यातायात नियमो में हुए बदलाव,जुर्माना राशि हुयी दश गुना ज्यादा और सात साल की सजा

नई दिल्ली : यातायात के नियमो में कुछ न कुछ बदलाव होता रहता है | हालांकि हादसे दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है | हादसे को ध्यान में रखते हुए कई क़ानून बनाये गए है ,जो लोगो को आगाह करवाती हैं | वहीं सरकार यातायात पर सख्त कदम उठाने जा रही है| अब शराब पीकर या फिर मोबाइल से बात करते समय ड्राइविंग करना आपके लिए महंगा साबित हो सकता है। इसके अलावा परिवहन और यातायात विभाग में भ्रष्टाचार को राेकने के लिए कई कदम उठाने की योजना बनाई जा रही है । मोटर यान (संशोधन) विधेयक में तमाम उपाय किए गए हैं। काफी लंबी जद्दोजहद के बाद ये विधेयक दोनों सदनाें में पारित हो चुका है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून का पालन किया जाएगा।
नए कानून में कुछ बदलाव हुए है, अगर कोई ब्याती शराब पीकर वाहन चलाते पकड़े गए तो उन्हें दो हजार रुपये की जुर्माना राशि दस हजार रूपये ज्यादा देना पड़ेगा। वहीं मोबाइल फोन पर बात करने पर एक हजार की जगह पांच हजार का जुर्माना देना होगा। बिना लाइंसेंस वाहन चलाने पर पांच सौ की जगह पांच हजार रुपये का जुर्माना देना होगा।जुर्माना राशि बढ़ा दी गयी है | वहीं इसके अलावा रेड लाइट जंप करना या सीट बेल्ट नहीं बांधने पर एक हजार का जुर्माना देना होगा। मोटर साइकिल पर बिना हेल्मेट पहने पकड़े गए तो एक हजार रुपये भरने होंगे। बल्किं नाबालिग के द्वारा वाहन चलाने पर उसके अभिभावक को 25 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा। इसके अलावा तीन साल की सजा का भी होगी।वहीँ किसी भी पीड़ित की मौत की स्थिति में अब दस गुना क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। जबकि सभी अपराधों के जुर्माने की राशि में अब हर साल दस फीसद का बढ़ोत्री किया जाएगा। सड़क दुर्घटना में मौत मामले में वाहन चालक को दो साल की जगह सात साल की सजा होगी। जबकि, हिट एडं रन मामले में जुर्माने की राशि 25 हजार से बढ़ाकर दो लाख रुपये की होगी | देश में प्रतिवर्ष होने वाली सड़क दुर्घटनाएं सरकार और आमआदमी के लिए चिंता का विषय बना हुआ हैं। ज्यादा तर ऐसी दुर्घटनाएं राजमार्गों पर अधिक हो रही हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान सड़क हादसों पर नजर दौड़ाएं तो वर्ष 2015 में पांच लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। और इसमें एक लाख 46 हजार लोग मौत के शिकार हुए। वहीँ 2016 में चार लाख 80 हजार सड़क दुर्घटनाएं हुईं, इसमें एक लाख 50 हजार लोगों की मौत हुई थी। इसी तरह से वर्ष 2017 में चार लाख 60 हजार घटनाएं हुईं, इसमें एक लाख 46 हजार लोग बेवजह मौत के शिकार हुए।यह तीन वर्षो में हुयी सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा हैं | इन दुर्घटनाओं का शिकार अधिकतर युवा हैं।18 साल से 45 की उम्र तक के लोग हैं। आंकड़ों से साफ पता चलता है, कि युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा शिकार हो रही है। सर्वाधिक मौते दो पहिया वाहन चालकों की हाेती है। इस मौत के पीछे सबसे बड़ी वजह शराब पीकर वाहन चलाने और हेल्मेट का उपयोग नहीं करने वालो को बताया जा रहा हैं । वहीँ संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2020 तक दुनियाभर में हो रही सड़क दुघर्टनओं में 50 फीसद तक की कमी लाने का लक्ष्य सामने रखा है। इसलिए वर्ष 2011 से 2020 को सड़क सुरक्षा के लिए कार्रवाई दशक के रूप में अपनाया गया है। शहरीकरण और यातायात में वाहनों का भारी इजाफा इसके लिए बड़ा कारण बताया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय सड़क संघ का दावा है कि दुनियाभर में हर साल करीब 12 लाख लोग अपनी जान गंवाते हैं। इस मौत का सीधा असर 50 लाख लोगों पर पड़ता है। इन सड़क हादसों पर विश्व स्वस्थ संगठन ने भी चिंता जताई है। संगठन का कहना है अगर इसे रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो 2020 तक सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या 19 लाख से ज्यादा हो जाएगी| वहीँ संगठन ने दावा किया है कि 78 फीसद सड़क हादसों में गलती वाहन चालकों की होती है। अब तक दुनिया के 28 मुल्कों में ही यातायात उलंघन के लिए सख्त कानून हैं। इन 28 मुल्कों की आबादी दुनिया की सात फीसद ही है।