बालासनः मस्तिष्क को शांति देता है।
इस आसन का अभ्यास करने से मस्तिष्क को शांति और शीतलता मिलती है। बच्चे लम्बे समय तक कक्षाओं में बैठते हैं, ऐसे में इसका अभ्यास उन्हें फ़ायदा देगा, क्योंकि यह कमर और रीढ़ की हड्डी के लिए लाभप्रद होता है। यह पीठ, कंधे और गर्दन के तनाव को भी कम करता है। साथ ही साथ इससे मांसपेशियों को भी मज़बूती मिलती है।
कैसे करें- सबसे पहले पालथी लगाकर बैठ जाएं और शरीर का सारा भार एड़ियों पर डालें। गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें और ऊपरी भाग को जांघों पर टिकाएं। सिर को ज़मीन से स्पर्श करें। अपने हाथों को सिर से लगाकर आगे की ओर सीधा रखें और हथेलियों को ज़मीन से स्पर्श करें। अब अपनेपिछले भाग को एड़ियों की ओर ले जाते हुए सांस छोड़ें। इस अवस्था में 15 सेकंड्स से 2 मिनट तक रहें।
भुजंगासनः थकान एवं तनाव से मुक्ति दिलाता है। यह योगासन फेफड़ों और सीने के तनाव को कम करता है। इसका अभ्यास करने से पेट और भुजाओं को बल मिलता है, जिससे वे ज्य़ादा सक्रियता से काम करते हैं। यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और रक्त संचार को भी ठीक करता है। इस आसन सेथकान एवं तनाव से भी मुक्ति मिलती है। इसलिए परीक्षा के दौरान यह बड़ा कारगर है।
कैसे करें- पेट के बल लेटकर दोनों हाथों को छाती के दोनों ओर कंधों के समीप रखें। कोहनियां पार्श्व से लगी हुईं तथा ज़मीन से ऊपर की ओर उठी हुई हों। सांसें भरते हुए छाती को उठाएं। सीना, गर्दन व नाभि तक अगला हिस्सा उठाएं, फिर कुछ देर बाद सांस छोड़ते हुए नीचे आ जाएं। इस प्रक्रिया को 5-6 बार दोहराएं।