क्या आप भी देखते हैं पोर्न? पहले जान लीजिए ये खतरे

चोरी छिपे ही सही लेकिन तकरीबन 80 फीसदी लोग युवावस्था में पोर्न देखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मजे के लिए देखा जा रहा पोर्न आपके दिमाग, शादीशुदा लाइफ और सेक्स लाइफ को किस कदर नुकसान पहुंचा रहा है।
डेलीमेल में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबुक कि ज्यादा पोर्न देखने वालों के दिमाग के कुछ हिस्से सिकुड़ जाते हैं। ये वही हिस्से हैं जहां से समझदारी उत्पन्न होती है। शोधकर्ता सिमोन ने कहा कि दिमाग का स्ट्रेटम (समझदारी वाला हिस्सा) छोटा होने के लिए पूरी तरह पोर्न जिम्मेदार है या नहीं, इस बात पर शोध किया जा रहा है।
एक स्टडी के मुताबिक अगर पति और पत्नी दोनों पोर्न देख रहे हैं तो ये कामोत्तेजना बढ़ाता है लेकिन अगर एक पार्टनर पोर्न देखता है तो इसका कामोत्तेजना पर बुरा असर पड़ता है। कामेच्छा बढ़ाए जाने के लिए देखा जा रहा पोर्न कुछ समय बाद उसी कामेच्छा को मार डालता है और दिमाग के हिस्से सेक्स को प्राथमिकता देना बंद कर देते हैं।
केमिकल लोचा केलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के मुताबिक पोर्न देखते समय दिमाग में डोपामाइन नामक हारमोन बनता है। ये हारमोन दिमाग और शरीर में आनन्द का संचार करता है।लेकिन ज्यादा पोर्न देखने पर डोपामाइन इसकी लत लगा लेता है यानी बाकी आनन्ददायक गतिविधियों के समय ये हारमोन नहीं बनेगा और सिर्फ पोर्न देखते समय ही बनेगा। यानी जिंदगी में कोई भी खुशी आपको खुश नहीं कर पाएगी।
पोर्न देखते वक्त दिमाग में याद्दाश्त के लिए उत्तरदायी रसायन बनते हैं। एक ऑक्सिटोसिन और दूसरा वासोप्रेसिन। आनन्ददायक चीजों और वाकयों को ये रसायन दिमाग में स्टोर कर लेते हैं। लेकिन ज्यादा पोर्न देखने से ये रसायन केवल पोर्न को ही दिमाग में स्टोर करते हैं, और बाकी अच्छी और आनन्ददायक चीजों को भूल जाते हैं। इससे व्यक्ति के दिमाग में याद रखने लायक केवल पोर्न ही बचता है।
ज्यादा पोर्न देखने वाले पोर्न करेक्टर की तरह बिहेव करने लगते हैं। उन्हें सामान्य यौन संबंधों की बजाय पोर्न में प्रचलित थ्रीसम, ग्रुप सेक्स या अप्राकृतिक सेक्स की दरकार होने लगती है। पोर्न का लती पोर्न फिल्मों की ही तरह हर मौके पर सेक्स की कल्पनाएं करने लगता है जो उसे सार्वजनिक जीवन में शर्मिंदा कर सकती हैं।
शरीर में बनने वाला सेरोटोनिन नामक रसायन सेक्स के बाद हमें दिमागी और शारीरिक रूप से शांत करता है। जबकि पोर्न देखने के बाद यही रसायन हमें यौन संबंध की बजाय पोर्न देखने के लिए उकसाता है। इसका नुकसान होता है कि स्वस्थ यौन संबंधों की बजाय पोर्न देखने में सुख खोजने लगते हैं।