मां ने नहीं अपनाया तो अमेरिका से पीएचडी कर बन गई अघोरी तांत्रिक

एजेन्सी/ बचपन में किसी के सिर से अगर मां का साया उठ जाए तो वो बच्चा बिखर जाता है. ऐसे में यदि घर में सौतेली मां आ जाए और वो भी उस बच्चे को अपनाने से इंकार कर दे तो मासूम के लिए जीवन किसी चुनौती से कम नहीं होता. एमपी के उज्जैन सिंहस्थ में हिस्सा लेने के लिए भी एक ऐसी महिला तांत्रिक पहुंची है जिनका बचपन मां के प्यार के बिना ही बीता. लेकिन हार मानने की जगह उन्होंने अपने आप को और मजबूत बनाया और फिर अमेरिका से पीएचडी करने के बाद अघोर तंत्र विद्या को अपना जीवन समर्पित कर दिया.
अप्रैल में होने वाले सिंहस्थ के लिए साधुओं से लेकर संत और तांत्रिकों का उज्जैन में जमावड़ा लग चुका है. लेकिन यहां पर एक महिला तांत्रिक ऐसी भी है जो सभी के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. ऐसा इसलिए क्योंकि जहां एक ओर महिलाएं श्मशान जाने से भी कतराती हैं, वहीं ये शिव भक्त श्मशान में जाकर अघोर तंत्र साधना करती है.
महाकाल की नगरी पहुंची शिवानी दुर्गा करीब दो महीने पहले ही एमपी में आयोजित होने वाले महाकुंभ का हिस्सा बनने के लिए पहुंच गई थीं. जब लोगों को पता चला कि अघोर तंत्र विद्या की ये साधक अमेरिका से पीएचडी भी कर चुकी है तो सब हैरान रह गए.
शिवानी दुर्गा ने ‘प्रदेश18’ के साथ हुई एक्सक्लूजिव बातचीत में बताया कि बचपन में ही उनकी मां का निधन हो गया था. जिसके बाद पिता ने दूसरा विवाह किया तो सौतेली मां ने उन्हें अपनाने से मना कर दिया. ऐसे में उनकी दादी ने उन्हें मां का प्यार दिया. उन्होंने बताया कि वो बचपन से ही श्मशान आया-जाया करती थीं. उन्हें उनकी दादी श्मशान में लाकर मृत लोगों की शांति के लिए चिताओं को प्रणाम करवाती थीं. लगभग रोज ऐसा करने से शिवानी भी निडर बन गईं और उनके अंदर आध्यात्मिक प्रवृत्ति ने जन्म लिया.
बड़ी हुईं तो अपने बलबूते पर वो अमेरिका गईं और आगे की पढ़ाई जारी रखते हुए शिकागो यूनिवर्सिटी से पीएचडी हासिल की. इस दौरान भी शिवानी दुर्गा के मन से आध्यात्म के प्रति लगाव कम नहीं हुआ. वापस आते ही शिवानी ने परिजनों के विरोध के बावजूद नागनाथ योगेश्वर गुरु से अघोर तंत्र की दीक्षा ली और फिर उन्हीं के साथ श्मशान जाकर शव साधना की. नागनाथ योगेश्वर गुरु ने शिवानी को जीवन में नई दिशा दी और उन्हें जीवन के सच से अवगत करवाया.
इसके बाद उन्होंने अपना जीवन तंत्र साधना को ही समर्पित कर दिया और सर्वेश्वरी शक्ति इंटरनेशनल अखाड़ा की स्थापना की. इस बीच उन्होंने ‘Hogwarts School of Witchcraft and Wizardry’ से भी पढ़ाई कर डिग्री हासिल की. अघोर तंत्र का नाम सुनते ही जहां लोग सहम से जाते हैं, वहीं शिवानी का मानना है कि अघोरी तो सभी होते हैं, क्योंकि अघोर शिव का रूप है और शिव का वास तो हर जगह है.
आज शिवानी दुर्गा के भक्त और अनुयायी दुनिया के कई देशों में फैले हुए हैं. शिवानी सिर्फ अघोर तंत्र ही नहीं बल्कि पश्चिमी देशों के रहस्यमय तंत्र शास्त्र विक्का, वूडू और सॉर्सरी की भी सिद्ध साधिका हैं. इनमें पारंगत होकर उन्होंने सभी विधाओं की समानताओं को जोड़कर नई पद्धतियां भी विकसित की हैं.