सूर्य कमजोर होने पर व्यक्ति को करियर में रुकावट, मानसिक दबाव, आत्मविश्वास की कमी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ज्योतिष ग्रंथ बृहत्संहिता के अनुसार ऐसी स्थिति में माणिक्य धारण करने से सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है।

माणिक्य पहनने से मिलने वाले प्रमुख लाभ

माणिक्य को आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रत्न माना जाता है। जो लोग निर्णय लेने में झिझक महसूस करते हैं या सार्वजनिक मंच पर बोलने से डरते हैं, उनके लिए यह रत्न लाभकारी बताया गया है।
ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के अनुसार प्रशासनिक सेवाओं, राजनीति, प्रबंधन और उच्च पदों पर पहुंचने की इच्छा रखने वालों के लिए माणिक्य करियर में उन्नति के योग बनाता है।
आयुर्वेद और रत्न निर्देशिका के मुताबिक माणिक्य हृदय से जुड़ी समस्याओं, आंखों की कमजोरी और इम्युनिटी से संबंधित परेशानियों में सहायक माना गया है।
इसके साथ ही यह पिता के साथ संबंधों को मजबूत करने और समाज में मान-सम्मान बढ़ाने वाला रत्न भी माना जाता है।

किन लोगों को माणिक्य नहीं पहनना चाहिए

रत्न परीक्षा ग्रंथ के अनुसार अगर कुंडली में सूर्य की स्थिति प्रतिकूल हो तो माणिक्य नुकसान भी पहुंचा सकता है। ऐसे मामलों में सिरदर्द, आंखों में जलन, चिड़चिड़ापन और अहंकार बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ज्योतिष के अनुसार माणिक्य को हीरा, नीलम या गोमेद के साथ पहनना वर्जित माना गया है, क्योंकि ये ग्रह आपस में शत्रु संबंध रखते हैं।

माणिक्य धारण करने की सही विधि

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माणिक्य को सोने या तांबे की अंगूठी में जड़वाकर पहनना चाहिए। इसे रविवार की सुबह सूर्योदय के समय गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करने के बाद दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में धारण करना शुभ माना गया है। सही विधि और सही सलाह के साथ पहना गया माणिक्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

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