हृदयनारायण दीक्षित

दस्तक-विशेष स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : काम प्रकृति में सर्वव्यापी है। प्राकृतिक है। प्रकृति की सृजनशक्ति है। प्रत्येक शक्ति का नियमन भी होता है। नियमविहीन शक्ति अराजकता में प्रकट होती ...
Comments Off on काम कामनाओं का बीज है
दस्तक-विशेष स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : राष्ट्र प्राचीन वैदिक धारणा है और नेशन आधुनिक काल का विचार है। राष्ट्र के लिए अंग्रेजी भाषा में कोई समानार्थी शब्द नहीं है। ई.एच. ...
Comments Off on नेशन और राष्ट्र पर्यायवाची नहीं हैं
दस्तक-विशेष स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : भूमि और सभी प्राणी परस्पर अन्तर्सम्बन्धित हैं। यह नेह मां और पुत्र जैसा है। वैदिक साहित्य में इस सम्बंध का अनेकशः उल्लेख है। वैदिक ...
Comments Off on वृक्ष, वनस्पति औषधि के रूप में हमारी सेवा करते हैं
ज्योतिष दस्तक-विशेष स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : काव्य में भाव अभिव्यक्ति की प्रमुखता होती है और विज्ञान में प्रत्यक्ष सिद्धि की। विज्ञान में पृथ्वी सौर मण्डल का ग्रह है। पृथ्वी पर ...
Comments Off on कविता और विज्ञान एक साथ नहीं मिलते
दस्तक-विशेष स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : संसार की समझ जरूरी है और अपना ज्ञान भी। ज्ञान के अभाव में सब कुछ असंभव। ज्ञान से महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं। ज्ञान परम ...
Comments Off on ज्ञानी समान होकर भी एक जैसे नहीं होते
दस्तक-विशेष स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : गीता लोकप्रिय ग्रन्थ है। वेदों की लोकप्रियता भी आसमान पर पहुंची। लेकिन गीता ने वेदों की लोकप्रियता को भी पीछे छोड़ा। गीता की लोकप्रियता ...
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दस्तक-विशेष स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित : ऋग्वेद दुनिया का प्राचीनतम काव्य है और प्राचीनतम ज्ञानोदय। लेकिन इसके रचनाकाल पर यूरोपीय दृष्टिकोण वाले विद्वानों के कारण बहस चलती है। मैक्समुलर के अनुसार ...
Comments Off on ऋग्वेद पर अनायास बहस करते हैं पश्चिम के विद्वान
दस्तक-विशेष स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित : भारतीय संस्कृति का आदि स्रोत वैदिक दर्शन है। इसी दर्शन से संस्कृति का विकास हुआ। ऋग्वेद में दर्शन, संस्कृति व सभ्यता के महत्वपूर्ण सूत्र हैं। ...
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दस्तक-विशेष स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित : प्रकृति प्रतिपल अभिव्यक्ति होती रहती है। सौन्दर्य प्रकृति की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति है और सौन्दर्य का सरस कथन कविता है। कविता का उद्भव केन्द्र भाव है। ...
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दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

हृदयनारायण दीक्षित : धर्म प्राकृतिक व्यवस्था है। भारत की धर्म देह विराट है। यह संपूर्ण अस्तित्व को आच्छादित करती है। इसलिए धर्म का बौद्धिक विवेचन निर्वचन जटिल है। ...
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