जीवनशैली
इन वजह से महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में ज्यादा होता है गंजापन

आमतौर पर समय से पहले गंजेपन की समस्या महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक देखी जाती है। पुरुष में पहले बाल झड़ते हैं और तेजी से उनका बाल झड़ना गंजेपन में बदल जाता है। वहीं महिलाओं में भी बाल झड़ने की समस्या होती है लेकिन ऐसा बहुत ही कम चांस होता है कि उनके बाल पूरी तरह से झड़ जाए और अगर ऐसा कुछ होता भी है तो उनके पीछे कोई मेडिकल या अनुवांशिक कारण होते हैं। आइए जानते हैं आखिर किन कारणों से पुरुषों में गंजेपन की समस्या शुरू होती है।

हार्मोनल बदलाव तो गंजेपन का कारण नहीं
रिसर्च में शोधकर्ताओं ने बताया है कि गंजापन हार्मोन्स के कारण होता है। शोधकर्ताओं की मानें तो यह बदलाव महिलाओं में भी देखने को मिलता है। शरीर पर बाल रहना और झड़ना दोनों ही हार्मोंस पर निर्भर करता है। महिलाओं और पुरुषों में बाल झड़ने के पीछे एक अलग तरह का हार्मोनल बदलाव है।
रिसर्च में शोधकर्ताओं ने बताया है कि गंजापन हार्मोन्स के कारण होता है। शोधकर्ताओं की मानें तो यह बदलाव महिलाओं में भी देखने को मिलता है। शरीर पर बाल रहना और झड़ना दोनों ही हार्मोंस पर निर्भर करता है। महिलाओं और पुरुषों में बाल झड़ने के पीछे एक अलग तरह का हार्मोनल बदलाव है।
पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन नाम का हार्मोन पाया जाता है और यही हार्मोन पुरुषों के बाल झड़ने के मुख्य कारण हैं। हालांकि यह हार्मोन महिलाओं में नहीं पाया जाता है लेकिन फिर भी महिलाओं में पोषण की कमी के चलते उनके बाल झड़ने लगते हैं। शोधकर्ताओं की मानें तो कुछ एंजाइम टेस्टोस्टेरॉन को डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरॉन में बदल देते हैं और डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरॉन बालों को पतला और कमजोर कर देता है।
डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरॉन से गिरते हैं बाल
आमतौर पर तीस साल की उम्र से पुरुषों के बाल झड़ने शुरू हो जाते हैं और पचास वर्ष की उम्र आते-आते उनके सिर पर आधा ही बाल बचते हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि अचानक ही एंजाइम एक निश्चित उम्र के बाद काम करने लगते हैं और आपको गंजा बना देते हैं। टेस्टोस्टेरॉन का डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरॉन में बदलने की एक लंबी प्रक्रिया होती है। बालों का इस तरह प्राकृतिक तरीके से गिरना विज्ञान की भाषा में एंड्रोजोनिक एलोपीसिया कहते हैं।
आमतौर पर तीस साल की उम्र से पुरुषों के बाल झड़ने शुरू हो जाते हैं और पचास वर्ष की उम्र आते-आते उनके सिर पर आधा ही बाल बचते हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि अचानक ही एंजाइम एक निश्चित उम्र के बाद काम करने लगते हैं और आपको गंजा बना देते हैं। टेस्टोस्टेरॉन का डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरॉन में बदलने की एक लंबी प्रक्रिया होती है। बालों का इस तरह प्राकृतिक तरीके से गिरना विज्ञान की भाषा में एंड्रोजोनिक एलोपीसिया कहते हैं।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं में टेस्टोस्टेरॉन का स्राव नाममात्र का होता है। साथ ही महिलाओं में टेस्टोस्टेरॉन के साथ-साथ एस्ट्रोजन नाम का हार्मोन का भी स्राव होता है। इसलिए महिलाओं के शरीर में टेस्टोस्टेरॉन के डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन बदलने की भी प्रक्रिया कम होती है। कभी-कभी गर्भावस्था या मेनोपॉज के दौरान यह प्रक्रिया तेज हो जाती है। उस दौरान महिलाओं के बाल भी झड़ने शुरू हो जाते हैं।