उत्तर प्रदेशराज्य

डॉन बृजेश नहीं, अब कहिए MLC बृजेश, सपा को दी करारी शिकस्त

phpThumb_generated_thumbnail (5)वाराणसी. सपा की सारी कवायाद धरी रह गई। सारी रणनीत ध्वस्त हो गई। यहां तक कि ऐन चुनाव से पहले बृजेश को बनारस से पहले शाहजहांपुर फिर सहारनपुर जेल भेजने की कवायद का भी कोई फर्क नहीं पड़ा और वाराणसी क्षेत्र एमएलसी चुनाव में चर्चित बृजेश सिंह ने सपा प्रत्य़ाशी मीना सिंह मनोज को पहले चक्र की गणना में ही शिकस्त दे दी है। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई । लेकिन जिला मुख्यालय पर बृजेश खेमें में जश्न का माहौल है। हर कोई एकदूसरे के गले मिल कर बधाई दे रहा है।
 
बृजेश ने 1954 मतों हासिल की जीत
जिला निर्मवाचन अधिकारी की ओर से घोषित परिणाम के मुताबिक एमएलसी चुनाव में कुल 3038 मत पड़े। इसमें से सपा की मीना सिंह मनोज को 1038 मिला। इस तरह बृजेश सिंह निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा की मीना सिंह को 1954 मतों से करारी शिकस्त दी है। बृजेश ने शुरू से ही जो बढ़त बनाई फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। आलम यह था कि बृजेश के पक्ष में 70 तो मीना सिंह मनोज के पक्ष में 30 फीसदी वोटों की गड्डियां बनती रहीं। अंततः बृजेश ने बाजी मार ली।�
 
लगातार चौथी बार बृजेश के घर में गई एमएलसी सीट
यह लगातार चौथा मौका है जब बृजेश घराने ने एमएलसी सीट पर कब्जा जमा लिया। बतादें कि वाराणसी एमएलसी सीट पर सबसे पहले बृजेश के भाई उदयनाथ सिंह उर्फ चुलबुल सिंह ने भाजपा से कब्जा जमाया था। वह दो बार विजयी बने। उसके बाद पिछले चुनाव में बृजेश की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह ने बसपा से जीत हासिल की। इस दफा खुद बृजेश ने निर्दल प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल कर ली।
 
एमएलए चुनाव का लिया बदला
बृजेश ने विधानसभा चुनाव में मनोज सिंह डब्ल्यू से मिली हार का हिसाब चुक्ता कर लिया। बतादें कि 2012 विधानसभा चुनाव में मनोज सिंह डब्ल्यू ने बृजेश को सैयदराजा सीट से पटखनी दी थी। इस बार
मनोज की बहन मीना चुनाव मैदान में थीं। लेकिन लड़ाई मनोज और बृजेश में ही थी और बृजेश ने मनोज को करारी पटखनी दे कर राजनीतिक पारी की शुरूआत कर ही ली।
 
मतदान के दिन ही दिखने लगा था यह रुझान
मतदान के दिन ही ऐसा लगने लगा था कि बृजेश सपा को दे देंगे करारी शिकस्त। कारण प्रायः हर बूथ पर 70-30 का ही आंकड़ा बताया जा रहा था। पत्रिका ने उसी दिन कांग्रेस के एक पार्षद के हवाले से यह आंकड़ा जाहिर भी किय़ा था।
 
औंधे मुंह गिरी सपा
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने के बाद सपा का जो हौसला बढ़ा था वह एमएलसी चुनाव में औंधे मुंह गिर गया। जिला पंचायत में सर्वाधिक सीट का दावा करने वाली सपा घोषित उम्मीदवार को इस काबिल भी वोट नहीं दिला सकी जिसे सम्मान जनक कहा जा सके।

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