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हृदयनारायण दीक्षित

अद्धयात्म साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

ऋग्वेद से लेकर अथर्ववेद तक गायों की प्रशंसा है। महाकाव्य और पुराण गोयश से भरे पूरे हैं। वेदों में गाय को अबध्य बताया गया है। भारत का प्राचीन ...
Comments Off on प्रकृति प्रेमी है वैदिक समाज, वह सूर्य को नमस्कार करता है, उनसे बुद्धि मांगता है
अद्धयात्म दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

शतपथ ब्राह्मण में प्रश्न है – “मनुष्य को कौन जानता है?” मनुष्य को दूसरा मनुष्य नहीं जान सकता। प्रत्येक मनुष्य अनूठा है। अद्वितीय है। उस जैसा दूसरा मनुष्य ...
Comments Off on ‘बड़ा रहस्यपूर्ण है ‘स्वयं’, सोचता हूं कि क्या मेरा व्यक्तित्व दो ‘स्वयं’ से बना है, एक देखता है, दूसरा दिखाई पड़ता है’
अद्धयात्म दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

जीवन को भरपूर देखते हुए वायु को भी देखा जा सकता है। हम आधुनिक लोगों ने वायु को दूषित किया है। वायु की काया चोटहिल है। भारत की ...
Comments Off on वायु प्राण है, प्राण नहीं तो जीवन नहीं
साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित : अस्तित्व एक इकाई है। भारतीय दर्शन में इस अनुभूति को अद्वैत कहते हैं। अस्तित्व में दो नहीं हैं। यह एक है। यही एक भिन्न-भिन्न रूपों ...
Comments Off on परम सत्ता रस है, शब्द जीवन को मधुरस से भर दे, तब कविता
अद्धयात्म साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित : तीर्थ भारत की आस्था है। लेकिन भौतिकवादी विवेचकों के लिए आश्चर्य हैं। वैसे इनमें आधुनिक विज्ञान के तत्व भी खोजे जा सकते हैं। अनेक विद्वान ...
Comments Off on निष्प्राण मूर्ति में प्राण भरता है जल, पवित्रता का भाव तीर्थस्थल
अद्धयात्म जीवनशैली साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हिन्दुओं का कोई सर्वमान्य आस्था ग्रंथ नहीं और न ही सर्वमान्य देवता। हरेक हिन्दू की अपनी इच्छा। कोई अग्नि उपासक तो कोई जल का। यहां ब्रह्मा, विष्णु और ...
Comments Off on तर्क, जिज्ञासा और दर्शन की शुरुआत ऋग्वैदिक काल से भी प्राचीन
दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित: बोलने से मन नहीं भरता। लगातार बोलना हमारा व्यावहारिक संवैधानिक दायित्व है। विधानसभा का सदस्य हूं और अध्यक्ष भी। जनप्रतिनिधि जनता की ओर से बोलते हैं। ...
Comments Off on ‘प्रकृति की संगति में स्वयं का पुनर्सृजन ही वास्तविक अभिव्यक्ति’
अद्धयात्म साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित : गर्भ सभी प्राणियों का उद्गम है। माँ गर्भ धारण करती है। पिता का तेज गर्भ में माँ की जनन चेतना से मिलता है। जीवन अतिसूक्ष्म ...
Comments Off on ‘दुख का कारण है अज्ञानता, ज्ञान से मिलता है आनंद’
अद्धयात्म दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित : कालद्रव्य बदल गया है। समय भी प्रदूषण का शिकार है। दिक् भी स्वस्थ नहीं। मन और आत्म द्रव्य भी विष तनाव में हैं। स्वस्थ, मस्त ...
Comments Off on स्वस्थ, मस्त जीवन मधुअभिलाषा है, रोगरहित दीर्घ जीवन के अभिलाषी थे हमारे पूर्वज
दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित : संसार धर्म क्षेत्र है। यह कथन शास्त्रीय है। संसार कर्मक्षेत्र है। पुरूषार्थ जरूरी है। यह निष्कर्ष वैदिक है। संसार आनंद क्षेत्र है, परम चरम मधुरसा ...
Comments Off on सौन्दर्यबोध से भरेपूरे हैं वैदिक पूर्वज