
उरी हमला: हाईलेवल मीटिंग जारी, देशभर में गुस्सा, निकाले गए जुलूस
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के उरी में सेना के मुख्यालय पर रविवार तड़के हुए आतंकी हमले में 17 जवान शहीद हो गए हैं व कई जवान घायल हो गए। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस हमले की रिपोर्ट सौंपेंगे। उरी हमले के पीछे एक बार फिर पाकिस्तान का हाथ होने के साफ संकेत मिल रहे हैं। वहीं गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज भी एक हाईलेवल मीटिंग बुलाई है। मीटिंग में सीआरपीएफ के डीजी समेत गृहमंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। सूत्रों के मुताबिक आतंकियों के पास से जो हथियारों मिले हैं उनपर मेड इन पाकिस्तान की मुहर लगी है। आतंकी हमले में जवानों की मौत के बाद देशभर में आक्रोश है। जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में यूनिट पर हुए भीषण आतंकी हमले के बाद सेना अब पाकिस्तान से लगती 778 किलोमीटर लंबी एलओसी सीमा पर अपना रुख कड़ा करने की तैयारी में है। भारतीय सेना एलओसी पर तोपों की तैनाती और अन्य ऑपरेशंस को मंजूरी देने की मांग कर सकती है। यही नहीं भारतीय सुरक्षा बलों का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि सरकार सीमा पार हमलों पर भी विचार करे। सुरक्षा बलों का मानना है कि सरकार को पाकिस्तानी सीमा के भीतर सीमित, लेकिन कड़े हमले करने की अनुमति देने पर विचार करना चाहिए। देशभर में उरी आतंकी हमले को लेकर गुस्सा है। यमुना नगर में जहां शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई, वहीं पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। पठानकोट और अमृतसर में उरी हमले के खिलाफ रोष दिखा। वहां भी पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगे। वाराणसी में लोगों ने शहीदों की आत्मा की शांति के लिए गंगा आरती की और दीप जलाकर श्रद्धांजलि दी। फर्रूखाबाद में भी लोगों ने जमकर की नारेबाजी की, वहीं लखनऊ में उरी आतंकी हमले पर पढ़ी गई विशेष नमाज। लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ जुलूस भी निकाला और उसका झंडा भी जलाया।
पठानकोट के मास्टरमाइंड ने रची साजिश
इस बात की पुष्ट हो चुकी है कि चारों आतंकी जैश-ए-मोहम्मद के हैं। ये वहीं आतंकी संगठन है जिसने 8 महीने पहले पठानकोट एयरबेस पर हमला बोला था। हैरानी ये है कि इसका आका मसूद अजहर मोस्ट वांटेड है, लेकिन वो पाकिस्तान की सरपस्ती में न सिर्फ आजाद घूम रहा है, बल्कि पाकिस्तानी दद्म युद्ध का मोहरा भी बना हुआ है।