हृदयनारायण दीक्षित

दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित : मन शक्तिशाली है। दुख और सुख का अनुभव मन के तल पर होता है। मन हमारे अनुसार नहीं चलता। मन मनमानी करता है। योग ध्यान ...
Comments Off on मन के तल पर होता है दुख और सुख का अनुभव
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हृदयनारायण दीक्षित : ऋग्वेद दुनिया का सबसे प्राचीन काव्य संकलन है। अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूनेस्को ने भी ऋग्वेद को प्राचीनतम अंतर्राष्ट्रीय धरोहर बताया है। ऋग्वेद के रचनाकाल में ‘लिपि’ ...
Comments Off on ऋग्वेद विश्व मानवता का प्रथम शब्द साक्ष्य है
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हृदयनारायण दीक्षित : चिकित्सा विज्ञान की परम्परा प्राचीन है। उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घ जीवन भारतीय मनीषियों की प्राचीन इच्छा रही है। उन्होंने सुव्यवस्थित आयुर्विज्ञान का तंत्र खड़ा किया ...
Comments Off on उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घ जीवन के पक्षधर थे वैदिक ऋषि
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‘सत्य का आग्रह’ वैदिक काल से प्राचीन है। हृदयनारायण दीक्षित : सत्याग्रह सत्य का आग्रह है। भारत में सत्य के तमाम पहलुओं पर विचार की प्राचीन परम्परा है। ...
Comments Off on किसी कुत्सित धारणा के आधार पर सत्य से भिन्न बोलना समाज विरोधी है
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हृदयनारायण दीक्षित : सफलता प्रसन्न्ता देती है और असफलता दुख। मोटे तौर पर सफलता का अर्थ इच्छानुसार कर्मफल की प्राप्ति है। इच्छानुसार कर्मफलता ही सफलता है। सफलता का ...
Comments Off on सफलता का मूल केन्द्र इच्छा या अभिलाषा है और अभिलाषाएं अनंत हैं 
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हृदयनारायण दीक्षित : भारतवासी प्रकृति से शांतिप्रिय हैं। इसके कारण उनकी उदात्त सभ्यता में खोजे जाने चाहिए। शांतिप्रियता उत्कृष्ट जीवन मूल्य भी है। लेकिन अंग्रेजी सत्ता भारत की ...
Comments Off on प्रकृति से शांतिप्रिय हैं भारतवासी, शांतिप्रियता का अनुचित लाभ उठाते थे अंगे्रज
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हृदयनारायण दीक्षित : भारत पाक के मध्य युद्ध की स्थिति है। पाकिस्तान की तरफ से मुसलसल युद्ध है। आमने सामने के युद्धों में वह हारता रहा है। भारतीय ...
Comments Off on पाकिस्तान प्राकृतिक राष्ट्र नहीं है, मजहब के आधार पर भारत विभाजन से यह एक मुल्क बना
दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित : भारत का स्वभाव राष्ट्रभाव है। कश्मीर पुलवामा की घटना के बाद यही राष्ट्रभाव चारो ओर प्रकट हो रहा है। यह अतिराष्ट्रवाद नहीं है। यह राजनैतिक ...
Comments Off on पुलवामा हमले के बाद राष्ट्रीय एकता सूत्र में बंध गया देश
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हृदयनारायण दीक्षित : भारतीय जनतंत्र अजर-अमर है। यह भारतीय समाज की मूल प्रकृति है। राष्ट्रजीवन का स्वाभाविक प्रवाह और भारत के लोगों की जीवनशैली। एक श्रेय विचार, एक ...
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अद्धयात्म दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित : स्वाद दिखाई नहीं पड़ता। सबके अपने स्वाद बोध हैं। इसलिए सबका स्वादिष्ट भी अलग-अलग है। लेकिन मीठा सबको प्रिय है। वैदिक पूर्वज मधुप्रिय जान पड़ते हैं। ...
Comments Off on हर व्यक्ति का स्वाद अलग, लेकिन मधु पदार्थ सभी को करता है आकर्षित