दस्तक-विशेषराजनीति

कांग्रेसियों, पहले अपना चरित्र देखो

देहरादून (मुरारी सिंह पहाड़ी): तमिलनाडु में सरकार के एक लैपटॉप वितरण कार्यक्रम के दौरान डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने कहा, “उत्तर भारत में क्या कहा जाता है? लड़कियों, काम पर मत जाओ, घर पर रहो, रसोई में रहो, बच्चा पालो, यही तुम्हारा काम है.” इस तरह उन्होंने न सिर्फ उत्तर भारत की निंदा की, बल्कि हमारी मातृशक्ति का भी अपमान किया है। वे इस देश को उत्तर और दक्षिण में बांटना चाहते हैं। इसीलिए ऐसे बयान देते रहते हैं।

ठीक है, यह तमिलनाडु के नेता ने कहा कि वे हमेशा उत्तर भारत के खिलाफ हमेशा कुछ न कुछ बकते रहते हैं और हम उन्हें झेलते रहते हैं। लेकिन यहाँ के कांग्रेसियों को क्या हो गया है, ऐसे मौके पर इनके मुंह क्यों सिल जाते हैं? ये इसलिए भी कुछ नहीं बोलते, क्योंकि वो इन्हीं के गठबंधन के पार्टनर हैं।पार्टनर है तो क्या हुआ? क्या आप चुपचाप सहन करते रहोगे? भाजपा के क्षेत्रीय से लेकर केन्द्रीय नेतृत्व तक, सबने एक सिरे से इस बयान की भर्त्सना की है। देश भर में इस विभाजनकारी बयान की निंदा हो रही है। लेकिन कांग्रेसियों की जुबान पता नहीं क्यों ऐसे मौकों पर सिल जाती है। यह भी संभव है कि भाजपा के विरोध को देखकर कल को ये डीएमके की तारीफ़ में न उतर आयें।कांग्रेस के इन्हें करतबों की वजह से वह पूरे देश में सिमटती जा रही है।यदि आज गांधी-नेहरु ऊपर से देख रहे होंगे तो खून के आंसू बहा रहे होंगे।

हम तो उत्तराखंड के कांग्रेसियों की बात कर रहे थे, जो यहाँ की एक माननीय मंत्री के पति, जो यहाँ की सरकार में भी नहीं हैं, द्वारा किसी और सन्दर्भ में बिहार की महिलाओं को लेकर दिए गए एक बयान के विरोध में उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अच्छी-खासी अत्यंत भद्र आदरणीय रेखा आर्य के खिलाफ भद्दी-भद्दी बातें कह रहे हैं। सचमुच इन कांग्रेसियों का चारित्रिक पतन हो गया है। अच्छा है कि वरिष्ठ नेता और विचारक भगत सिंह कोशियारी को फटकार लगानी पड़ी है कि राजनीति में और चाहे जो हो, चरित्र हनन नहीं होना चाहिए। लेकिन इन कांग्रेसियों को कौन समझाए, जिनका अपना कोई चरित्र ही नहीं बचा हो! यदि इन कांग्रेसियों की पत्नियों या पतियों के पूर्व में दिए गए बयान खुलने लग जाएँ तो इनकी क्या इज्जत रह जायेगी?

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