
नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में हुमायूं कबीर की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। एक ओर कथित स्टिंग ऑपरेशन से उनकी छवि पर असर पड़ा, वहीं अब बाबरी मस्जिद निर्माण से जुड़े फंड को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।
इस मामले में इस्लामिक फाउंडेशन ऑफ इंडिया ट्रस्ट के कैशियर मोइनुल हक उर्फ राणा ने इस्तीफा देते हुए हुमायूं कबीर पर चंदे के पैसों के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक, कबीर लगातार चेक के जरिए रकम निकालते रहे, लेकिन खर्च का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं दिया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मोइनुल हक ने आरोप लगाया कि मस्जिद निर्माण के नाम पर जुटाया गया चंदा कहां खर्च हुआ, इसका कोई पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। कैशियर होने के बावजूद उन्हें वित्तीय लेन-देन की पूरी जानकारी नहीं दी गई। यहां तक कि कुछ रिपोर्ट्स में QR कोड के जरिए फंड जुटाने और उसके दुरुपयोग की भी आशंका जताई गई है।
जिस इलाके में मस्जिद का निर्माण प्रस्तावित है, उसे हुमायूं कबीर का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन इन आरोपों के बाद उनकी पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
इससे पहले एक वायरल स्टिंग वीडियो में हुमायूं कबीर कथित तौर पर बड़ी रकम की डील पर चर्चा करते नजर आए थे। हालांकि उन्होंने इस वीडियो को फर्जी और एआई से तैयार बताया है और इसे शेयर करने वालों के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराने की बात कही है।



