660 घंटे के बाद शिकार करते बाघ ने दिया ‘पर्फेक्ट शॉट’

एजेंसी/ जयपुर। आखिरकार भारत के राजस्थान स्थित रणथंभौर नेशनल पार्क में ब्रिटिश फोटोग्राफर एंडी राउस को वह खूबसूरत पल दिया, जिसका उन्हें इंतजार था। ब्रिटिश फोटोग्राफर एंडी राउस अपनी आंखों के सामने बाघ को शिकार करते देखना और कैमरे में कैद करना चाहते थे।
उन्होंने भारत की 220 सफारियों का दौरा किया और कुल 660 घंटे तक इस पल का इंतजार किया, जिसे वे ‘द होली ग्रेल’ का नाम देते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने कई बार बाघ को शिकार करते कैप्चर करने की कोशिश की है क्योंकि बाघ की ऐसी तस्वीरें काफी कम होती हैं।’
वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी के क्षेत्र में ये शॉट्स लॉटरी की तरह साबित होंगी। यह दिन मेरे लिए काफी अच्छा था और मेरे फोटोग्राफी के लिए भी क्योंकि खुले में शिकार करते बाघ को देखा भी और तस्वीरें भी लेने में सफल हो सका।
डेली मेल के अनुसार, इन बड़े जीवों पर अपनी पहली किताब के लिए तस्वीरों के इंतजाम में सबसे पहले तीन महीने के ट्रिप पर निकले फोटोग्राफर बाघों को देखने के लिए अनगिनत बार रणथंभौर गए। अब तक इस मौके को कैमरे में कैद करने का मौका उन्हें नहीं मिला था।
बाघ के इस शिकार को कैप्चर करने में दस मिनट का समय लगा, लेकिन इसके लिए 660 घंटों का इंतजार करना पड़ा। अपने 6 लोगों की टीम के साथ फोटोग्राफर का सामना कई बार ऐसे मौकों पर हुआ, लेकिन वह दुर्भाग्य से तस्वीरें नहीं ले पाते थे।
इस दिन राउज मादा बाघ नूर टी39 (रिजर्व के सभी बाघों को नंबर दिया गया है) का पीछा कर रहे थे, तभी वह रुक गई और पैरों को मोड़ वहीं बैठ गई। अपने शिकार को दबोचने के कुछ मिनटों बाद अपनी गुफा में चली गई।
राउज ने कहा, ’बाघों को देखते देखते मुझे इस बात का आइडिया हो गया है कि वो शिकार करने से पहले इस तरह करती है। तभी हमने कुछ पत्थरों के गिरने की आवाज सुनी और तभी झाड़ियों के बीच से सांभर हिरन निकलता दिखाई दिया।’
इसके बाद अपनी पूरे ताकत से इसने हिरन पर हमला किया और इसे घसीटने से पहले उसके गर्दन पर अपने जबड़े गड़ा दिए। इस सबमें उसे मात्र दस मिनट का समय लगा।
राउज ने कहा, ‘मैंने कई जानवरों को शिकार करते देखा है लेकिन बाघ का शिकार देखने पर आपको इसके गजब के फोकस व ताकत का पता चलेगा।’