मुलायम को रास नहीं आया कांग्रेस के साथ गठबंधन, नहीं करेंगे चुनाव प्रचार

पिछले चार-पांच महीनों में अलग-अलग राजनीतिक तेवर दिखाते रहे मुलायम सिंह यादव ने रविवार को नया रंग दिखाया। मुख्यमंत्री पुत्र अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सपा और कांग्रेस गठबंधन को गंगा-यमुना का मिलन बताते हुए प्रदेश की जनता को विकास और सुशासन का भरोसा दिलाया ही था कि तीन-चार घंटों के अंदर ही मुलायम ने गठबंधन को सपा के लिए नुकसानदेह करार दे दिया।इतना ही नहीं पार्टी कार्यकर्ताओं को भी गठबंधन के खिलाफ जमीन पर उतार दिया। कार्यकर्ताओं से अपील की गठबंधन के खिलाफ लोगों को बताएं। वह खुद भी गठबंधन के लिए प्रचार में नहीं उतरेंगे।
पर मुलायम यह कहने से बचे कि वह इसके खिलाफ प्रचार करेंगे। सपा परिवार में चल रही लड़ाई यूं तो चुनाव आयोग के फैसले के बाद थोड़ी थम गई थी लेकिन रविवार को आये मुलायम सिंह के बयान ने साफ कर दिया कि खींचतान अभी भी जारी है।दरअसल जिस तरह मुलायम सिंह ने दिल्ली में एक समाचार एजेंसी को लिखित वक्तव्य पढ़कर बयान दिया उससे यह स्पष्ट हो गया कि हाथ से पार्टी जाने का मलाल तो था ही पर उससे भी ज्यादा बड़ी टीस यह है कि कई अपने नजदीकी टिकट से हाथ धो बैठे। उन्होंने अपने संक्षिप्त बयान में इसका जिक्र भी किया।
उन्होंने कहा, अखिलेश ने बहुत बड़ी भूल की है। उस कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया जो वर्षों तक सत्ता में रही और ऐसे कई काम हुए जिसके खिलाफ सपा को संघर्ष करना पड़ा। उत्तर प्रदेश में सपा मजबूत है। अकेली लड़ती तो विजय तय थी। लेकिन अखिलेश ने मौका गंवाया। गठबंधन ने पार्टी के कई ऐसे नेताओं का भविष्य खतरे में डाल दिया जो अगले पांच साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।मैं इस गठबंधन के लिए चुनाव प्रचार नहीं करूंगा। ध्यान रहे कि अखिलेश ने कई ऐसे नेताओं को टिकट नहीं दिया है जो मुलायम और शिवपाल यादव के मापदंड पर खरे थे लेकिन अखिलेश की कसौटी पर कच्चे निकले।
चुनाव आयोग में बाजी हारने के बाद मुलायम ने ऐसे लगभग 4 दर्जन प्रत्याशियों की सूची अखिलेश को भेजी थी। संभवत उसमें से कुछ लोगों को शामिल किया गया हो। पर ऐसे कई नेताओं की मुट्ठी पूरी तरह खाली हो गई जो खुद को सपा के लिए अपरिहार्य मानने लगे थे।जाहिर है मुलायम ने ऐसे नेताओं के दबाव में गठबंधन की खुलकर आलोचना की। पर इन सब बातों के बावजूद उन्होंने यह नहीं कहा कि वह खुद जमीन पर जाकर गठबंधन के खिलाफ प्रचार करेंगे। यह देखना रोचक होगा कि सपा कार्यकर्ता अपने पुराने मुखिया मुलायम की अपील को किस रूप में लेते हैं।