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पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण के पीछे चल रहा तुष्टिकरण का खेल, रिपोर्ट में आए चौंकाने वाले आंकड़े

नई दिल्ली : खुद को दलितों-पिछड़ों का हितैषी बताकर जाति आधारित जनगणना की पैरोकारी भले ही विपक्षी दल पुरजोर ढंग से कर रहे हों, लेकिन कुछ गैर भाजपा शासित राज्यों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण में सेंध लगा दी गई है। बंगाल की तस्वीर सबसे चिंताजनक है। वहां के राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट इशारा करती है कि आरक्षण की व्यवस्था को मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति पर न्योछावर कर दिया गया है।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का दावा है कि बंगाल में ओबीसी की सूची में कुल 179 जातियां दर्ज हैं। इनमें 118 मुस्लिम समुदाय की जातियां शामिल कर दी गई हैं। पिछड़ा वर्ग के हिस्से का आरक्षण, मतांतरण कर हिंदू से मुस्लिम बने लोगों और बांग्लादेशी घुसपैठियों को रेवड़ी की तरह बांटा जा रहा है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहीर ने अनौपचारिक बातचीत में बताया कि हाल ही में उन्होंने बंगाल के अधिकारियों के साथ वहां ओबीसी आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की।

अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ओबीसी की सूची में वहां 179 जातियां हैं, जिनमें से 118 मुस्लिम वर्ग की हैं। इस बारे में अधिकारियों से प्रतिप्रश्न किया गया तो बताया गया कि कल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRI) की रिपोर्ट के आधार पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने इसे लागू कराया है। 2011 से पहले ओबीसी में 108 जातियां शामिल थीं। इनमें 53 मुस्लिम और 55 हिंदुओं की थीं।

2011 के बाद राज्य सरकार ने 71 नई जातियों को ओबीसी सूची में शामिल किया। इनमें 65 मुस्लिम और छह हिंदू हैं, जबकि राज्य की आबादी में 70.5 प्रतिशत हिंदू और 27 प्रतिशत मुस्लिम हैं। इसी तरह मेडिकल कालेज, उच्च शिक्षण संस्थान सहित भर्तियों में आरक्षण के आंकड़े भी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने दिए। उसके मुताबिक, 91.5 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मुस्लिम ओबीसी को दिया गया।

अहीर का कहना है कि वहां मुस्लिमों को उनकी वंशावली के अनुसार नहीं, व्यवसाय देखकर ओबीसी में दर्ज किया गया है। मुस्लिमों को अनुचित लाभ देने के लिए गलत प्रक्रिया अपनाई गई। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के अनुसार कई जिले ऐसे हैं, जहां ओबीसी वर्ग में शामिल किए गए अधिकांश लोग बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं। बहुतेरे ऐसे मुस्लिम हैं, जो पहले हिंदू थे और बाद में मतांतरण कर लिया।

जब उनकी संख्या और मतांतरण का वर्ष पूछा गया तो जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने कहा कि इमस मुद्दे पर बंगाल सरकार के साथ एक-दो सुनवाई और की जाएंगी। यदि वह सूची और प्रक्रिया को संशोधित नहीं करते हैं तो राष्ट्रपति से शिकायत की जाएगी।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि आरक्षण व्यवस्था में बिहार, राजस्थान और पंजाब में भी खामियां मिली हैं। बिहार में नान क्रीमी लेयर को ओबीसी का प्रमाण पत्र नहीं दिया जा रहा है। वहां के अधिकारी ने ही आयोग को लिखित शिकायत दी है। साथ ही कुर्मी महतो समुदाय के लोगों को जो प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं, उनमें उन्हें छोटा नागपुर का बताया जा रहा है, जो अब झारखंड में है।

सरकार के ही पुराने आदेश के अनुसार वह प्रमाण पत्र अमान्य हैं। उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण कोटा निर्धारित है। पंजाब में अनुसूचित जाति को 25 प्रतिशत और ओबीसी को मात्र 12 प्रतिशत दिया जा रहा है। 13 प्रतिशत अनुपयोगी है। वहां की सरकार ने आश्वस्त किया है कि वे सुधार कर रहे हैं। इसी तरह राजस्थान में सात जिले आदिवासी क्षेत्र घोषित हैं। वहां अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिया ही नहीं जा रहा। सरकार ने गलती मानते हुए सुधार के लिए आश्वस्त किया है।

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