…सचमुच ‘रिकॉर्ड ब्रेकिंग’

जितेंद्र शुक्ल देवव्रत

किसी मशहूर शायर ने क्या खूब कहा है, ‘कौन कहता है आसमां में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों’। देश के सबसे बड़े सूबे में अब तक कई दलों और गठबंधन सरकारों ने राज किया है। लेकिन इसे राजनैतिक इच्छाशक्ति और कुशल प्रशासनिक क्षमता ही कहा जायेगा कि मुख्यमंत्री के पद का दायित्व संभालने के बाद से ही योगी आदित्यनाथ ने कोरे कागज पर रंग भरने शुरु कर दिए। उनकी सोच और दूरदर्शिता का ही परिणाम था कि इसी साल के फरवरी महीने में सूबे में पहली बार बड़े पैमाने पर ‘इन्वेस्टर्स समिट’ का आयोजन किया गया और पांचवें महीने ही यानि जुलाई में 60000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की नींव भी रख दी। फरवरी में आयोजित ‘इन्वेस्टर्स समिट’ के दौरान राज्य के कुल बजट आकार के बराबर यानि चार लाख 28 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले थे। जोकि अब तक का रिकार्ड है। उस समय कुल 1,045 समझौते किए गए थे। उनमें से 80 समझौतों को लागू करने के लिए ही यह समारोह आयोजित किया गया। 60000 करोड़ रुपए की 81 परियोजनाओं को धरातल पर उतारते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सही ही कहा कि यह ‘ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी’ नहीं बल्कि ‘रिकार्ड ब्रेकिंग सेरेमनी’ है। हालांकि विपक्ष ने योगी सरकार में आये निवेश प्रस्तावों को हवा-हवाई करार दिया था लेकिन मुख्यमंत्री ने मंत्रिमण्डल से लेकर अफसरशाही तक को अपनी रडार पर रखा ही, उद्यमियों से जब सीधे संवाद का मौका आया तो उन्होंने तमाम व्यस्तताओं के बीच उनके लिए समय निकाला। यही वजह है कि पांच महीने की छोटी सी अवधि में 60000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने में कामयाब हुए। दोनों ही मौकों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी ने न सिर्फ उद्योगपतियों के बीच आत्मविश्वास का संचार किया बल्कि अफसरशाही को भी हमेशा इस मुद्दे पर ‘अलर्ट मोड’ पर रहने का इशारा भी किया। इस समारोह से यह संदेश भी गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के विकास और राज्य में नौकरी के नए अवसर पैदा करने के लिए अनथक प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योेगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के विकास के लिए निवेश लाने के मकसद से राज्य सरकार ने कई नई नीतियों की शुरुआत की तो वहीं, कई पुरानी नीतियों में बदलाव किया। ‘इन्वेस्टर्स समिट’ में हुए ‘एमओयू’ को जल्दी मंजूरी मिले, बकायदा इसके लिए एक नया कानून भी बनाया। वहीं समझौतों से संबंधित मसौदों को सिंगल विंडो सिस्टम के तहत एक ही प्राधिकरण से मंजूरी का रास्ता भी साफ हुआ। प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने भी समझौते धरातल पर उतारे, इसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया और फिर उनकी मेहनत रंग भी लायी। आने वाले महीनों में ऐसे और समारोह आयोजित किए जाने की संभावना है। राज्य के मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय कहते हैं कि हम और समझौतों को लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। जल्द ही एक और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजित की जा सकती है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 60 हजार करोड़ रुपए की 81 निवेश परियोजनाओं का शुभारम्भ करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और कहा यह एक अद्भुत और अकल्पनीय उपलब्धि है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा निवेश एक साथ हासिल करना आसान काम नहीं है। इसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। मुख्यमंत्री और उनकी टीम ने इस काम को बहुत कम समय में अंजाम दिया, जो अविश्वसनीय है। उत्तर प्रदेश सरकार ने जिस प्रकार इन परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए सारी बाधाओं को दूर किया, उसके लिए भी प्रधानमंत्री ने सभी को सराहा। इसी दौरान उन्होंने कहा कि इसे ‘ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी’ न कहकर ‘रिकॉर्ड ब्रेकिंग सेरेमनी’ कहना ठीक होगा। उन्होंने भी माना कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सर्वांगीण विकास के साथ-साथ संतुलित विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी में शामिल परियोजनाएं राज्य के सभी क्षेत्रों में स्थापित की जा रही हैं। क्योंकि संतुलित विकास ही उत्तर प्रदेश की आवश्यकता है। साफ है कि कम समय में राज्य सरकार ने तेजी से प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया है और पुराने तौर-तरीकों को बदला। राज्य सरकार ने निवेशकों से संवाद बनाये रखा और ‘इन्टेन्ट’ को ‘इन्वेस्टमेण्ट’ में बदलने के लिए माहौल तैयार किया। स्वयं प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑनलाइन एमओयू टैज्कर हो या क्लीयरेन्स के लिए ‘निवेश मित्र’ जैसा डिजिटल प्लेटफार्म, ये उत्तर प्रदेश में बिजनेस के लिए बने अनुकूल वातावरण को दर्शाता है।
60000 करोड़ की इन परियोजनाओं से दो लाख लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा, जबकि बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी सृजित होगा। वहीं ये प्रोजेक्ट्स उत्तर प्रदेश में आर्थिक और औद्योगिक असंतुलन दूर करने में भी सहायक होंगे। इसीलिए प्रधानमंत्री का भी मानना है कि उत्तर प्रदेश जिस तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है, उससे इसे ‘वन ट्रिलियन इकोनॉमी’ बनने में बहुत समय नहीं लगेगा। यह प्रोजेक्ट्स डिजिटल इण्डिया और मेक इन इण्डिया को नया आयाम देने की दिशा में बहुत बड़े कदम सिद्ध होंगे। उत्तर प्रदेश में इंटरनेट सर्विस पहुंचाने के लिए फाइबर बिछाना हो या फिर आईटी सेंटर स्थापित करना, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर यूपी के विकास को नई गति, नई दिशा देने वाला है। दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की कानून-व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है। इसके चलते निवेशक उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित हो रहे हैं। सरकार ‘होलिस्टिक विजन’ और ‘इन्क्ल्यूसिव एक्शन’ के एप्रोच पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सड़कें विकास का कारक हैं। उत्तर प्रदेश में शीघ्र ही एक्सप्रेस-वे का नेटवर्क होगा। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के बनने के पश्चात इस क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। देश और प्रदेश के विकास में जनभागीदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्योग जगत से कृषि क्षेत्र में अपना निवेश बढ़ाने का भी आग्रह करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार कृषि क्षेत्र में कारपोरेट इन्वेस्टमेंट लाने के प्रयास कर रही है। निवेश कैसे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचे इस पर काम किया जाएगा। उनका मकसद किसानों को लाभ पहुंचाना था। क्षेत्रवार ढंग से इन परियोजनाओं की मौजूदगी 50 प्रतिशत पश्चिमी उत्तर प्रदेश, 22 प्रतिशत पूर्वी उत्तर प्रदेश, 23 प्रतिशत केन्द्रीय उत्तर प्रदेश तथा 04 प्रतिशत बुन्देलखण्ड में है। इसीलिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ किया कि समिट के आयोजन मात्र से राज्य सरकार ने अपने प्रयासों की इतिश्री नहीं की, बल्कि इसे औद्योगीकरण के पथ पर प्रदेश की यात्रा की शुरुआत माना है।
दरअसल पहले भय व अस्थिरता के कारण उत्तर प्रदेश में जीवन दूभर था। योगी सरकार ने पूर्व के ‘नेगेटिविटी’ भरे उस माहौल से राज्य को ‘पॉजिटिविटी’ की तरफ लाने और हताशा-निराशा को अलग करके उम्मीद की किरण जगाने का काम किया है। ‘न्यू यूपी’ की बुनियाद अब रखी जा चुकी है। उत्तर प्रदेश में संसाधनों और सामथ्र्य की कोई कमी नहीं है। जहां एक ओर लखनऊ की चिकनकारी, यहां का दशहरी आम, मुरादाबाद का पीतल, फिरोजाबाद का कांच, आगरे का पेठा, कन्नौज का इत्र जैसे अद्भुत उत्पाद राज्य में मौजूद हैं, वहीं ताजमहल और सारनाथ जैसी धरोहर भी यहां मौजूद है। साथ ही, अयोध्या, मथुरा और काशी जैसे प्राचीन नगर भी यहां मौजूद हैं। इस प्रदेश को गंगा, यमुना, सरयू जैसी नदियों का आशीर्वाद भी प्राप्त है। प्रधानमंत्री भी मानते हैं कि यह प्रदेश, देश का ग्रोथ इंजन बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि गेहूं, गन्ना, दूध, आलू के उत्पादन में यह प्रदेश प्रथम स्थान पर है, जबकि सब्जियों के उत्पादन में यह प्रदेश दूसरे नम्बर पर है। फलोत्पादन में यह प्रदेश तीसरे नम्बर पर है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में ‘वैल्यूज और वर्चूज’ की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता वैल्यू एडिशन की है। ‘पोटेन्शियल’, ‘पॉलिसी’, ‘प्लानिंग’ और ‘परफॉर्मेन्स’ से ही ‘प्रोग्रेस’ आती है।
उत्तर प्रदेश, देश की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। उत्तर प्रदेश असीमित क्षमताओं वाला प्रदेश है, आवश्यकता इसे इस्तेमाल करने की है। आज देश के विकास का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। राज्य सरकार ने नीतियों पर आधारित शासन पद्धति को अपनाते हुए 20 सेक्टोरल नीतियों को लागू किया है। श्रम कानूनों, करों, प्रक्रियात्मक पारदर्शिता और अनुप्रयोगों को ई-सक्षम बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। उत्तर प्रदेश भूमि की उपलब्धता तथा आवंटन, करों के भुगतान, पारदर्शी एवं सहज रूप से उपलब्ध जानकारी, सिंगल विण्डो सिस्टम, पर्यावरण अनापत्ति के लिए पंजीकरण तथा सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए परमिट प्रदान करने वाले पांच प्रमुख राज्यों में से एक है। परियोजनाओं की प्रगति को ट्रैक करने के लिए एक ऑनलाइन मॉनीटरिंग पोर्टल विकसित किया गया है। राज्य सरकार दिन-रात यह सुनिश्चित कर रही है कि निवेशकर्ताओं को सभी सुविधाएं समयबद्धता के साथ उपलब्ध हो जाएं। वाराणसी मल्टी मॉडल हब की स्थापना की जा रही है। उद्योगपतियों की सुविधा के लिए 21 नई नीतियां लागू की गई हैं। योगी सरकार ने उद्यमियों के लिए ‘रेड टेप’ नहीं ‘रेड कार्पेट’ की व्यवस्था की है। निवेशकों की समस्याओं का त्वरित निदान सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि उन्हें अपने उद्योग स्थापित करने में कोई दिक्कत न हो। एमओयू के पांच महीनों के अन्दर निवेश परियोजनाओं का शुभारम्भ, उद्यमियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह उत्तर प्रदेश के बदलते हुए औद्योगिक परिवेश का द्योतक है।
राज्य सरकार की पारदर्शी नीतियों ने निवेशकर्ताओं के आत्मविश्वास को बढ़ाया है और उनमें सकारात्मक भावनाओं को जागृत किया है। प्रदेश में निवेश का नया वातावरण बना है। नागरिकों की सुरक्षा के साथ ही औद्योगिक सुरक्षा की भी व्यवस्था की गई है। केन्द्रीय बजट 2018-19 में प्रस्तावित देश के दो डिफेन्स कॉरिडोर में से एक उत्तर प्रदेश में स्थापित किया जाना है। बुन्देलखण्ड के विकास को विशेष तौर पर ध्यान में रखते हुए यह तय किया गया है कि उत्तर प्रदेश में डिफेन्स इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर का विस्तार आगरा, अलीगढ़, लखनऊ, कानपुर, झांसी और चित्रकूट तक होगा। इसके तहत 20 हजार करोड़ रुपए के निवेश के साथ-साथ ढाई लाख रोजगार सृजित होने की सम्भावना है। साफ है कि उत्तर प्रदेश में एक नई शुरुआत हो चुकी है। उत्तर प्रदेश शीघ्र ही देश के विकास का इंजन बनेगा।
साफ है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी सरकार ने उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर निकालकर एक समृद्ध राज्य बनाए जाने की दिशा में ही काम किया है। पिछले 16 महीनों के अंदर राज्य सरकार ने प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए। प्रदेश को विकासशील और समृद्ध बनाने के दृष्टिगत इस समिट में एग्रो और फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, हैण्डलूम एण्ड टेक्सटाइल, एमएसएमई, आईटी, आईटीईएस एण्ड स्टार्टअप, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, फिल्म, टूरिज्म, सिविल एविएशन और रिन्यूएबिल एनर्जी फोकस सेक्टर निर्धारित किए गए हैं। प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीति के अंतर्गत विभिन्न सेक्टर्स में पूर्व से स्थापित तथा नई औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए विभिन्न नीतियाँ बनाई गई हैं।
इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि उद्योगों की स्थापना का सीधा सम्बन्ध रोजगार सृजन से हो। राज्य सरकार का लक्ष्य आगामी 03 वर्षों में उद्योगों के माध्यम से 40 लाख रोजगार सृजित करने का है। प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार को नीतिगत रणनीति बनाये जाने के वास्ते सुझाव देने के लिए देश के एमीनेण्ट इण्डस्ट्रियलिस्ट्स की एक एडवाइजरी बॉडी ‘राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड’ का गठन किया गया है। इस बोर्ड के माध्यम से देश के अग्रणी उद्योगपतियों का सक्रिय सहयोग प्रदेश की औद्योगिक नीतियों को एक दिशा प्रदान करने में मिल सकेगा। उत्तर प्रदेश से गुजरने वाले ‘वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ तथा ‘ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ से राज्य से माल ढुलाई के समय में बेहद कमी आएगी। ‘ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ प्रदेश के उद्यमियों को पूर्वी भारत के बन्दरगाहों तक सुगम पहुंच उपलब्ध कराने में सहायक होगा। ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ के दोनों तरफ विकसित की जा रही ‘अमृतसर-कोलकाता इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर’ परियोजना को केन्द्रित करते हुए, उत्तर प्रदेश में दो नेशनल इन्वेस्टमेन्ट एण्ड मैन्युफैक्चरिंग जोन्स तथा इण्टीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स विकसित किए जाने हैं।

निवेश के शिल्पकार

सूबे में नयी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना जहां चुनाव के दौरान जनता से किए गए वायदों को धरातल पर उतारने की दिशा में जुट गये। प्रदेश में उद्योगों का जाल बिछाकर रोजगार उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार की गयी। इस सारी कवायद का जिम्मा तत्कालीन अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त डा. अनूप चन्द्र पाण्डेय को सौंपा गया। 1984 बैच के आईएएस अधिकारी डा. पाण्डेय खासे अनुभवी एवं सुलझे अधिकारियों में शुमार किए जाते हैं। वे बतौर प्रमुख सचिव वित्त तथा ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के चेयरमैन का भी दायित्व संभाल चुके हैं। ऐसे में उन्हें वित्त, लैण्ड बैंक, अवस्थापना, विद्युत आपूर्ति से लेकर तमाम ऐसे विषयों की पूरी जानकारी थी। यही वजह थी कि उद्यमियों को निवेश और फिर उससे होने वाले लाभ की पूरी संभावनायें गिनायीं। यही वजह है कि निवेशक बीमारू प्रदेश कहे जाने वाले राज्य में निवेश को तैयार हो गए और चार लाख 28 हजार करोड़ रुपए का रिकार्ड निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इसके बाद चुनौती थी इन समझौतों को बिना किसी रोकटोक और बाधा के धरातल पर उतारने की। यहां भी डा. पाण्डेय ने अपना ‘सर्वश्रेष्ठ’ देते हुए सराहनीय काम किया। तमाम ऐसी कानूनी जटिलताओं दूर करने और फाइलों का पेट भरने जैसे अनावश्यक कागजों को दरकिनार कर दिया ताकि उद्योगों की स्थापना में कोई अवरोध न आये। यही वजह है कि समझौता होने के पांच महीने बाद ही 60 हजार करोड़ का निवेश हो गया। ‘इन्वेस्टर्स समिट’ और ‘ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी’ के बीच ही डा. पाण्डेय ने औद्योगिक विकास आयुक्त से राज्य के मुख्य सचिव के पद तक सफर भी तय किया। उनके इस पद पर रहते सभी समझौते अब अमलीजामा पहनेंगे यह तय माना जा रहा है।

 

‘यह पहला मौका है जब उप्र में इतने बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है।
सतीश महाना,
औद्योगिक विकास मंत्री,
उत्तर प्रदेश सरकार।

उद्योगपतियों की प्रदर्शनी लगाकर नुमाइश कर जनता को बरगलाने की कोशिश की जा रही है। यहां ऐसी कई बार नुमाइशें लग चुकी हैं। जितनी सुविधाएं उद्योगपतियों को दी गई हैं, उनकी आधी ही सुविधाएं किसानों को दें, तो उनका कल्याण हो जाएगा।
राजबब्बर, सांसद एवं उप्र कांग्रेस अध्यक्ष।

 

पीएम मोदी और सीएम योगी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। इनकी कोशिशों का ही नतीजा है कि केवल पांच महीने के अंदर ही 60 हजार करोड़ का निवेश उत्तर प्रदेश में हो रहा है।

गौतम अडानी,
फाउंडर एवं चेयरमैन, अडानी ग्रुप।

यूपी में सरकार ने इन्वेस्टर फ्रेण्डली नीतियां बनाकर सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। इसके पीछे पीएम मोदी व सीएम योगी का महत्वपूर्ण योगदान है। यही वजह है कंपनी यूपी में 1000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
संजीव पुरी, आईटीसी ग्रुप के एमडी।

कंपनी अगले तीन साल में 25 हजार करोड़ रुपए उप्र में निवेश करेगी, जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा। योगी के निर्देशन एवं पॉजिटिव सोच के चलते बिड़ला ग्रुप यूपी में आगे बढ़ रहा है।
कुमार मंगलम बिड़ला,
आदित्य बिड़ला विक्रम समूह के अध्यक्ष।

हम कारोबारी हैं और काम में यकीन करते हैं। 2000 करोड़ का निवेश पहले ही चरण में कर रहे हैं और उप्र का सबसे बड़ा शापिंग मॉल लखनऊ में खोल रहे हैं। कई अन्य एनआरआई यूपी में निवेश को इच्छुक हैं।
यूसुफ अली,
लूलू ग्रुप के मुखिया।