भागवत के बोल बिगाड़ न दें भाजपा का खेल

जितेन्द्र शुक्ला
हार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण नीति की समीक्षा के लिए एक समिति के गठन के सुझाव पर सियासी घमासान मच गया है। जदयू और राजद समेत कई दलों ने जहां इसे चुनावी मुद्दा बना लिया है तो भाजपा ने संघ प्रमुख के बयान से दूरी बना ली। भाजपा ने दो टूक शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार का आरक्षण नीति की समीक्षा करने का कोई इरादा नहीं है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भागवत के सुझाव का परोक्ष रूप से समर्थन किया। भागवत के बयान पर विवाद को बढ़ता देख संघ ने अपनी सफाई देते हुए कहा है कि संघ प्रमुख ने मौजूदा आरक्षण नीति पर कोई सवाल नहीं उठाया। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने भागवत के बयान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा और संघ शुरू से ही आरक्षण के खिलाफ रहे हैं। उन्होंने अपने अंदाज में आरक्षण खत्म करने की चुनौती देते हुए कहा कि किसी माई के लाल में ताकत है तो इसे खत्म करके दिखाए। साफ है कि भागवत का यह बयान उस समय आया है जब बिहार जैसे प्रांत में चुनाव हो रहा है, जहां जाति आधारित चुनाव ही होते रहे हैं और वहां आरक्षण का मुद्दा सबसे ज्यादा संवेदनशील है।
दरअसल संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पांचजन्य और आर्गनाइजर को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा था कि आरक्षण किसको और कितने वक्त के लिए दिया जाए, इसकी समीक्षा के लिए एक गैर राजनीतिक समिति का गठन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण का राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया गया। अगर संविधान निर्माताओं के मन के हिसाब से सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग पर आधारित आरक्षण नीति होती तो आज इतने सारे सवाल नहीं खड़े होते। गुजरात के पटेल आरक्षण आन्दोलन के दृष्टिगत भागवत ने कहा कि हमरा लक्ष्य सभी के कल्याण का होना चाहिए। ये मानना अधिक विवेकपूर्ण है कि हमारा हित राष्ट्र के हित में है। सरकार को भी ऐस मुद्दों पर संवेदनशील होने की आवश्यकता है, ताकि ऐसे मुद्दों के लिए आंदोलन न हो।
बिहार में भाजपा विरोधियों ने बिना देर किए इसे मुद्दा बना लिया है। लालू ने ट्वीट कर कहा कि संघ आरक्षण खत्म करने की बात कर रहा है और हम इसे आबादी के अनुपात में बढ़ाने की बात करते हैं। आरएसएस और भाजपा आरक्षण खत्म करने का कितना भी सुनियोजित माहौल बना ले, देश के 80 फीसदी दलित और पिछड़े वर्ग के लोग इसका मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार हैं। लालू ने मोदी पर हमला करते हुए कहा कि कथाकथित चाय बेचने वाले, हाल ही में पिछड़ा बने मोदी बताएं कि वह अपने आका के कहने पर आरक्षण खत्म करेंगे कि नहीं। वहीं जदयू महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि मौजूदा आरक्षण नीति में छेड़छाड़ के ऐसे प्रस्ताव संविधान की मूल भावना के खिलाफ हैं। साथ ही यह एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा समुदाय को कमजोर करने की कोशिश है। साफ है कि भागवत ने बैठे-बिठाये लालू व नीतीश को भाजपा पर हमला करने का सामान मुहैया करा दिया है। उनके बयान को अब महागठबंधन बिहार में हर मोड़ पर भुनाने की कोशिश करेगा। ल्ल
बिहार विधानसभा चुनाव2015
ज्योतिष की नजर में
रे देश की निगाह इस समय बिहार विधान सभा क२ चुनाव पर है। एक तरफ नरेन्द्र मोदी तथा उनके सहयोगी दल और दूसरी तरफ नीतीश कुमार और लालू का गठबन्धन। भाजपा केन्द्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सत्तारूढ है। इस समय देश की सारी पार्टियों के बडे़ नेता बिहार के चुनाव को लेकर अत्यन्त गम्भीर हैं। एक तरफ नरेन्द्र मोदी ने वहां कई सभाएं कीं तो दूसरी तरफ नीतीश कुमार के किये गये विकास कार्यों का प्रचार भी चल रहा है। ये मोदी का भय हो या बिहार की सत्ता में पुन: वापसी का लाभ हो, तभी तो नीतीश और लालू दो विपरीत धु्रव आज एक साथ भाजपा के खिलाफ एकजुट हैं।
ज्योतिष वेद का नेत्र है। इस समय भारत देश जिसकी कुण्डली वृष लग्न की है उसके अन्तर्गत बिहार राज्य के कुण्डली का वर्तमान गोचर बहुत ही संघर्षमय राजनीतिक परिस्थितियों से गुजर रहा है। वृहस्पति का वर्तमान गोचर सिंह राशि में है तथा शुक्र अभी कर्क राशि में है। चुनाव के समय गुरु और शुक्र का गोचर चुनावी घमासान मचाएगा। शनि का वृश्चिक राशि में गोचर लग्न गोचर से सप्तम् में आने के कारण बिहार की राजनीति बहुत कांटे की होगी। कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत ही खराब रहेगा। जहां तक भाजपा की बात है तो नरेन्द्र मोदी मुख्य कारक के रूप में कार्य करेंगे। नरेन्द्र मोदी की कुण्डली वृश्चिक लग्न की है। लग्नेश मंगल अपने घर में स्थित है। वृहस्पति चतुर्थ भाव में स्थित होकर उनकी कुण्डली को और मजबूत बना रहा है। शनि और शुक्र का एक साथ दशम् भाव में होना इनको एक महान राजनीतिक तथा राजनीति में कूटनीति की महारथता को दर्शाता है। शनि की तृतीय दृष्टि बारहवें भाव में तथा षष्ठेष मंगल का लग्न में होना यह दर्शाता है कि यह हमेशा विरोधियों पर हावी रहेंगे तथा राजनीति में इनके विरोधी अन्तत: इसी कारण परास्त होते है। जनता का कारक भाव अर्थात लोकतंत्र जनता का, जनता के लिए तथा जनता के द्वारा ही जाना जाता है। किसी भी राज्य का सप्तम् तथा नवम् भाव का वर्तमान गोचर तथा राजनीतिक दलों का शनि तथा सप्तम् व नवम् भाव पर विचार अत्यन्त आवश्यक है। बुध चुनाव के समय कन्या राशि में रहेंगे। इसीलिए हर पार्टियों ने टिकट के वितरण में गलतियां की है जिसका खामियाजा हर पार्टी को भुगतना है। 15 सितम्बर को मंगल सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। अत: छिटपुट हिंसा की सम्भावना भी रहेगी। राहु का कन्या राशि में गतिशील होना जबरदस्त जातीय समीकरण को बिहार की राजनीति में प्रभावी करेगा। लालू यादव को राहु कुछ हद तक जातीय समीकरण में लाभ दिलवा सकता है। नीतीश के किये गये विकास कार्य तथा जातीय समीकरण केतु तथा राहु उनको जातीय समीकरण में फिट करेंगे। जहां तक सपा का सवाल है तो उसको बिहार की राजनीति में कोई बड़ी सफलता नहीं मिलने वाली है बल्कि वो भाजपा को फायदा पहुंचा सकती है। राहुल गांधी की कुण्डली मकर लग्न तथा वृश्चिक राशि की है। वर्तमान में राहुल राजनीति में कहीं भी कोई अच्छा प्रदर्शन नही कर पायेंगे। अन्तत: बिहार का चुनाव बहुत ही कांटे का होगा तथा भाजपा के लिए भी पूर्ण बहुमत बहुत आसान नही है, लेकिन भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी। मांझी का भाजपा का सहयोग उसके गठबन्धन के लिए अच्छा रहेगा। चुनाव के पश्चात यह तय है कि गठबन्धन के कई दल इधर से उधर जायेंगे। ज्योतिष तथा ग्रहों के गहन अध्ययन के बाद यह तय है कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी तथा सरकार भाजपा के गठबंधन की ही बनेगी तथा मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। अंक ज्योतिष से एस या आर नाम का व्यक्ति ही बिहार का मुख्यमंत्री होगा।
भाजपा गठबंधन बनाएगी बिहार में सरकार। अंक ज्योतिष के हिसाब से एस या आर नाम का व्यक्ति ही बिहार का होगा मुख्यमंत्री।