
केंद्र सरकार ने इशारा किया है कि वो टाटा ग्रुप को करोड़ों के कर्ज में डूबे एयर इंडिया को बेच सकती है। बुधवार को इस तरह की खबरें आई थीं कि टाटा ग्रुप एयर इंडिया को फिर से खरीदना चाहता है। हालांकि इसके लिए कंपनी ने सरकार के सामने कुछ शर्ते रखी हैं। टाटा ग्रुप, सिंगापुर एयरलाइंस और विस्तारा के साथ मिलकर के एयर इंडिया को खरीदेगा।
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टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, कुछ हफ्ते पहले टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने वित्त मंत्री अरुण जेटली और नागर विमानन मंत्री अशोक गजपति राजू के साथ इस मुद्दे पर मुलाकात की थी। अब सरकार यह सोच रही है कि एयर इंडिया की आंशिक हिस्सेदारी को बेचा जाए या फिर पूरी तरह से बेच दिया जाए।
अरुण जेटली ने कहा था कि अगर प्राइवेट एयरलाइंस 85 फीसदी जिम्मेदारी संभाल सकती हैं तो फिर 100 फीसदी भी कर सकती हैं।
सरकार करे कर्ज माफ तो ही टाटा खरीदेगा एयर इंडिया
सूत्रों के मुताबिक, टाटा ग्रुप ने साफ किया है कि जब तक सरकार एयर इंडिया का 50 हजार करोड़ का कर्ज माफ नहीं करती है, तब तक वो सरकारी एयरलाइंस को नहीं खरीदेगा।
टाटा ग्रुप ने सरकार से एयर इंडिया को खरीदने के लिए जो इच्छा दिखाई है उसके तीन प्रमुख कारण हैं। पहला कारण ये है कि एयर इंडिया को सबसे पहले जेआरडी टाटा ने 1932 में टाटा एयरलाइंस के नाम से लॉन्च किया था। 1946 में इसका नाम बदल कर के एयर इंडिया कर दिया गया और 1953 में सरकार ने इसको टाटा से खरीद लिया था। अब इसे वापस खरीदकर टाटा फिर से अपना बता सकेगा।
दूसरा कारण ये है कि विस्तारा को अपनी इंटरनेशनल फ्लीट के लिए बड़े प्लेन चाहिए, जो फिलहाल उसके पास नहीं है। अगले साल से विस्तारा को अपनी इंटरनेशनल फ्लाइट्स शुरू करनी है, जिसके लिए उसे एयर इंडिया से साथ मिल सकता है।
तीसरा कारण ये है कि सिंगापुर एयरलाइंस को अपने देश में मौजूद प्राइवेट एयरलाइंस (थाई एयरवेज, कैथे पैसेफिक आदि) से काफी कड़ी टक्कर मिल रही है। एयर इंडिया के आने से उसे भी अपने नेटवर्क विस्तार करने में काफी मदद मिलेगी।