
ये हैं शानबाग…. इनकी 10 हजार से शुरू हुई कंपनी आज पूरे दक्षिण एशिया में जानी मानी कंपनी है जो आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज मुहैया कराती है। उनकी कंपनी ‘वैल्यूपॉइंट’ के 500 से अधिक क्लाइंट हैं जिसमें 73 कंपनी फॉर्च्यून लिस्ट में शामिल हैं। उनका सालाना टर्नओवर 600 करोड़ हो चुका है। आज हर कोई जानना चाहता है कि शानबाग ने यह सफलता कैसे हासिल की। शानबाग का कहना है कि किसी भी बिजनेस को सफल बनाने में काफी मेहनत करनी पड़ती है।
शानबाग का जन्म कर्नाटक के एक छोटे से गांव में हुआ था। उस वक्त उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे और उन्होंने सिर्फ 10,000 रुपए की मदद से अपनी कंपनी शुरू खोली। और इनकी कंपनी कहां से कहां पहुंच गई इसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते हैं। उनका सपना तेजी से कंपनी को बढ़ाने का था, लेकिन उन्हें ये भी पता था कि उनके पास इतने संसाधन नहीं हैं। उन्होंने बिजनेस करने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। इसके लिए लंबी योजना बनाई और पूरी मेहनत की।
शानबाग ने बताया कि जहां उनकी पैदाइश हुई वहां पर न कोई अच्छे स्कूल थे और न ही कॉलेज। पढ़ाई करने के लिए काफी दूर जाना पड़ता था। बाद में मुझे पंजाब सरकार के साथ मोहाली में काम करने का मौका मिला। वहां काम करते हुए दिमाग में कई आइडिया आए। शानबाग के दिल में कुछ कर गुजरने का जुनून था इसलिए वे वापस लौट आए।
उन्होंने वैल्यूपॉइंट सिस्टम की स्थापना की। 1994 तक आते-आते आईटी इंडस्ट्री भारत में नई दिशा लेने लगी थी और इसके साथ ही शानबाग की कंपनी का भी विस्तार होने लगा था। इसके बाद शानबाग ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शानबाग बताते हैं कि उनके कर्मचारी ही उनकी असली ताकत हैं। तभी तो आर्थिक मंदी का उनपर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
शानबाग बताते हैं कि मार्केट में हमेशा नए बदलाव होते रहते हैं। अगर उनके साथ नहीं चला गया तो पिछड़ने की नौबत आ जाती है। उनका मानना है कि हम जिस समाज से आते हैं उसका कर्ज हमें जरूर चुकाना चाहिए। उनका लक्ष्य कंपनी को 2,500 करोड़ रुपए का राजस्व के स्तर तक भी पहुंचाना है।