
रुद्रप्रयाग जिले के प्राथमिक विद्यालय कोटतल्ला के शिक्षक सतेंद्र भंडारी बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं। तकनीकी ज्ञान के साथ उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
रुद्रप्रयाग: एक ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था देख उम्मीदें धूमिल होती दिखती हैं, वहीं दूसरी ओर इसी व्यवस्था में काम करते हुए सतेंद्र भंडारी जैसे शिक्षक उम्मीदों को हकीकत का रूप देने का काम कर रहे हैं। रानीगढ़ क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कोटतल्ला के शिक्षक सतेंद्र भंडारी के प्रयासों का ही नतीजा है कि पिछले साल की अपेक्षा उनके स्कूल में छात्र संख्या बढ़ी है। बच्चों को नई तकनीकी से पढ़ाने के अलावा वे पर्यावरण संरक्षण के संकल्प की जोत भी जला रहे हैं।
अगस्त्यमुनि विकास खंड के कोटतल्ला में शिक्षक सतेंद्र भंडारी की तैनाती वर्ष 2009 में सहायक अध्यापक के तौर पर हुई। तैनाती के बाद से ही वह दुर्गम विद्यालय में छात्रों का भविष्य संवारने का काम कर रहे हैं। वर्तमान में प्राथमिक विद्यालय कोटतल्ला में 37 बच्चे अध्ययनरत हैं, जबकि पहले यह संख्या मात्र 13 थी। उन्होंने अपने खर्चे से स्कूल में कंप्यूटर और प्रोजेक्टर की व्यवस्था की।
भवन मरम्मत को दिए सवा लाख
वर्ष 2011 में विद्यालय का भवन आपदा में क्षतिग्रस्त होने से पर सतेंद्र भंडारी ने अपने स्तर पर मरम्मत के प्रयास किए। सरकार ने भवन निर्माण को एक लाख 80 हजार दिए। मगर धनराशि कम पड़ने पर करीब सवा लाख रुपये सतेंद्र भंडारी ने अपनी जेब से भरे।
संगीत में हाथ आजमाते बच्चे
शिक्षक सतेंद्र अपने छात्रों के सर्वांगीण विकास को लगातार प्रयासरत रहते हैं। बच्चे पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में भी आगे रहें, इसके लिए उन्होंने स्कूल में वाद्य यंत्रों की व्यवस्था की। साथ ही खेल उपकरण भी मुहैया कराए। उन्होंने बच्चों के लिए तीन साइकिल भी खरीदी। मध्याह्न अवकाश पर छात्र इनका प्रयोग करते हैं।
पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प
सतेंद्र भंडारी पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में भी जुटे हैं। उन्होंने विद्यालय की सात नाली भूमि पर चार हजार पौध की नर्सरी तैयार की है। छात्र प्रत्येक दिन नर्सरी का रखरखाव करने का काम करते हैं। उनकी खास बात यह भी है कि जब कोई बच्चा स्कूल में दाखिला लेता है तो वह एक पौधा रोपता है।
इसके बाद उस पौधे की रेखदेख करना उस बच्चे की जिम्मेदारी होती है। बच्चों के लगाए 150 पौधे अब काफी बड़े हो गए हैं। अगस्त में भंडारी ने अपने गांव भटवाड़ी में वन विभाग विभाग के सहयोग से त्रिफला वन में 400 पौधों का रोपण किया था। उनका अब विद्यालय परिसर में ही 11 हजार पौध की नर्सरी तैयार करने का लक्ष्य है।
शिक्षक सतेंद्र भंडारी का प्रयास सराहनीय है
डीईओ माध्यमिक एलएस दानू का कहना है कि शिक्षक सतेंद्र भंडारी का प्रयास सराहनीय है। अन्य शिक्षकों को भी उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। वन विभाग से विद्यालयों में नर्सरी के लिए अनुदान मिलता है। अन्य विद्यालयों को भी नर्सरी तैयार करने को प्रेरित किया जाएगा।