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बड़ी खबर: सबसे बड़े स्लम ‘धारावी’ में कोरोना का संक्रमण

कोरोना ने भारत में तेजी से पैर पसारे हैं और इसके पीछे दिल्ली के निजामुद्दीन में हुए तब्लीगी जमात कार्यक्रम को बड़ा कारण माना जा रहा है। कोरोना से अब तक देश में चार हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और लोगों के मरने की संख्या सौ के पार पहुंच गई है। लेकिन मुंबई में बसी एशिया की सबसे बड़ी बस्ती धारावी में एक शख्स का कोरोना से मर जाना ज्यादा भयावह स्थिति है। धारावी बस्ती को एशिया की सबसे बड़ा स्लम बताया जाता है, 50 एकड़ के एरिया में साढ़े छह लाख से ज्यादा की जनसंख्या है।

ऑस्कर जीतने वाली फिल्म स्लमडॉग मिलिनेयर में भी धारावी को दिखाया गया है। दुनिया के कई सिटी प्लानर्स इस बस्ती के समाज और अर्थव्यवस्था पर रिसर्च करते हैं। 23 मार्च को एक 56 वर्षीय शख्स में बुखार और खांसी जैसे लक्षण दिखे और डॉक्टर को दिखाने के बाद सामान्य दवाई खाने लगा। ये शख्स धारावी में अपनी पत्नी, चार बेटियों और दो बेटों के साथ रहता था।

तीन दिन के बाद शख्स को तेज बुखार आया और मरीज को पास के सायन अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। डॉक्टर के पूछे जाने पर शख्स ने बताया कि उसकी कोई ट्रेवल हिस्ट्री नहीं है, इस पर डॉक्टर ने उसे कफ सीरप और कुछ दवाईयां देकर घर वापस भेज दिया। लेकिन 29 मार्च को सांस लेने की दिक्कत होने के कारण डॉक्टर ने मरीज को अस्पताल में भर्ती कर लिया और कोरोना का टेस्ट कराने की सलाह दी।

तीन दिन बीतने के बाद मरीज का टेस्ट पॉजिटिव आया और उसकी हालत पहले से और खराब होने लगी, जिसको देखते हुए डॉक्टर ने मरीज को बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया जहां पहले से कोरोना के मरीजों का इलाज हो रहा था। लेकिन डॉक्टर के हरकत में आने में काफी देर हो गई थी और कोरोना की वजह से उस 56 वर्षीय शख्स की मौत हो गई।

धारावी में कोरोना से मरने वाला ये पहला मामला था और ये मरीज धारावी में ही कपड़ो का व्यापार करता था। मुंबई में फैली हर बड़ी बीमारी ने धारावी में अपना डेरा जरूर जमाया है, डायरिया या मलेरिया जैसी बड़ी बीमारियों से भी धारावी अछूता नहीं है। लेकिन कोरोना के लिए सोशल डिस्टेंसिंग बहुत जरूरी है और धारावी जैसी बस्ती में लोग बेहद छोटे और संकीर्ण घरों में रहने के लिए मजबूर हैं।

अब सवाल ये उठता है कि बिना किसी ट्रेवल हिस्ट्री के शख्स को कोरोना कैसे हुआ, क्या देश में सामुदायिक संक्रमण का आगाज हो चुका है? हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय अबतक कोरोना के स्टेज-3 में होने की पुष्टि नहीं करता है। धारावी में मरने वाले पहले शख्स ने अपने ही कॉम्प्लेक्स में एक अपार्टमेंट और खरीद रखा था, जिसमें पांच लोग रह रहे थे। ये लोग दिल्ली के निजामुद्दीन में हुए तब्लीगी जमात में शामिल हुए थे। तब्लीगी जमात में इंडोनेशिया, मलेशिया और अमेरिका समेत आठ देशों से लोगों ने शिरकत थी।

पुलिस ने जानकारी दी कि धारावी में ये पांच लोग 19-21 मार्च के बीच रहे थे और बाद में केरल के लिए रवाना हो गए थे। हालांकि पुलिस अभी इन पांचों लोगों की निगरानी कर रही है। उन्होंने कहा कि ये जानना बेहद जरूरी है कि मरने वाले शख्स में संक्रमण कैसे फैला। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए एहतियाद उठाने की तर्ज पर पुलिस ने उस कॉम्प्लेक्स के 308 अपार्टमेंट और 80 दुकानों को सील कर दिया है। ढाई हजार से ज्यादा लोगों को क्वारंटीन कर दिया गया है। वहां खाने-पीने के सामान की सप्लाई जारी है। स्वास्थ्य कर्मचारियों ने हर घर को सैनिटाइज किया है।

इसके अलावा अधिकारियों ने सायन अस्पताल में 300 बिस्तर क्वारंटीन के लिए तैयार कर दिए और साथ ही डॉक्टर और नर्स को सुरक्षित सामान भी मुहैया कराए। हालांकि इस महामारी को रोकने के लिए ये सब काफी नहीं था। दो अप्रैल को धारावी में रहने वाला एक 35 वर्षीय शख्स कोरोना से संक्रमित पाया गया, जो एक निजी अस्पताल में डॉक्टर था। नगर निगम ने डॉक्टर की बिल्डिंग में रहने वाले तीन सौ लोगों को आइसोलेट रहने के निर्देश गिए।

डॉक्टर ने अधिकारियों को जानकारी दी कि निजी अस्पताल में काम करने वाली दो नर्स को भी कोरोना वायरस हो गया है और रविवार तक उस बिल्डिंग में रहने वाली 30 वर्षीय महिला और 60 वर्षीय शख्स में कोरोना के लक्षण देखे गए। अधिकारियों ने बताया कि धारावी में संक्रमण को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि धारावी में दो शख्स पॉजिटिव मिलने के बाद टेस्टिंग में तेजी कर दी गई है। अबतक 21 लोगों का सैंपल ले लिया गया है।

मेडिकल ऑफिसर वीरेंद्र मोहिते ने बताया कि टेस्ट का परिणाम देर से आने पर समय की ज्यादा बर्बादी हो रही है। जिन लोगों को कोरोना संक्रमण हैं उन्हें आइसोलेशन वॉर्ड में भेजने में भी देरी हो रही है। उन्होंने बताया कि बस्ती में कोरोना का फैलना एक बड़ा खतरा हो सकता है और हमारी पहली प्राथमिकता इसे रोकने की है।

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