गुस्सा छूमंतर करने का यह है नया फॉर्मूला, आप भी जान लें

गरिमा को गुस्सा आता है, तो वह मन-ही-मन पसंदीदा गाना गुनगुनाने लगती हैं। पायल अपना गुस्सा शांत करने के लिए किचन में काम करती हैं आैर नई-नई डिशेज बनाती हैं आैर जैसे ही कोई उनके खाने की तारीफ करता है, तो उनका गुस्सा छूमंतर हो जाता है। अपने गुस्से को कंट्रोल करने का हर किसी का अपना-अपना तरीका होता है।
हर गुस्से के पीछे कोई-न-कोई वजह होती है। जैसे काम का दबाव या अन्य कोई घरेलू समस्या। इस वजह से भी व्यक्ति चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो जाता है। अगर यह समस्या आपके साथ भी है, तो अपने काम करने की एक योजना बनाएं, फिर प्राथमिकता के हिसाब से काम को करती जाएं। घर के काम को भी खुद पर ओढ़ने की बजाय उसे प्रत्येक सदस्यों में बांटने की कोशिश करें। जरूरत से ज्यादा काम का बोझ खुद पर न डालें।
गुस्सा शांत करने का सबसे कारगर उपाय है डीप ब्रीदिंग यानी लंबी गहरी सांस। जब भी गुस्सा आए, तो अपनी आंखों को बंद करें और गहरी सांस लें। फिर पूरी सांस आराम से बाहर छोडे़ं। इस प्रक्रिया को 9 से 10 बार दोहराएं। इससे आपका मन शांत होता है, जो कि गुस्से को शांत करने में मदद करता है। इस प्रक्रिया को कभी भी और कहीं भी किया जा सकता है।
कुर्सी पर बैठें या जमीन पर लेट जाएं। अपने पेट की गतिविधि पर 3-5 मिनट तक ध्यान दें। इस दौरान जब आप गहरी सांस लेंगी, तब आपके पेट में उभार आएगा और जब सांस छोडे़गी, तो पेट अंदर जाएगा। इस प्रक्रिया को 3 से 5 बार दोहराएं।
कभी-कभी कुछ लोग गुस्से में हिंसक हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग यह कहते हैं कि व्यक्ति जो कर रहा है, उसे वह करने दिया जाए। यानी उसे उसके हाल पर ही छोड़ दिया जाए। जबकि रिसर्च बताती हैं कि गुस्से में आए व्यक्ति को उसके हाल में छोड़ देने से व्यक्ति का गुस्सा और बढ़ता है। ऐसे में गुस्से पर काबू पाने के लिए सबसे बेहतर यह है कि आप इस बात को पहचानें कि आपको गुस्सा किस वजह से आ रहा है और फिर इसे नियंत्रित करने की एक रणनीति बनाएं।
कई बार हम आस-पास की चीजों से ही चिड़चिड़े और गुस्से में आ जाते हैं। काम और जिम्मेदारियों का भार इसे और अधिक बढ़ा देता है। ऐसे में अपने आपको एक ब्रेक दें और फिर कोई काम हाथ में लें। इन सभी उपायों को अपनाने के बावजूद आपको ऐसा लगता है कि आपका गुस्सा नियंत्रण से बाहर है और इसका असर आपके संबंधों और महत्वपूर्ण मामलों में भी पड़ रहा है, तो आपको किसी मनोवैज्ञानिक से सलाह लेने जरूरत है।
साइकोथेरेपी से इसका उपचार संभव है, जिसमें व्यक्ति को गुस्सा आने वाले कारणों की पहचान कर, उसे एंगर मैनेजमेंट सिखाया जाता है। इस थेरेपी में कुछ रिलैक्सेशन एक्सरसाइज भी बताई जाती है।’
यूरोपियन हार्ट जर्नल में छपे एक रिसर्च के मुताबिक, यदि गुस्सा दो घंटे से अधिक समय तक कायम रहता है, तो इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है।